यूपी पुलिस के 1700 सिपाहियों पर 136 करोड़ की रिकवरी, दरोगा बने तो भी नहीं मिल रही रिलीविंग, विभाग मांग रहा एक सिपाही से करीब 8 लाख रुपए

यूपी पुलिस के करीब 1700 सिपाही दूसरी सरकारी नौकरी में चयनित होने के बाद रिलीविंग के लिए परेशान हैं। करीब 75% जवान दरोगा बने हैं। पुलिस विभाग ट्रेनिंग और प्रोबेशन के दौरान मिले वेतन-भत्तों समेत करीब 8 लाख रुपए की रिकवरी मांग रहा है। कुल रिकवरी करीब 136 करोड़ रुपए है।

Sep 10, 2026 - 17:31
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यूपी पुलिस के 1700 सिपाहियों पर 136 करोड़ की रिकवरी, दरोगा बने तो भी नहीं मिल रही रिलीविंग, विभाग मांग रहा एक सिपाही से करीब 8 लाख रुपए

लखनऊ। यूपी पुलिस में सिपाही की नौकरी पाने के बाद बेहतर सरकारी पद पर चयनित हुए करीब 1700 जवान अब नई नौकरी और पुरानी नौकरी के बीच फंस गए हैं। इनमें करीब 75% जवानों का चयन दरोगा पद के लिए हुआ है। बाकी जवान कंप्यूटर ऑपरेटर, लेखपाल और अन्य सरकारी पदों पर चयनित हुए हैं। जवान सिपाही की नौकरी छोड़कर नई पोस्ट पर जॉइन करना चाहते हैं, लेकिन पुलिस विभाग ने उन्हें रिलीविंग लेटर देने से पहले करीब 8 लाख रुपए तक की रिकवरी जमा करने की शर्त रख दी है। विभाग के मुताबिक, इसमें ट्रेनिंग पर हुआ खर्च, प्रोबेशन के दौरान मिले वेतन-भत्ते और अन्य देय रकम शामिल है। करीब 1700 जवानों पर कुल रिकवरी लगभग 136 करोड़ रुपए बैठ रही है। जवानों का कहना है कि वे सरकार की ही दूसरी नौकरी में जा रहे हैं, इसलिए कम से कम वेतन की रिकवरी से राहत दी जानी चाहिए।

सिपाही बने, ट्रेनिंग पूरी की और फिर दरोगा की परीक्षा पास कर ली
इस पूरे मामले की शुरुआत यूपी पुलिस की वर्ष 2023 की 60 हजार 244 पदों वाली सिपाही भर्ती से हुई। करीब 57 हजार अभ्यर्थी चयनित हुए और उनकी ट्रेनिंग 21 जून 2025 से अलग-अलग रिक्रूटमेंट सेंटरों पर शुरू हुई। ये ट्रेनिंग 20 अप्रैल 2026 तक चली। इसी दौरान यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने 4 हजार 543 दरोगा पदों के साथ कंप्यूटर ऑपरेटर, लेखपाल और अन्य पदों पर भर्तियां निकालीं। सिपाही की ट्रेनिंग ले रहे हजारों जवानों ने इन भर्तियों में भी आवेदन किया। जुलाई 2026 में दरोगा भर्ती का फाइनल रिजल्ट आया। दूसरी भर्तियों के परिणाम भी जारी हुए। इनमें सिपाही की ट्रेनिंग पूरी कर चुके करीब 1700 जवानों के नाम मेरिट लिस्ट में थे।

बागपत के 21 जवान दरोगा बने
इस स्थिति को बागपत के उदाहरण से समझा जा सकता है। यहां 21 सिपाहियों का चयन दरोगा पद के लिए हुआ है। इसी तरह गाजीपुर, जौनपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, मुरादाबाद, वाराणसी और आगरा समेत कई जिलों के जवान भी नई भर्ती में चयनित हुए हैं। नई नौकरी में चयन होने के बाद जवानों को पुरानी नौकरी से रिलीव होना जरूरी है। लेकिन पुलिस विभाग का कहना है कि जॉइनिंग के समय साइन किए गए बॉन्ड की शर्तों के मुताबिक, प्रोबेशन पूरा होने से पहले नौकरी छोड़ने पर विभाग का खर्च वापस करना होगा। यही शर्त अब इन जवानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गई है।

बॉन्ड में क्या है शर्त?
सिपाही भर्ती के समय अभ्यर्थियों से एक बॉन्ड साइन कराया गया था। इसमें प्रावधान है कि ट्रेनिंग और प्रोबेशन की अवधि पूरी किए बिना नौकरी छोड़ने पर ट्रेनिंग पर हुआ खर्च और प्रोबेशन के दौरान मिले वेतन-भत्ते की रकम वापस करनी होगी। विभाग के मुताबिक, यही रकम मिलाकर एक जवान पर करीब 8 लाख रुपए की रिकवरी बन रही है। चयनित जवानों को यह रकम उस जिले के पुलिस कप्तान के कार्यालय में जमा करनी होगी, जहां उनकी तैनाती है। संबंधित जवान की पोस्टिंग के हिसाब से रकम SP, SSP या पुलिस कमिश्नर कार्यालय में जमा होगी। अगर रिकवरी की रकम जमा नहीं की जाती है तो इस्तीफा मंजूर नहीं होगा और रिलीविंग की प्रक्रिया लंबित रहेगी।

8 लाख रुपए की रिकवरी में कितना-कितना पैसा शामिल है?
दरअसल पुलिस ट्रेनिंग के दौरान एक सिपाही पर रोजाना औसतन करीब 863 रुपए खर्च होते हैं। इसमें बैरक, भोजन, यूनिफॉर्म, ट्रेनिंग का सामान, हथियार, स्टाफ और प्रशिक्षकों के वेतन समेत कई खर्च शामिल होते हैं। करीब 300 दिन की ट्रेनिंग में एक सिपाही पर यह खर्च लगभग 2 लाख 58 हजार रुपए बैठता है।

वेतन और भत्ते करीब 5.42 लाख रुपए
सिपाही भर्ती होने के बाद कर्मचारी दो साल की प्रोबेशन अवधि में रहता है। इस दौरान उसे मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता, वर्दी भत्ता और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। विभाग के मुताबिक, प्रोबेशन पूरा होने से पहले नौकरी छोड़ने पर इस दौरान मिले वेतन और भत्तों की रकम भी रिकवरी में शामिल होती है। इसके अलावा प्रोविडेंट फंड और पेंशन फंड से जुड़ी रकम भी गणना में शामिल की जाती है। ट्रेनिंग खर्च और वेतन-भत्तों समेत कुल रकम करीब 8 लाख रुपए तक पहुंच रही है।

सिपाही बोले- ट्रेनिंग का खर्च देने को तैयार
नई नौकरी में चयनित जवानों का कहना है कि वह किसी निजी कंपनी या दूसरे राज्य की नौकरी में नहीं जा रहे हैं। उनका चयन यूपी सरकार की ही दूसरी सरकारी नौकरियों में हुआ है। जवानों का कहना है कि वह ट्रेनिंग पर हुए करीब 2.58 लाख रुपए के खर्च को जमा करने के लिए तैयार हैं। लेकिन दो साल के दौरान मिले पूरे वेतन और भत्ते की रिकवरी करना उचित नहीं है, क्योंकि इस दौरान उन्होंने पुलिस विभाग में ड्यूटी भी की है। जवानों का कहना है कि ज्यादातर अभ्यर्थी सामान्य परिवारों से आते हैं। अचानक करीब 8 लाख रुपए जमा करना उनके लिए आसान नहीं है। इसलिए रिकवरी की रकम में राहत देने की मांग की जा रही है।

पुलिस मुख्यालय का तर्क- दूसरी सरकारी नौकरी मिलना राहत का आधार नहीं
पुलिस मुख्यालय का कहना है कि स्थापना विभाग का पुराना आदेश अभी लागू है। विभाग के मुताबिक, दूसरी नौकरी मिलना अभ्यर्थी के लिए फायदे की स्थिति है और इस आधार पर बॉन्ड की शर्तों में छूट नहीं दी जा सकती। यानी विभाग फिलहाल उन जवानों को बॉन्ड की शर्त से मुक्त करने के पक्ष में नहीं है। 

बिना पैसा जमा किए दूसरी नौकरी में जॉइनिंग भी मुश्किल
इस पूरे मामले में जवानों के सामने सबसे बड़ी समस्या समय की है। नई भर्ती में चयन होने के बाद उन्हें निर्धारित समय पर जॉइन करना है, लेकिन पुरानी नौकरी से रिलीविंग नहीं मिलने पर नई पोस्ट पर जॉइनिंग अटक सकती है। यदि जवान रिकवरी की रकम जमा नहीं करते हैं तो उनका इस्तीफा लंबित रह सकता है। ऐसे में एक तरफ उनके पास नई सरकारी नौकरी का नियुक्ति अवसर है और दूसरी तरफ पुरानी नौकरी छोड़ने के लिए करीब 8 लाख रुपए की रकम जमा करने की शर्त।

1700 सिपाही कम हुए तो फिर खाली होंगे पद
इस मामले का एक दूसरा असर भी सामने आ रहा है। यूपी पुलिस ने 60 हजार 244 सिपाही पदों की भर्ती प्रक्रिया में बड़ी रकम खर्च की थी। भर्ती के बाद 3 हजार से ज्यादा चयनित अभ्यर्थियों ने जॉइन नहीं किया था। अब करीब 1700 प्रशिक्षित सिपाहियों के विभाग छोड़ने की स्थिति बनने से पुलिस बल में फिर इतने पद खाली हो सकते हैं। अगर ये जवान विभाग से रिलीव होकर दूसरी सरकारी सेवाओं में चले जाते हैं तो इन पदों को दोबारा भरने के लिए सरकार को नई भर्ती प्रक्रिया करनी पड़ सकती है। इसके साथ फिर भर्ती परीक्षा, चयन और ट्रेनिंग पर खर्च होगा। फिलहाल करीब 1700 जवानों की नजर इस बात पर है कि सरकार और पुलिस विभाग रिकवरी की रकम को लेकर कोई राहत देता है या नहीं। दूसरी सरकारी नौकरी में चयन के बाद भी करीब 8 लाख रुपए की शर्त ने इन जवानों के लिए नई नौकरी की राह मुश्किल कर दी है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content