'अखिलेश-राहुल 50 साल के बूढ़े, इन्हें अंकल कहूंगा' 2 साल बाद चुनावी रैली में दिखे आकाश आनंद, हाथरस में घोषित किया प्रत्याशी
हाथरस की रैली में आकाश आनंद ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी को अंकल कहकर निशाना साधा। भाजपा पर महंगाई, एक्सप्रेस-वे और सरकारी नौकरियों को लेकर हमला बोला। करीब 2 साल बाद चुनावी रैली में पहुंचे आकाश ने सादाबाद सीट से बसपा प्रत्याशी का ऐलान भी किया।
हाथरस। बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद करीब दो साल बाद चुनावी रैली के मंच पर नजर आए। सोमवार को हाथरस की सादाबाद विधानसभा सीट पर आयोजित रैली में उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। आकाश ने दोनों नेताओं को अंकल कहकर संबोधित किया। आकाश आनंद ने कहा कि मैं 30 साल का हूं और अखिलेश जी 50 के। मैं 50 साल के वृद्ध को अंकल नहीं तो और क्या कहूंगा। हालांकि अखिलेश यादव की उम्र 53 वर्ष और राहुल गांधी की उम्र 56 वर्ष है। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आकाश ने कहा कि राहुल अंकल एक किताब लेकर घूमते हैं। संविधान की बात करते हैं। अगर किताब पलट दी जाए तो पता चलेगा कि उसके पन्ने खाली हैं। वे संसद में संविधान की बात करते हैं, लेकिन जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहां वही काम कर रहे हैं, जो भाजपा यूपी में कर रही है।
भाजपा पर एथेनॉल, एक्सप्रेस-वे और नौकरियों को लेकर हमला
आकाश आनंद ने भाजपा सरकार पर महंगाई और विकास कार्यों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एथेनॉल पेट्रोल के नाम पर 110 रुपए में गन्ने का रस बेच रहे हैं। देश में बेकार एक्सप्रेस-वे बनाए जा रहे हैं। उन्होंने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सांसद के भाई ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे बनवाया, क्या उसमें इन्हें भ्रष्टाचार की बू नहीं आ रही। वहीं यमुना एक्सप्रेस-वे को लेकर उन्होंने कहा कि उस पर एक भी गड्ढा नहीं है। यह मायावतीजी के शासन में बना था।
भाजपा पर 7 हजार करोड़ रुपए प्रचार में खर्च करने का आरोप
आकाश आनंद ने कहा कि यूपी में 2017 से भाजपा की सरकार है। इतने सालों में इन्होंने सिर्फ अपनी कमियां छिपाने का काम किया। आपके 7 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा टैक्स के पैसों से भाजपा ने सिर्फ अपना प्रचार किया। इन पैसों से भाजपा ने अपनी कमियां छिपाईं। उन्होंने कहा कि भाजपा की आदत दूसरों के काम पर अपना झंडा लगाने की है। काम किसी और का, फीता ये लोग काटते हैं। ये हाल तब है, जब डबल इंजन की सरकार है। आकाश ने सरकारी नौकरियों और पेपर लीक का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि 4 लाख से ज्यादा सरकारी पद खाली पड़े हैं। पेपर लीक हो रहे हैं। अगर यह पैसा व्यवस्था सुधारने पर खर्च होता तो आज बच्चे सरकारी नौकरी पा रहे होते।
2014 के सिलेंडर से आज की महंगाई की तुलना
आकाश आनंद ने महंगाई के मुद्दे पर भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि झांसी के अस्पताल में नवजात बच्चों की मौत हो गई। उनके लिए इनके पास अफसोस करने के अलावा और कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि 2014 में गैस सिलेंडर 400 रुपए का हुआ करता था। उस समय इनके सभी नेता सड़क पर उतरकर गैस सिलेंडर सिर पर रखकर छाती पीटते हुए कहते थे- अरे, महंगाई। आज सिलेंडर 1,200 रुपए का है।
दो साल से ज्यादा समय बाद चुनावी रैली में पहुंचे आकाश
आकाश आनंद ने पिछले साल 10 अक्टूबर को आखिरी बार लखनऊ में सभा की थी। हालांकि चुनावी रैली की बात करें तो करीब 2 साल 4 महीने बाद वह किसी चुनावी सभा में पहुंचे हैं। अप्रैल 2024 में सीतापुर में आकाश ने पार्टी लाइन से हटकर भाजपा पर हमला बोला था। उन्होंने भाजपा सरकार को बुलडोजर सरकार नहीं, बल्कि आतंकवादी सरकार बताया था। इस बयान के बाद आकाश के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद मायावती ने उन्हें उत्तराधिकारी पद के साथ नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से भी हटा दिया था। हालांकि बाद में मायावती ने अपना फैसला वापस ले लिया था।
हाथरस से बसपा ने घोषित किया प्रत्याशी
हाथरस की रैली में आकाश आनंद ने सादाबाद विधानसभा सीट से डॉ. अविन शर्मा को बसपा प्रत्याशी घोषित किया। इससे पहले पार्टी मऊ की मधुबन विधानसभा सीट से भरत सिंह को प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। इस तरह बसपा ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अब तक दो प्रत्याशियों के नाम का ऐलान किया है।
2017 में राजनीति में हुई थी आकाश आनंद की एंट्री
आकाश आनंद पहली बार 2017 में सहारनपुर की एक जनसभा में मायावती के साथ नजर आए थे। इसके बाद उन्होंने लगातार पार्टी के काम में सक्रिय भूमिका निभाई। 2019 में उन्हें बसपा का नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया। यह फैसला सपा और बसपा का लोकसभा चुनाव के बाद गठबंधन टूटने के बाद लिया गया था। 2022 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहली बार आकाश आनंद का नाम बसपा के स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल हुआ था। आकाश आनंद ने लंदन से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन यानी MBA की पढ़ाई की है।
2007 में सत्ता से 2022 में सिर्फ एक सीट तक पहुंची बसपा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बसपा का जनाधार पिछले कुछ चुनावों में लगातार कमजोर हुआ है। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी सिर्फ एक सीट पर सिमट गई। बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का पांच दिन पहले निधन हो गया। इसके बाद यूपी विधानसभा में अब बसपा का कोई विधायक नहीं है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा को 1 करोड़ 18 लाख 73 हजार 137 वोट मिले थे। पार्टी का वोट प्रतिशत 12.9% रहा था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बसपा को एक भी सीट नहीं मिली। पार्टी का वोट प्रतिशत 9.35% रह गया, जो 2019 के 19.43% के मुकाबले करीब आधा था। 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने उत्तर प्रदेश में 10 सीटें जीती थीं।
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