'गाय को छोड़ने वाला भी पाप का भागीदार' मेरठ पहुंची गविष्ठि यात्रा में शंकराचार्य का बड़ा बयान, बोले- गाय में कुछ लोग देखते हैं मांस
मेरठ में गुरुवार को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गविष्ठि यात्रा पांच विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी। हजारों लोगों ने स्वागत किया, जबकि शंकराचार्य ने गौ संरक्षण को धर्म नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र की जिम्मेदारी बताते हुए ऐसा संदेश दिया, जो सिर्फ श्रद्धालुओं ही नहीं बल्कि सरकार और आम लोगों के लिए भी कई सवाल छोड़ गया।
मेरठ में गुरुवार का दिन गौ संरक्षण के नाम रहा। 81 दिवसीय गविष्ठि यात्रा के तहत जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जिले पहुंचे, जहां उन्होंने पांच विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया। यात्रा के दौरान जगह-जगह उनका भव्य स्वागत किया गया, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की रही, जिसमें उन्होंने समाज को गायों के प्रति अपनी जिम्मेदारी याद दिलाई।
'गाय को छोड़ने वाला भी जिम्मेदार'
जनसभाओं को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि गाय का पालन केवल तब तक नहीं होना चाहिए, जब तक वह दूध देती है। उन्होंने कहा कि दूध देना बंद होने के बाद गाय को बेसहारा छोड़ देना भी एक तरह का अन्याय है। उन्होंने कहा कि "गाय को छोड़ने वाला भी उसके साथ होने वाले अन्याय और पाप का भागीदार बनता है।" उनका कहना था कि गौ संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
'कुछ लोग मांस देखते हैं, हम मां देखते हैं'
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने सनातन संस्कृति में गाय के महत्व को भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग लोगों की गाय को लेकर अलग सोच हो सकती है, लेकिन सनातन परंपरा में गाय को माता का स्थान दिया गया है। उन्होंने मंच से कहा कि कुछ लोग गाय में मांस देखते हैं, कुछ केवल दूध देखते हैं, लेकिन सनातन संस्कृति गाय में मां का स्वरूप देखती है। इस दौरान उन्होंने लोगों से सनातन धर्म का नाता है, गाय हमारी माता है का उद्घोष भी कराया।
समाज को भी दिखाई जिम्मेदारी
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में समाज को भी आत्ममंथन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि लोग स्वयं गायों को सड़कों पर छोड़ देंगे, तो केवल सरकार से समाधान की उम्मीद करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जिन जनप्रतिनिधियों को जनता चुनकर भेजती है, यदि वे गौ संरक्षण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाते, तो उसकी नैतिक जिम्मेदारी समाज की भी बनती है। शास्त्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गलत कार्य करने वाला ही नहीं, बल्कि उसका समर्थन करने वाला और मौन रहने वाला भी समान रूप से उत्तरदायी होता है।
पांच विधानसभा क्षेत्रों से गुजरी गविष्ठि यात्रा
गविष्ठि यात्रा ने गुरुवार को मेरठ की सिवालखास, मेरठ दक्षिण, मेरठ शहर, किठौर और मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्रों का भ्रमण किया। हर स्थान पर श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर शंकराचार्य का स्वागत किया। कई स्थानों पर जनसभाएं आयोजित की गईं, जिनमें गौ संरक्षण और गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
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