केरल में लंबे बाल रखने पर छात्रों को नहीं मिलेगी सजा, बाल अधिकार आयोग ने स्कूलों को दिए निर्देश
केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि लंबे बाल रखने वाले बच्चों के साथ भेदभाव या दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। जानिए आयोग ने बच्चों के बाल, कपड़े, स्कूल अनुशासन और नई गाइडलाइन को लेकर क्या निर्देश दिए हैं।
स्कूल में लड़के के लंबे बाल हैं तो क्या उसे बाल कटवाने के लिए मजबूर किया जा सकता है? केरल में अब ऐसे मामलों को लेकर बाल अधिकार आयोग ने स्कूलों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कहा है कि बच्चों के बालों की लंबाई के आधार पर उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता और केवल लंबे बाल रखने के कारण किसी बच्चे को सजा भी नहीं दी जा सकती। आयोग ने 17 सितंबर को जारी अपने आदेश में कहा कि लड़के और जेंडर-न्यूट्रल पहचान रखने वाले बच्चे अपनी पसंद के अनुसार बाल बढ़ाने के लिए स्वतंत्र हैं। स्कूल प्रबंधन केवल बालों की लंबाई को आधार बनाकर उन्हें परेशान नहीं कर सकता। बच्चों की पसंद के कपड़ों को लेकर भी आयोग ने इसी तरह के अधिकारों पर जोर दिया है।
लंबे बालों पर सजा देने से रोक
बाल अधिकार आयोग ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि लंबे बाल रखने वाले लड़कों या ट्रांसजेंडर पहचान नहीं रखने वाले बच्चों को मानसिक रूप से परेशान न किया जाए। ऐसे बच्चों को क्लास से बाहर निकालने, उनके साथ भेदभाव करने या किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने से भी स्कूलों को रोका गया है। आयोग का कहना है कि बच्चों की बाहरी शक्ल-सूरत के बजाय स्कूलों को उनकी शिक्षा और व्यक्तित्व विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए। यानी किसी बच्चे के बाल कितने लंबे हैं, इसे उसकी पढ़ाई या स्कूल में उसके व्यवहार का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
स्कूलों के लिए नई गाइडलाइन बनाने का निर्देश
आयोग ने पाया कि इस मुद्दे पर राज्य शिक्षा विभाग या CBSE की ओर से कोई स्पष्ट और विशेष गाइडलाइन मौजूद नहीं है। ऐसे में आयोग ने उचित दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा है, ताकि स्कूलों में लंबे बाल रखने वाले बच्चों के साथ होने वाले विवादों को स्पष्ट नियमों के जरिए सुलझाया जा सके। आयोग ने यह भी कहा है कि नई गाइडलाइन तैयार करने से पहले संबंधित बच्चों की राय और अनुभव को भी सुना जाना चाहिए। आयोग ने अपने निर्देशों पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट 45 दिन के भीतर जमा करने को कहा है।
मामला दो अलग-अलग याचिकाओं से जुड़ा
आयोग का यह आदेश दो याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया। पहली याचिका कोझिकोड के रामनाट्टुकरा की रहने वाली इंदु मेनन ने दाखिल की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जेंडर-न्यूट्रल होने का दावा करने वाले कुछ स्कूलों में भी लड़कों और ट्रांसजेंडर पहचान नहीं रखने वाले बच्चों के साथ उनके लंबे बालों को लेकर भेदभाव किया जाता है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि लंबे बाल रखने वाले लड़कों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है, मानो उन्होंने कोई अनुशासनहीनता या अपराध किया हो। दूसरी याचिका कोट्टक्कल के एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल की ओर से दाखिल की गई थी। प्रिंसिपल ने बताया कि 11वीं कक्षा का एक छात्र बार-बार कहने के बावजूद अपने बाल कटवाने के लिए तैयार नहीं था। इसके बाद स्कूल ने ऐसे मामलों में बच्चों के साथ किस तरह कार्रवाई की जाए, इस पर स्पष्ट गाइडलाइन की मांग की थी।
बालों से ज्यादा पढ़ाई और व्यक्तित्व पर जोर
दोनों मामलों को सुनने के बाद आयोग ने स्कूलों को बच्चों की व्यक्तिगत पसंद और अधिकारों को ध्यान में रखने का निर्देश दिया। आयोग का जोर इस बात पर है कि स्कूल में बच्चे की पहचान केवल उसकी बाहरी शक्ल-सूरत से तय नहीं होनी चाहिए। इस आदेश के बाद केरल में स्कूलों के लिए लंबे बाल रखने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर स्थिति पहले की तुलना में ज्यादा स्पष्ट हो गई है। अब केवल बालों की लंबाई को आधार बनाकर किसी बच्चे को क्लास से बाहर करना, मानसिक रूप से परेशान करना या दंड देना बाल अधिकार आयोग के निर्देशों के खिलाफ माना जाएगा।
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