राम मंदिर से गायब हुई 1250 सोने-चांदी की शिलाएं , हिंदुवादी नेता संतोष दुबे ने किया दावा, बोले-2002 के बाद नहीं मिला शिलाओं का रिकॉर्ड
राम मंदिर आंदोलन के दौरान देश-विदेश से आईं सोने, चांदी, हीरे और अष्टधातु की 1250 पूजित शिलाओं को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने दावा किया है कि ये शिलाएं 2002 के बाद रहस्यमय तरीके से गायब हो गईं। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी तत्कालीन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। आखिर इन शिलाओं का क्या हुआ और ट्रस्ट पर कौन-कौन से सवाल उठाए गए हैं...
अयोध्या में श्रीराम मंदिर को लेकर एक बार फिर नया विवाद सामने आया है। धर्मसेना के संस्थापक और श्रीराम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे संतोष दुबे ने दावा किया है कि वर्ष 1989 में देश-विदेश से पूजित होकर आईं सोने, चांदी, हीरे, माणिक्य और अष्टधातु की करीब 1250 शिलाएं वर्ष 2002 के बाद रहस्यमय तरीके से गायब हो गईं। उनका आरोप है कि इन बहुमूल्य शिलाओं का आज तक कोई हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया।
'सवा रुपया दे दे रे भैया...' अभियान से जुटी थीं शिलाएं
संतोष दुबे के अनुसार, वर्ष 1989 में विश्व हिंदू परिषद ने श्रीराम मंदिर आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए देशव्यापी अभियान चलाया था। इस दौरान लोगों से 'सवा रुपया दे दे रे भैया, रामशिला के नाम का' नारे के साथ आर्थिक सहयोग और पूजित शिलाएं देने की अपील की गई थी। उनका कहना है कि देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी सोने, चांदी और अन्य बहुमूल्य धातुओं से बनी शिलाएं अयोध्या भेजी गई थीं। उनका दावा है कि इन शिलाओं का रिकॉर्ड तैयार करने की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई थी।
मॉरीशस से आई सबसे कीमती शिला
संतोष दुबे का दावा है कि कुल 1250 धातु की शिलाओं में सबसे महंगी शिला मॉरीशस से भेजी गई थी, जबकि मुंबई के एक व्यापारी ने हीरों से जड़ी शिला भेंट की थी। उनके मुताबिक, सबसे अधिक संख्या चांदी की शिलाओं की थी, जबकि सोने और अष्टधातु की शिलाएं भी बड़ी संख्या में मौजूद थीं। संतोष दुबे के मुताबिक, इन शिलाओं को कारसेवकपुरम में तीन तालों वाली सुरक्षित जगह पर रखा गया था। उनका दावा है कि वर्ष 2002 तक ये शिलाएं वहां मौजूद थीं, लेकिन इसके बाद उनका कोई रिकॉर्ड सामने नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय व्यवस्था संभालने वाले लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
दानपेटी के चढ़ावे पर भी उठाए सवाल
संतोष दुबे ने यह भी दावा किया कि कारसेवकपुरम में श्रीराम मंदिर मॉडल के सामने रखी गई दानपेटी में हर महीने लाखों रुपये जमा होते थे। उनके मुताबिक, 50 रुपये से अधिक के दान की रसीद दी जाती थी, लेकिन इससे कम राशि का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय भी दान में मिली कुल राशि सार्वजनिक नहीं की गई। संतोष दुबे का कहना है कि 5 फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के समय पुराने न्यास की संपत्तियों का उल्लेख किया गया, लेकिन कथित तौर पर इन बहुमूल्य शिलाओं का कोई जिक्र नहीं हुआ। उन्होंने इस पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग की है।
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