कबाड़ बीनने वाले बच्चों के हाथों में थमी कलम, निःशुल्क स्कूल से पढ़कर 25 बच्चों ने सरकारी विद्यालय में लिया प्रवेश
अयोध्या की मलिन बस्ती में कबाड़ बीनने वाले 25 बच्चों की जिंदगी शिक्षा ने बदल दी। निःशुल्क हम सबका स्कूल से पढ़ाई करने के बाद सभी बच्चों का सरकारी प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश कराया गया। पढ़िए कैसे खुले आसमान के नीचे शुरू हुई पहल ने बदली कई परिवारों की तस्वीर।
अयोध्या। कभी हाथों में कबाड़ की बोरी लेकर गलियों में घूमने वाले बच्चों के हाथों में अब किताब और कलम है। अयोध्या के हांसापुर स्थित मलिन बस्ती में संचालित निःशुल्क हम सबका स्कूल से शिक्षा प्राप्त करने वाले 25 बच्चों का सरकारी प्राथमिक विद्यालय हांसापुर में प्रवेश कराया गया। अब ये बच्चे नियमित रूप से विद्यालय में पढ़ाई कर अपने भविष्य की नई शुरुआत करेंगे। सरकारी विद्यालय पहुंचने पर सभी बच्चों का स्वागत किया गया। उन्हें कॉपी और पेंसिल वितरित की गई, ताकि उनकी पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
खुले आसमान के नीचे शुरू हुई थी शिक्षा की पहल
निःशुल्क हम सबका स्कूल की शुरुआत वर्ष 2023 में हांसापुर की मलिन बस्ती में की गई थी। इस पहल की शुरुआत ऋषभ शर्मा उर्फ शिवा ने उन बच्चों के लिए की, जो आर्थिक तंगी के कारण स्कूल नहीं जा पाते थे और कबाड़ बीनकर परिवार का सहारा बनते थे। विद्यालय खुले आसमान के नीचे पेड़ की छांव में संचालित किया जाता है। यहां करीब 35 बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है। इनमें से 25 बच्चे अब सरकारी विद्यालय में प्रवेश लेकर औपचारिक शिक्षा से जुड़ गए हैं।
शिक्षा से बदल रही बच्चों की जिंदगी
स्कूल संचालकों का कहना है कि उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें बाल श्रम और कबाड़ बीनने जैसी परिस्थितियों से बाहर निकालकर मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है। सरकारी विद्यालय में प्रवेश मिलने के बाद अब इन बच्चों के लिए आगे की पढ़ाई का रास्ता खुल गया है। इस अवसर पर मां शेरावाली न्याय धाम चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष श्रीमती सीता शर्मा ने प्राथमिक विद्यालय हांसापुर की प्रधानाध्यापिका नीता मैडम का सम्मान किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके सहयोग के लिए उन्हें अंगवस्त्र भेंट किया गया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए गूलर और आम का पौधा भी भेंट कर आभार व्यक्त किया गया।
समाज के लिए बनी मिसाल
हांसापुर की मलिन बस्ती में शुरू हुई यह छोटी पहल अब कई बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आई है। कबाड़ बीनने वाले बच्चों का सरकारी विद्यालय तक पहुंचना इस बात का उदाहरण है कि यदि सही समय पर शिक्षा का अवसर मिले तो परिस्थितियां किसी भी बच्चे के भविष्य को रोक नहीं सकतीं।
रिपोर्ट- अनूप कुमार
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