"पत्थरबाजी करने वाले युवाओं को सिर्फ अपराधी मत समझिए" CJP के प्रोटेस्ट में हुई हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, सरकार और पुलिस दोनों को दी सलाह

संसद मार्च हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गुमराह युवाओं को सिर्फ सख्ती से नहीं, बल्कि संवाद और काउंसलिंग से संभालने की जरूरत है। कोर्ट ने पुलिस को संयम बरतने और सरकार को आक्रामक रवैये से बचने की सलाह दी। आखिर कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा और इस मामले में आगे क्या होगा? 

Aug 5, 2026 - 13:26
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"पत्थरबाजी करने वाले युवाओं को सिर्फ अपराधी मत समझिए" CJP के प्रोटेस्ट में हुई हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, सरकार और पुलिस दोनों को दी सलाह

नई दिल्ली। संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान ऐसी टिप्पणी की, जिसने कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक विरोध के बीच संतुलन पर नई बहस छेड़ दी। अदालत ने साफ कहा कि यदि कुछ गुमराह युवा पत्थरबाजी भी करते हैं, तब भी सबसे प्रभावी तरीका उनकी बात सुनना, उन्हें समझाना और संवाद के जरिए स्थिति को संभालना है। अदालत ने यह भी कहा कि एक मजबूत सरकार को ऐसे मामलों में आक्रामक रवैया अपनाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे सामाजिक तनाव और बढ़ सकता है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट संसद चलो मार्च के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के आयोजकों ने हिंसा भड़काई और अब तक उनकी जवाबदेही तय नहीं की गई।

अदालत ने किस याचिका पर सुनवाई की?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका ने 20 जुलाई को संसद चलो मार्च का आह्वान किया था। इसी मार्च के दौरान हिंसा हुई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस याचिका को इसी मुद्दे से जुड़ी दूसरी याचिका के साथ जोड़ दिया, जिसे सेवानिवृत्त एयरफोर्स अधिकारी मनीष कुमार सोलंकी ने दाखिल किया है।

कोर्ट ने युवाओं को लेकर क्या कहा?
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि हर प्रदर्शन में शामिल व्यक्ति को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से देखना उचित नहीं होगा। यदि कुछ युवा गुमराह होकर पत्थरबाजी करते हैं, तो उन्हें केवल दंडित करने के बजाय यह समझना भी जरूरी है कि वे विरोध क्यों कर रहे हैं। अदालत के मुताबिक ऐसे मामलों में सबसे प्रभावी तरीका संवाद, सलाह और काउंसलिंग है। युवाओं की बात सुनना ही तनाव कम करने का सबसे मजबूत माध्यम बन सकता है।

सरकार और पुलिस को भी दी अहम सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ताकतवर सरकार को आक्रामक रवैया अपनाने से बचना चाहिए। अदालत का मानना है कि अत्यधिक सख्ती कई बार हालात को शांत करने के बजाय और अधिक तनावपूर्ण बना सकती है। पीठ ने पुलिस और अन्य कानून लागू करने वाली एजेंसियों को भी प्रदर्शन के दौरान संयम बरतने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि यदि किसी प्रदर्शन में अप्रिय स्थिति बनती है, तब भी पुलिस का व्यवहार संतुलित होना चाहिए ताकि हालात नियंत्रण से बाहर न जाएं और हिंसा न बढ़े। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मौके की परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई कैसे करनी है, इसका निर्णय कानून लागू करने वाली एजेंसियां ही लेंगी क्योंकि वही स्थिति का बेहतर आकलन कर सकती हैं।

याचिकाकर्ता ने क्या दलील दी?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता रिजवान अहमद ने अदालत को बताया कि घटना को 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन आयोजकों की जवाबदेही अब तक तय नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोजक अब भी सार्वजनिक मंचों पर भड़काऊ बयान दे रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि यदि ऐसे मामलों में सरकार पीछे हटती है तो यह भविष्य के लिए गलत संदेश होगा और दूसरे राज्यों में भी हिंसक प्रदर्शन को बढ़ावा मिल सकता है। वकील ने यह भी कहा कि पत्थरबाजी करने वालों को केवल इस आधार पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए कि प्रशासन की ओर से भी कहीं कोई चूक हुई हो। उन्होंने संसद को लोकतंत्र का मंदिर बताते हुए कहा कि यदि प्रदर्शनकारी संसद परिसर तक पहुंच जाते और कोई बड़ी घटना हो जाती तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते थे।

याचिका में और क्या मांग की गई?
याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि पुलिस और सुरक्षा बलों के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही ऐसे लोगों को सामुदायिक सेवा (कम्युनिटी सर्विस) करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content