महिला की छाती दबाना, सलवार उतारना रेप की कोशिश नहीं, पटना हाईकोर्ट के फैसले पर CJI ने जताई नाराजगी, बोले- रिसर्च करें और गाइडलाइन पढ़ें जज

क्या किसी महिला को बंद कमरे में ले जाकर उसकी सलवार उतारने की कोशिश करना और छाती दबाना 'रेप की कोशिश' नहीं माना जा सकता? पटना हाईकोर्ट के एक फैसले ने इसी सवाल पर देशभर में नई कानूनी बहस छेड़ दी है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने भी इस फैसले पर सख्त टिप्पणी की है। आखिर हाईकोर्ट ने आरोपी को किन आधारों पर बरी किया और अब सुप्रीम कोर्ट ने क्या संकेत दिए हैं?

Jul 15, 2026 - 15:43
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महिला की छाती दबाना, सलवार उतारना रेप की कोशिश नहीं, पटना हाईकोर्ट के फैसले पर CJI ने जताई नाराजगी, बोले- रिसर्च करें और गाइडलाइन पढ़ें जज

देश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर एक बार फिर न्यायपालिका के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। बिहार के बांका जिले से जुड़े 18 साल पुराने एक मामले में पटना हाईकोर्ट ने आरोपी को यह कहते हुए बरी कर दिया कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य भारतीय दंड संहिता की धारा 376/511 (रेप का प्रयास) के तहत अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। लेकिन जैसे ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस फैसले पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों को ऐसे मामलों में अधिक संवेदनशीलता, कानूनी रिसर्च और स्थापित दिशानिर्देशों के अनुरूप फैसला देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि वह इस फैसले की विस्तार से समीक्षा करेगा।

सुप्रीम कोर्ट में उठा मामला, CJI ने क्या कहा?
14 जुलाई को वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा। उस समय मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ एक अन्य यौन अपराध से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान अधिवक्ता ने पटना हाईकोर्ट के फैसले का उल्लेख किया। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्यायाधीशों को संवेदनशील होना चाहिए और कानूनी शोध के बाद ही ऐसे मामलों में निर्णय देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत इस फैसले की विस्तार से समीक्षा करेगी और आवश्यक होने पर विस्तृत आदेश भी जारी करेगी। इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (NJA) द्वारा तैयार उन दिशानिर्देशों को भी मंजूरी दी, जिनका उद्देश्य यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान अदालतों में संवेदनशील भाषा और दृष्टिकोण सुनिश्चित करना है। देशभर की अदालतों को इन दिशानिर्देशों का पालन करने का निर्देश भी दिया गया।

पूरा मामला क्या है?
यह मामला बांका जिले के अमरपुर स्थित एक फोटो स्टूडियो का है। पीड़िता के अनुसार, 19 जनवरी 2008 की शाम वह अपने पिता के साथ फोटो खिंचवाने स्टूडियो गई थी। आरोप है कि स्टूडियो मालिक हिमांशु उर्फ मिथिया पाठक फोटो खींचने के बहाने उसे अंदर ले गया और उसके पिता को बाहर कंप्यूटर पर फोटो देखने के लिए रोक दिया। पीड़िता का आरोप है कि अंदर जाते ही आरोपी ने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया, अपने कपड़े उतार दिए, उसकी सलवार उतारने की कोशिश की, उसकी छाती दबाई और उसके साथ जबरन छेड़छाड़ की। पीड़िता के अनुसार, उसकी चीख सुनकर उसके पिता ने दरवाजा धक्का देकर खोला, जिसके बाद आरोपी उन्हें धक्का देकर मौके से भाग गया। अगले दिन 20 जनवरी 2008 को इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई।

लोअर कोर्ट ने सुनाई थी सजा
करीब पांच साल तक चले ट्रायल के बाद वर्ष 2013 में बांका की अदालत ने आरोपी को IPC की धारा 376/511 (रेप का प्रयास) और धारा 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना) के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने आरोपी को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद आरोपी ने इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी।

13 साल बाद हाईकोर्ट ने क्यों किया बरी?
करीब 13 वर्षों तक अपील लंबित रहने के बाद 9 जुलाई 2026 को पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पूर्णेंदु सिंह ने आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में मुख्य रूप से तीन आधार बताए।

1. रेप के प्रयास के पर्याप्त साक्ष्य नहीं
हाईकोर्ट ने माना कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी ने महिला को कमरे में बंद किया, उसकी सलवार उतारने की कोशिश की और उसकी छाती दबाकर शारीरिक उत्पीड़न किया। हालांकि अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने रेप करने की दिशा में ऐसा प्रत्यक्ष शारीरिक प्रयास किया, जिससे IPC की धारा 376/511 लागू हो सके। अदालत के अनुसार, यदि अभियोजन का पूरा संस्करण भी स्वीकार कर लिया जाए, तब भी यह कृत्य IPC की धारा 354 के दायरे में आता है, न कि रेप के प्रयास की धारा में।

2. मेडिकल जांच नहीं हुई
हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में पीड़िता की मेडिकल जांच नहीं कराई गई थी। अदालत ने माना कि केवल मेडिकल जांच न होने से हर मामला स्वतः खारिज नहीं हो जाता, लेकिन इस केस में रेप के प्रयास के आरोप की पुष्टि के लिए कोई चिकित्सकीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं था।

3. स्वतंत्र गवाह का समर्थन नहीं मिला
अदालत ने यह भी कहा कि पांच गवाहों में केवल एक स्वतंत्र गवाह था और उसने अदालत में अभियोजन का साथ नहीं दिया। इसके अलावा जांच अधिकारी से मुकदमे के दौरान प्रभावी पूछताछ नहीं हुई और चिकित्सा अधिकारी की गवाही भी रिकॉर्ड पर नहीं थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता के माता-पिता मुख्य गवाह थे और ऐसे मामलों में अदालत स्वतंत्र पुष्टि को महत्व देती है। हालांकि अदालत ने एफआईआर में हुई देरी को स्वीकार करते हुए माना कि पीड़िता का यह स्पष्टीकरण विश्वसनीय है कि थाना प्रभारी ने पहले रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट पहले भी पलट चुका है ऐसे फैसले
यह पहला मौका नहीं है जब किसी हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई हो।

  • स्किन टू स्किन मामला
    2021 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा था कि यदि त्वचा से त्वचा का संपर्क नहीं हुआ तो पॉक्सो कानून लागू नहीं होगा। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पूरी तरह पलट दिया और कहा कि यौन अपराध की व्याख्या इतनी संकीर्ण नहीं हो सकती।
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला
    मार्च 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा था कि नाबालिग का स्तन पकड़ना, पायजामे का नाड़ा तोड़ना और उसे खींचना रेप की तैयारी है, प्रयास नहीं। सिर्फ आठ दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए कहा कि ऐसे कृत्य परिस्थितियों के आधार पर रेप के प्रयास की श्रेणी में आ सकते हैं।

कानून में रेप की तैयारी और रेप की कोशिश में क्या अंतर है?
भारतीय कानून दोनों स्थितियों में स्पष्ट अंतर करता है। रेप की तैयारी उस चरण को माना जाता है, जब अपराध की योजना बनाई जाती है या उसके लिए साधन जुटाए जाते हैं। रेप की कोशिश तब मानी जाती है, जब आरोपी तैयारी से आगे बढ़कर अपराध को अंजाम देने की दिशा में प्रत्यक्ष कदम उठा देता है, भले ही अपराध पूरा न हो पाए। इसी अंतर को लेकर इस समय देश में कानूनी बहस तेज हो गई है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content