सीओ जियाउल हक हत्याकांड में राजा भैया को बड़ी राहत, 13 साल बाद CBI की दोबारा जांच पूरी, कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट की मंजूर
सीओ जियाउल हक हत्याकांड में राजा भैया को बड़ी कानूनी राहत मिली है। लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने दोबारा जांच के बाद दाखिल क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। जानिए क्या है पूरा मामला, दोबारा जांच क्यों हुई और इस केस में अब तक क्या-क्या हुआ।
प्रतापगढ़ के चर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में पूर्व मंत्री और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को बड़ी कानूनी राहत मिली है। लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने मामले में दोबारा जांच के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही राजा भैया के खिलाफ इस मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की मांग भी खारिज हो गई है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने दोबारा जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाने का पर्याप्त आधार नहीं माना। इस फैसले के साथ करीब 13 साल पुराने इस मामले में राजा भैया की भूमिका को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया का यह चरण खत्म हो गया है। हालांकि, यह आदेश राजा भैया से जुड़ी दोबारा जांच और उनकी कथित भूमिका तक सीमित है। मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ हुई कानूनी कार्रवाई इससे अलग है।
पत्नी की मांग पर फिर खुली थी जांच
सीओ जियाउल हक की हत्या 2 मार्च 2013 को प्रतापगढ़ के बलीपुर गांव में हुई थी। वह एक ग्राम प्रधान की हत्या की सूचना के बाद मौके पर पहुंचे थे, जहां बाद में उनकी भी हत्या कर दी गई। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने जांच को लेकर आपत्ति जताई थी और मामले में दोबारा जांच की मांग की थी। इसी के बाद मामले में आगे की जांच का रास्ता खुला और सीबीआई ने फिर से तथ्यों की पड़ताल की।
दोबारा जांच में राजा भैया के खिलाफ नहीं मिला पर्याप्त आधार
सीबीआई की दोबारा जांच के बाद दाखिल रिपोर्ट में राजा भैया को आरोपी के तौर पर शामिल नहीं किया गया। एजेंसी के मुताबिक, उनके खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। अब विशेष सीबीआई अदालत ने इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। यानी अदालत के ताजा आदेश के बाद इस मामले में राजा भैया के खिलाफ आगे कार्रवाई की मांग पर विराम लग गया है।
इस मामले में पहले भी बदल चुका था घटनाक्रम
जियाउल हक हत्याकांड में राजा भैया का नाम सामने आने के बाद मामला काफी चर्चित हुआ था। सीबीआई ने अपनी शुरुआती जांच के बाद उन्हें क्लीन चिट देते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। लेकिन जुलाई 2014 में विशेष सीबीआई अदालत ने उस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया था। अदालत ने परवीन आजाद की आपत्ति पर मामले में आगे जांच के निर्देश दिए थे। उस समय सीबीआई की ओर से दाखिल रिपोर्ट को अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाद में राजा भैया की भूमिका की जांच से जुड़े विशेष सीबीआई अदालत के आदेश को रद्द कर दिया था।
2013 में क्या हुआ था ?
2 मार्च 2013 को कुंडा क्षेत्र के बलीपुर गांव में तत्कालीन सीओ जियाउल हक एक ग्राम प्रधान की हत्या के बाद मौके पर पहुंचे थे। इसी दौरान भीड़ ने उन्हें घेर लिया था और उनकी हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने राजा भैया समेत कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। राजा भैया ने इन आरोपों से इनकार किया था। सीबीआई ने बाद में उनकी भूमिका की जांच की और उन्हें क्लीन चिट देते हुए रिपोर्ट दाखिल की थी।
हत्याकांड में 10 आरोपियों को मिल चुकी है सजा
राजा भैया से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया से अलग, जियाउल हक हत्याकांड में अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलता रहा। अक्टूबर 2024 में लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने मामले में 10 आरोपियों को दोषी करार दिया और बाद में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। इस तरह जियाउल हक हत्याकांड की कहानी में एक तरफ अन्य दोषियों को सजा मिल चुकी है, वहीं राजा भैया की भूमिका को लेकर चली लंबी कानूनी प्रक्रिया में अब सीबीआई की दोबारा जांच के बाद दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को अदालत ने स्वीकार कर लिया है। ताजा आदेश के बाद राजा भैया के खिलाफ इस मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की मांग खारिज हो गई है। यह फैसला उनके लिए इस लंबे समय से चले आ रहे मामले में एक अहम कानूनी राहत के तौर पर सामने आया है।
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