2 घंटे का सफर 30 मिनट में! चीन का TMS-10 विमान तोड़ेगा आवाज की रफ्तार, जानें कैसे काम करेगी तकनीक
चीन का TMS-10 सुपरसोनिक विमान करीब मैक 2 की गति से उड़ने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। भविष्य में इस तकनीक से करीब 2 घंटे का हवाई सफर 30 मिनट तक कम होने की उम्मीद है। जानिए TMS-10 की तकनीक, सोनिक बूम, इंजन और सुपरसोनिक टेस्ट से जुड़ी पूरी कहानी।
अगर दिल्ली से मुंबई या किसी बड़े शहर की हवाई दूरी को सामान्य यात्री विमान के बजाय आवाज की रफ्तार से भी करीब दोगुनी गति से तय किया जाए, तो सफर का समय कितना कम हो सकता है? चीन इसी सवाल का जवाब अपनी नई सुपरसोनिक यात्री विमान तकनीक के जरिए तलाश रहा है। चीन में TMS-10 नाम के सुपरसोनिक विमान पर काम चल रहा है। इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि भविष्य में यह करीब मैक 2 की गति से उड़ सके। यानी आवाज की गति से लगभग दोगुनी। इसी तरह की तकनीक सफल होने पर लंबी दूरी की हवाई यात्रा का समय काफी कम हो सकता है। चीनी रिपोर्टों के मुताबिक, भविष्य में इस तकनीक पर आधारित विमान बीजिंग से शंघाई जैसे करीब दो घंटे के हवाई सफर को लगभग 30 मिनट तक ला सकता है। हालांकि अभी यह यात्री सेवा में उतरने वाला विमान नहीं है, बल्कि तकनीक के परीक्षण और सत्यापन के चरण में है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि चीन सिर्फ विमान को तेज बनाने पर काम नहीं कर रहा। असली चुनौती है तेज गति के साथ शोर, हवा का दबाव, गर्मी, यात्रियों का आराम और ईंधन लागत को नियंत्रित करना। TMS-10 का पूरा डिजाइन इसी समस्या को हल करने की दिशा में तैयार किया जा रहा है।
TMS-10 ने 2025 में भरी थी पहली उड़ान
TMS-10 को चीन की तिआनमुशान लेबोरेटरी ने बेहांग यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थानों के सहयोग से विकसित किया है। प्रयोगशाला के मुताबिक TMS-10 को 10 से 15 सीटों वाले सुपरसोनिक बिजनेस विमान के रूप में विकसित करने की योजना है, जिसका शुरुआती इस्तेमाल बिजनेस ट्रैवल और हाई-एंड टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इस परियोजना से जुड़े 1:18 स्केल के तकनीकी डेमोंस्ट्रेटर ने 30 जून 2025 को चीन के हेबेई प्रांत के डिंगझोउ एयरपोर्ट से पहली उड़ान भरी थी। यह उड़ान सिर्फ 2 मिनट 50 सेकंड की थी और इसका मकसद विमान को सुपरसोनिक गति तक पहुंचाना नहीं था। इसमें टेकऑफ, लैंडिंग, स्थिरता और फ्लाइट कंट्रोल जैसी शुरुआती क्षमताओं की जांच की गई थी। विमान की अधिकतम गति उस परीक्षण के दौरान 46 मीटर प्रति सेकंड रही। यानी 2025 की उड़ान को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि TMS-10 पहले ही 2400 किमी प्रति घंटे की रफ्तार हासिल कर चुका है। असली परीक्षा अब सुपरसोनिक टेस्ट में होगी।
अब होगी आवाज की दीवार पार करने की तैयारी
2026 में इस परियोजना का अगला बड़ा चरण सुपरसोनिक उड़ान परीक्षण है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक डेमोंस्ट्रेटर अंतिम असेंबली के चरण में पहुंच चुका है और साल के अंत तक सुपरसोनिक परीक्षण की योजना है। इस उड़ान में सबसे अहम लक्ष्य लगातार सुपरसोनिक गति पर विमान के व्यवहार और उसके सोनिक बूम को मापना होगा। यह परीक्षण सिर्फ स्पीड की जांच नहीं होगा। इसमें विमान की एयरोडायनामिक्स, फ्लाइट कंट्रोल और इंजन के साथ विमान के डिजाइन के तालमेल को भी परखा जाएगा।
2400 किमी प्रति घंटे की रफ्तार कैसे संभव होगी?
TMS-10 का डिजाइन करीब मैक 2 की सुपरसोनिक क्रूज गति के लिए तैयार किया गया है। सामान्य यात्री विमान आमतौर पर आवाज की गति से काफी कम गति पर उड़ते हैं, जबकि मैक 2 का मतलब उस गति से लगभग दोगुना है। इस रफ्तार पर विमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती हवा का प्रतिरोध बन जाता है। जैसे-जैसे गति बढ़ती है, विमान के आसपास हवा का व्यवहार पूरी तरह बदल जाता है। इसलिए TMS-10 के डिजाइन में कम ड्रैग यानी कम वायुगतिकीय प्रतिरोध और कम सोनिक बूम पर खास ध्यान दिया गया है। चीन की टीम ने इसके लिए तीन सतहों वाला एयरोडायनामिक डिजाइन और T-टेल कॉन्फिगरेशन इस्तेमाल किया है। आगे की तरफ कैनार्ड और पीछे T-टेल जैसी व्यवस्था का उद्देश्य शॉक वेव को नियंत्रित करना और जमीन तक पहुंचने वाले सोनिक बूम को कम करना है।
सोनिक बूम ही सुपरसोनिक विमान की सबसे बड़ी परेशानी क्यों है?
सुपरसोनिक विमान जब आवाज की गति से आगे निकलता है तो उसके आसपास बनने वाली शॉक वेव जमीन तक पहुंचकर तेज धमाके जैसी आवाज पैदा कर सकती है। इसे सोनिक बूम कहा जाता है। यही समस्या अतीत में सुपरसोनिक यात्री विमानों के लिए बड़ी चुनौती रही थी। अब चीन की कोशिश विमान को तेज बनाने के साथ इस आवाज को भी कम करने की है। TMS-10 को इसी लो-बूम तकनीक के आधार पर विकसित किया जा रहा है। तिआनमुशान लेबोरेटरी के अनुसार इसके डिजाइन में एयरोडायनामिक दक्षता और सोनिक बूम को एक साथ बेहतर करने के लिए कंप्यूटेशनल डिजाइन और मल्टीडिसिप्लिनरी ऑप्टिमाइजेशन का इस्तेमाल किया गया है।
सिर्फ तेज उड़ना काफी नहीं, यात्रियों को भी सुरक्षित रखना होगा
यहां से इस परियोजना की असली मुश्किल शुरू होती है। लड़ाकू विमान को तेज गति से उड़ाना और यात्री विमान को उसी गति पर लंबे समय तक उड़ाना दो अलग चुनौतियां हैं। यात्री विमान के मामले में यात्रियों का आराम, सुरक्षा, विमान के ढांचे की मजबूती, लगातार तेज गति से पैदा होने वाली गर्मी, ईंधन की खपत और रखरखाव की लागत जैसे सवालों का जवाब भी देना होगा। यही वजह है कि TMS-10 अभी सीधे कमर्शियल एयरलाइन के रूप में इस्तेमाल होने की स्थिति में नहीं है। मौजूदा चरण मुख्य रूप से तकनीक के सत्यापन का है और यात्री विमान तक पहुंचने के लिए अभी कई चरण बाकी हैं।
इंजन भी होगा सबसे बड़ी चुनौती
सुपरसोनिक यात्री विमान के लिए सिर्फ शानदार एयरोडायनामिक डिजाइन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ऐसा इंजन भी चाहिए जो अलग-अलग गति पर प्रभावी तरीके से काम कर सके। परियोजना से जुड़ी जानकारी के मुताबिक भविष्य के ऐसे विमानों के लिए वैरिएबल-साइकिल प्रोपल्शन सिस्टम की जरूरत हो सकती है। इसका मकसद यह होगा कि विमान सामान्य गति पर उड़ते समय भी प्रभावी रहे और सुपरसोनिक गति पर भी पर्याप्त प्रदर्शन दे सके। TMS-10 के मौजूदा चरण से आगे बढ़ने के लिए बड़े आकार के डेमोंस्ट्रेटर, अतिरिक्त उड़ान परीक्षण और विमान के महत्वपूर्ण ढांचे की जांच जैसे कई चरण अभी बाकी हैं।
अभी सपना है 30 मिनट का सफर, लेकिन काम शुरू हो चुका है
TMS-10 की कहानी को फिलहाल 2400 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाले तैयार यात्री विमान के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी। अभी इसका मुख्य उद्देश्य उस तकनीक को साबित करना है, जिसके जरिए भविष्य में सुपरसोनिक यात्री विमान विकसित किए जा सकें। अगर चीन इन परीक्षणों में कम ड्रैग, कम सोनिक बूम, सुरक्षित सुपरसोनिक उड़ान और भरोसेमंद इंजन जैसी चुनौतियों को पार कर लेता है, तो हवाई यात्रा का पूरा अनुभव बदल सकता है। तब दो घंटे की यात्रा को करीब 30 मिनट तक लाने की कल्पना सिर्फ तकनीकी सपना नहीं रह जाएगी। फिलहाल TMS-10 की अगली बड़ी परीक्षा आसमान में होगी। अगर यह परीक्षण सफल रहा, तो चीन के लिए यह सिर्फ एक नए विमान की उड़ान नहीं होगी, बल्कि अगली पीढ़ी के सुपरसोनिक यात्री विमानों की दिशा में एक बड़ा तकनीकी कदम माना जाएगा।
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