राम मंदिर दान विवाद में बढ़ी सियासी और धार्मिक हलचल, ट्रस्ट पदाधिकारियों पर हुई नामजद शिकायत, दो हिस्सों में बंटा संत समाज
राम मंदिर की दान राशि को लेकर चल रहा विवाद अब सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रह गया है। ट्रस्ट पदाधिकारियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराने के बाद राजनीतिक दलों और संत समाज की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। आखिर आरोप कितने गंभीर हैं, कौन किसके समर्थन में खड़ा है और SIT जांच से क्या निकलकर सामने आ सकता है...
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दान राशि को लेकर उठे विवाद ने अब नया राजनीतिक और धार्मिक मोड़ ले लिया है। मामले की जांच SIT कर रही है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। मंगलवार को राम जन्मभूमि थाने में नामजद शिकायत देकर कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। धर्मसेना प्रमुख संतोष दुबे ने राम जन्मभूमि थाने में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा, विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव और मंदिर प्रबंधन से जुड़े रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के खिलाफ नामजद तहरीर दी है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, यदि वे जांच के दौरान अपने पदों पर बने रहते हैं तो जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए जांच पूरी होने तक उन्हें जिम्मेदार पदों से हटाया जाना चाहिए।
कांग्रेस, करणी सेना और हिंदुत्ववादी नेताओं ने उठाए सवाल
संतोष दुबे ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान राशि से जुड़ी किसी भी तरह की अनियमितता के आरोप बेहद गंभीर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं करणी सेना के पदाधिकारियों ने भी पारदर्शी जांच की मांग दोहराई। उनका कहना है कि मंदिर से जुड़ी आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
संत समाज में भी दिखी अलग-अलग राय
दान राशि विवाद पर अयोध्या के संत समाज की प्रतिक्रियाएं भी एक जैसी नहीं हैं। जहां कुछ संत मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं कुछ संत ट्रस्ट पदाधिकारियों के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। तपस्वी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने ट्रस्ट महासचिव चंपत राय का बचाव करते हुए उन्हें ईमानदार व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले SIT की रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए।
जांच से पहले आरोप-प्रत्यारोप ने बढ़ाई सियासी गर्मी
राम मंदिर दान राशि विवाद अब केवल कानूनी जांच का विषय नहीं रह गया है। शिकायतों, राजनीतिक बयानों और संत समाज की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं ने इसे धार्मिक और राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना दिया है। विपक्ष जहां निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं ट्रस्ट समर्थक आरोपों को बेबुनियाद बता रहे हैं।
रिपोर्ट-: अनूप कुमार
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