अखिलेश के सामने भिड़े सपा के दो नेता, बैठक में गाली-गलौज तक पहुंची बात, एक घंटे बाद एटा-कासगंज का पूरा संगठन भंग
लखनऊ में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर सपा की बैठक में एटा-कासगंज के दो नेताओं के बीच विवाद हो गया। बात गाली-गलौज तक पहुंचने का दावा है। अखिलेश यादव के बैठक छोड़ने के करीब एक घंटे बाद दोनों जिलों की जिला कार्यकारिणी और फ्रंटल संगठन भंग कर दिए गए।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी की एक बैठक में ऐसा विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद एटा और कासगंज के पूरे संगठन पर कार्रवाई हो गई। लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में शनिवार को एटा-कासगंज के संगठन और चुनावी तैयारियों को लेकर बुलाई गई बैठक में पार्टी के दो नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। मामला बढ़ा तो गाली-गलौज तक की स्थिति बनने का दावा किया गया। बैठक में मौजूद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नेताओं को अनुशासन में रहने की नसीहत दी। इसके बाद वह बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए। घटनाक्रम के करीब एक घंटे बाद सपा की ओर से एटा और कासगंज की जिला कार्यकारिणियों को भंग करने का आदेश सामने आया। कार्रवाई केवल जिला कार्यकारिणी तक सीमित नहीं रही, बल्कि दोनों जिलों के फ्रंटल संगठनों और एटा-कासगंज से संबंधित राज्य कार्यकारिणी के पदाधिकारियों व सदस्यों को भी पद से हटा दिया गया।
2027 की तैयारी के लिए बुलाई गई थी बैठक
सपा मुख्यालय में यह बैठक एटा और कासगंज में पार्टी के संगठन की स्थिति, पिछले चुनावों के नतीजों और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर फीडबैक लेने के लिए बुलाई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों जिलों के करीब 250 वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी बैठक में मौजूद थे। दोपहर करीब 12 बजे अखिलेश यादव बैठक में पहुंचे। नेताओं से संगठन की जमीनी स्थिति और चुनावी तैयारियों की जानकारी ली जा रही थी। इसी दौरान चर्चा का माहौल अचानक आपसी विवाद में बदल गया।
मंजीत यादव और जुगेंद्र सिंह यादव के बीच शुरू हुई बहस
बैठक में सपा नेता मंजीत यादव पिछले चुनावों में पार्टी की स्थिति और हार के कारणों को लेकर अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान एटा जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव भी अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए। रिपोर्ट के अनुसार, जुगेंद्र सिंह यादव की बात के दौरान मंजीत यादव ने कुछ शब्दों पर आपत्ति जताई। इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन विवाद बढ़ता गया।
बात गाली-गलौज तक पहुंचने का दावा
विवाद बढ़ने के बाद बैठक का माहौल असहज हो गया। रिपोर्टों में दावा किया गया कि दोनों पक्षों के बीच गाली-गलौज तक की स्थिति बन गई। इस दौरान अखिलेश यादव ने नेताओं को अनुशासन में रहने की नसीहत दी। अखिलेश यादव ने बैठक में मौजूद नेताओं के व्यवहार पर नाराजगी जताई। उन्होंने पार्टी अनुशासन का पालन करने और वरिष्ठ नेताओं की बात सुनने की बात कही। इसके बाद वह बैठक छोड़कर चले गए। इस घटनाक्रम का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है।
अखिलेश के जाते ही संगठन पर कार्रवाई की चर्चा
बैठक खत्म होने के बाद पार्टी के भीतर कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। इसके करीब एक घंटे बाद एटा और कासगंज के संगठन को लेकर बड़ा फैसला सामने आया। सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, एटा और कासगंज के जिलाध्यक्षों के साथ दोनों जिलों की जिला कार्यकारिणियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया। दोनों जिलों के फ्रंटल संगठनों के जिलाध्यक्षों, कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और सदस्यों को भी पद से हटा दिया गया। इसके अलावा एटा और कासगंज से संबंधित सपा की राज्य कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और सदस्यों को भी इस कार्रवाई में शामिल किया गया।
सिर्फ जिलाध्यक्ष नहीं, कई स्तरों पर हुआ बदलाव
इस फैसले की खास बात यह है कि कार्रवाई केवल दो जिलाध्यक्षों तक सीमित नहीं रही। जिला संगठन से लेकर फ्रंटल संगठनों और राज्य कार्यकारिणी में दोनों जिलों से जुड़े पदाधिकारियों तक को हटाया गया है। यानी पार्टी ने एटा और कासगंज में संगठन के कई स्तरों को एक साथ रीसेट कर दिया है। अब इन दोनों जिलों में नए संगठन के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।
अब नई टीम के गठन पर नजर
2027 विधानसभा चुनाव से पहले एटा और कासगंज में संगठन को भंग करने के बाद सपा नेतृत्व के सामने अब नई टीम खड़ी करने की चुनौती है। दोनों जिलों में जिलाध्यक्ष से लेकर कार्यकारिणी और फ्रंटल संगठनों तक नए पदाधिकारियों का चयन किया जाना है। ऐसे में स्थानीय नेताओं की सक्रियता बढ़ना तय है और नई जिला इकाइयों में किसे जगह मिलती है, इस पर भी नजर रहेगी। हालांकि पार्टी की ओर से अभी नई कार्यकारिणियों के गठन को लेकर नाम सामने नहीं आए हैं।
एटा-कासगंज में सपा के लिए संगठन क्यों अहम ?
एटा और कासगंज में संगठन को लेकर यह फैसला ऐसे समय हुआ है, जब सपा 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। पार्टी अलग-अलग जिलों में संगठन की स्थिति की समीक्षा और पुनर्गठन कर रही है। हाल के दिनों में दूसरे जिलों में भी संगठनात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। इसलिए एटा-कासगंज की कार्रवाई को केवल बैठक में हुए विवाद तक सीमित रखना जल्दबाजी होगी। पार्टी के आधिकारिक आदेश में दोनों जिलों की इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग करने की बात कही गई है, जबकि विवाद और कार्रवाई के बीच समय का अंतर करीब एक घंटे का बताया गया है। आगे नई जिला इकाइयों में किन चेहरों को जिम्मेदारी मिलती है, इससे दोनों जिलों में सपा की अगली संगठनात्मक दिशा स्पष्ट होगी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
