ईरान में फंसे अमेठी के 7 छात्र, परिवारों ने पीएम मोदी से लगाई सुरक्षित वापसी की गुहार
ईरान में पढ़ रहे अमेठी के सात छात्रों का बढ़ते तनाव के बीच अपने परिवारों से संपर्क टूट गया है। परिवारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुरक्षित वापसी की अपील की है।
अंतरराष्ट्रीय हालात तनावपूर्ण होने के बीच उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के सात छात्र ईरान में फंसे हुए हैं। युद्ध जैसी स्थिति की आशंका के कारण इन छात्रों के परिवारों में डर और चिंता का माहौल है। बताया जा रहा है कि मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के भनौली गांव के इन छात्रों से शनिवार के बाद से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। फोन और अन्य माध्यमों से बात न हो पाने के कारण परिजन बेहद परेशान हैं। गांव में लगातार लोगों का आना-जाना लगा है और सभी बच्चे सुरक्षित लौट आएं, इसके लिए दुआएं की जा रही हैं।
रिसर्च और पीएचडी के लिए गए थे ईरान
परिजनों के अनुसार, मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के भनौली गांव के अब्बास अपनी पत्नी शाबिका के साथ ईरान में रहकर रिसर्च कर रहे हैं। इनके अलावा जवाद हुसैन, इमाम अली, तहरीर फातिमा और सदफ फातिमा सहित अन्य छात्र भी उच्च शिक्षा के लिए ईरान गए हैं। सभी छात्र पीएचडी और अन्य उच्च शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं। शनिवार तक परिवारों की उनसे बातचीत हो रही थी, लेकिन उसके बाद से किसी भी छात्र से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इससे गांव में बेचैनी बढ़ गई है।
परिजनों की बढ़ी चिंता, संपर्क पूरी तरह टूटा
इशरत हुसैन ने बताया कि उनका भतीजा और उसकी पत्नी ईरान में पढ़ाई कर रहे हैं। लड़ाई शुरू होने के बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका है। वहीं वारिश अली ने कहा कि उनकी बेटी ईरान से पीएचडी कर रही है। उन्होंने बताया कि शनिवार दोपहर आखिरी बार बात हुई थी, जिसमें बेटी ने बताया था कि हमला हो गया है। इसके बाद से कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। गांव में परिजन बच्चों की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों में अमेरिका और इजराइल की कार्रवाइयों को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है।
पीएम मोदी से की सुरक्षित वापसी की अपील
परिजनों ने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि ईरान में फंसे छात्रों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाने की व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में बच्चों की सुरक्षा सबसे जरूरी है और सरकार को जल्द कदम उठाना चाहिए।
(रिपोर्टः बृजेश मिश्रा अमेठी)
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