नाती-पोतों को स्कूल भेजते थे, अब खुद बने परीक्षार्थी, अमेठी में 289 बुजुर्गों ने दी साक्षरता परीक्षा
अमेठी के संग्रामपुर में नवभारत साक्षरता अभियान के तहत 289 लोगों ने परीक्षा दी। 55 से 65 वर्ष तक के बुजुर्ग भी छुट्टी के दिन स्कूल पहुंचे और पढ़ना-लिखना सीखने का उत्साह दिखाया। कई बुजुर्ग अपने नाती-पोतों और परिवार से प्रेरित होकर साक्षर बनने की राह पर आगे बढ़े।
अमेठी। उम्र भले ही 55 से 65 साल के बीच हो, लेकिन पढ़ने-लिखने की चाहत अब भी उतनी ही मजबूत है। अमेठी के संग्रामपुर क्षेत्र में रविवार को इसका उदाहरण देखने को मिला, जब बड़ी संख्या में बुजुर्ग छुट्टी के दिन स्कूल पहुंचे और साक्षर बनने के लिए परीक्षा दी। किसी को अपने नाती-पोतों को स्कूल छोड़ते समय पढ़ाई की प्रेरणा मिली, तो किसी को घर में पढ़ी-लिखी बहुओं ने अक्षर ज्ञान हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया। नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत आयोजित इस परीक्षा में संग्रामपुर विकासखंड के अलग-अलग प्राथमिक विद्यालयों में कुल 289 परीक्षार्थी शामिल हुए। इनमें बड़ी संख्या 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की रही। परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे बुजुर्गों में पढ़ने और लिखने की सीखने की ललक साफ नजर आई। उम्र के इस पड़ाव पर भी उन्होंने पूरे उत्साह के साथ परीक्षा दी।
नाती-पोतों को स्कूल छोड़ते-छोड़ते खुद पढ़ने की ठानी
इन परीक्षार्थियों की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। कई बुजुर्ग अपने नाती-पोतों को स्कूल छोड़ने जाते थे। रोज बच्चों को किताब-कॉपी लेकर पढ़ने जाते देख उनके मन में भी पढ़ने की इच्छा जागी। वहीं कुछ लोगों को परिवार में पढ़ी-लिखी बहुओं से प्रेरणा मिली और उन्होंने खुद साक्षर बनने का फैसला किया। अब इन बुजुर्गों की इच्छा सिर्फ अपना नाम लिखने या अक्षर पहचानने तक सीमित नहीं है। कई परीक्षार्थियों का कहना है कि वे पढ़ना-लिखना सीखकर अपने बच्चों और नाती-पोतों की पढ़ाई में भी मदद करना चाहते हैं।
छुट्टी के दिन भी परीक्षा देने पहुंचे बुजुर्ग
रविवार को आयोजित परीक्षा के लिए क्षेत्र के कई प्राथमिक विद्यालयों को केंद्र बनाया गया था। प्राथमिक विद्यालय सरैया कनू, सरैया बड़गांव, मिश्रौली बड़गांव, मनिकापुर, भवसिंहपुर, भैरोपुर, जोगा अम्मरपुर, बेलखरी, भावलपुर, चंडेरिया, धोएं, मुहीब साह, शुकुलपुर, ठेंगहा, धौरहरा, जरौटा, कंसापुर, कसारा, उत्तरगांव और गंगापुर समेत विभिन्न विद्यालयों में परीक्षा आयोजित हुई। परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे परीक्षार्थियों में उम्र का फासला जरूर था, लेकिन लक्ष्य एक ही था। अक्षर ज्ञान हासिल करना और खुद को साक्षर बनाना।
15 साल से अधिक उम्र के निरक्षरों को साक्षर बनाने का अभियान
नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के निरक्षर लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत संग्रामपुर विकासखंड में भी लोगों को साक्षर बनाने के बाद उनकी परीक्षा कराई गई। परीक्षा में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की भागीदारी खास तौर पर चर्चा में रही। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका परीक्षा केंद्र तक पहुंचना और पूरे मनोयोग से परीक्षा देना अभियान के उद्देश्य को एक अलग तस्वीर देता है।
बुजुर्गों में दिखा खास उत्साह
परीक्षा के नोडल अधिकारी और संग्रामपुर के खंड शिक्षा अधिकारी शशांक मिश्रा ने बताया कि नवभारत साक्षरता परीक्षा में 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के परीक्षार्थी शामिल हुए। इनमें बड़ी संख्या 60 वर्ष से अधिक उम्र के परीक्षार्थियों की रही। उन्होंने बताया कि परीक्षा को लेकर बुजुर्गों में खासा उत्साह देखने को मिला। सभी परीक्षार्थियों ने गंभीरता के साथ परीक्षा में हिस्सा लिया।
शिक्षकों ने संभाली परीक्षा की जिम्मेदारी
परीक्षा को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने में बीआरसी कार्यालय संग्रामपुर के अभिनव सिंह, डॉ. नागेंद्र सिंह समेत क्षेत्र के शिक्षकों का योगदान रहा। अलग-अलग विद्यालयों में परीक्षा के दौरान शिक्षकों ने व्यवस्थाएं संभालीं और परीक्षार्थियों को परीक्षा में शामिल कराया। संग्रामपुर में आयोजित यह परीक्षा उन लोगों के लिए भी एक संदेश छोड़ गई कि सीखने की कोई तय उम्र नहीं होती। जिस उम्र में आमतौर पर लोग पढ़ाई से दूर हो जाते हैं, उसी उम्र में 289 लोगों ने परीक्षा केंद्र पहुंचकर यह साबित किया कि पढ़ने की इच्छा हो तो उम्र कभी रास्ते की बाधा नहीं बनती।
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