'हिंदू बच्चे हनुमान चालीसा भी नहीं जानते' अलीगढ़ में बोले रामभद्राचार्य, 6 महीने 23 दिन के एकांतवास का भी किया ऐलान

अलीगढ़ की श्रीराम कथा में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने हिंदू संस्कृति, संस्कृत शिक्षा और नई पीढ़ी को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि आज हिंदू बच्चे अपनी धार्मिक परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं। साथ ही 6 महीने 23 दिन के एकांतवास, 32 लाख रुपए के योगदान और संस्कृत आधारित शिक्षा को लेकर भी बड़ा ऐलान किया।

Jun 18, 2026 - 11:56
Jun 18, 2026 - 11:58
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'हिंदू बच्चे हनुमान चालीसा भी नहीं जानते' अलीगढ़ में बोले रामभद्राचार्य, 6 महीने 23 दिन के एकांतवास का भी किया ऐलान

अलीगढ़ के अकबराबाद क्षेत्र स्थित गांव लधौआ में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन मंच से सिर्फ धार्मिक प्रसंग ही नहीं सुनाए गए, बल्कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा और नई पीढ़ी के भविष्य को लेकर भी गंभीर संदेश दिया गया। जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य स्वामी महाराज ने भगवान श्रीराम के नामकरण और बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि यदि भारतीय संस्कृति को बचाना है तो संस्कृत को घर-घर तक पहुंचाना होगा। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि दूसरे धर्मों के बच्चे अपने धार्मिक ग्रंथों से परिचित हैं, लेकिन बड़ी संख्या में हिंदू बच्चों को हनुमान चालीसा तक याद नहीं है। यह चिंता का विषय है और इसे बदलने की जिम्मेदारी समाज की है।

'संस्कृत से होगी संस्कृति की रक्षा'
रामभद्राचार्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति का वास्तविक संरक्षण तभी संभव है, जब देशभर में संस्कृत आधारित गोकुल स्कूल स्थापित किए जाएं। उन्होंने केवल बच्चों ही नहीं, बल्कि किशोरियों, बुजुर्गों और महिलाओं तक को संस्कृत सीखने और सिखाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति की पहचान भी होती है।

6 महीने 23 दिन के एकांतवास का किया ऐलान 
कथा के दौरान जगद्गुरु ने एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि वे अब 6 महीने 23 दिन के एकांतवास पर जा रहे हैं। उनके अनुसार इस साधना का उद्देश्य हिंदू संस्कृति के व्यापक जनजागरण का संकल्प लेना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बालक तक वैदिक भारतीय संस्कृति का ज्ञान पहुंचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसे उन्होंने राष्ट्र के लिए एक महायज्ञ बताते हुए सभी से इसमें अपनी सहभागिता निभाने की अपील की।

आधुनिक शिक्षा के साथ वेद-वेदांत भी पढ़ेंगे विद्यार्थी
जगद्गुरु ने बताया कि जिस शिक्षण संस्थान की परिकल्पना की गई है, उसमें केवल संस्कृत या धार्मिक शिक्षा ही नहीं दी जाएगी। विद्यार्थियों को वेद, वेदांत, ज्योतिष के साथ-साथ अंग्रेजी और कंप्यूटर जैसी आधुनिक शिक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर तक पहुंचा सकें। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित भवन बनकर तैयार हो चुका है और उसके लिए वे अपनी ओर से 32 लाख रुपए की दक्षिणा दे चुके हैं। अब इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अलीगढ़वासियों से भी खुले मन से सहयोग करने की अपील की। दान संग्रह की जिम्मेदारी पंकज मिश्रा को सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि जो भी श्रद्धालु इस अभियान में सहयोग करना चाहते हैं, वे अपना नाम दर्ज कराकर योगदान दे सकते हैं।

रिपोर्ट-: जैनुल खान 

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