पांच महिलाओं ने की राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग, बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए लगाई भावुक गुहार, पत्र में लिखा- 'किडनी दो या फिर मौत दो'
हर हफ्ते डायलिसिस, लाखों का खर्च और ट्रांसप्लांट का अंतहीन इंतजार... आखिर ऐसा क्या हुआ कि कोटा की पांच माताओं ने सीधे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपने बच्चों की जिंदगी की भीख मांगी? क्यों माताओं कों कहना पड़ा- किडनी दो या मौत दो?
किसी भी मां के लिए अपने बच्चे को हर दिन बीमारी से लड़ते देखना सबसे बड़ा दर्द होता है। लेकिन जब इलाज की उम्मीद भी धीरे-धीरे खत्म होने लगे, तो वह दर्द एक गुहार में बदल जाता है। राजस्थान के कोटा में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों की पांच माताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भावुक पत्र लिखकर मदद की अपील की है। पत्र में महिलाओं ने लिखा है कि उनके बच्चों की जान बचाने के लिए समय पर किडनी प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) जरूरी है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने और लंबी प्रतीक्षा के कारण इलाज प्रभावित हो रहा है। अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए उन्होंने लिखा कि यदि उनके बच्चों का समय पर इलाज संभव नहीं है, तो उन्हें किडनी दी जाए या फिर मौत दे दी जाए। यह पत्र केवल पांच परिवारों की व्यथा नहीं, बल्कि उन तमाम मरीजों की मुश्किलों को सामने लाता है, जो गंभीर बीमारी के बावजूद समय पर इलाज का इंतजार कर रहे हैं।
डेढ़ साल से प्रभावी ढंग से शुरू नहीं हो सकी ट्रांसप्लांट सुविधा
महिलाओं का आरोप है कि कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े एमबीएस अस्पताल में पिछले करीब डेढ़ वर्ष से किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा प्रभावी रूप से शुरू नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें तत्काल प्रत्यारोपण की जरूरत है। उनका कहना है कि ट्रांसप्लांट सुविधा उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को या तो लंबा इंतजार करना पड़ रहा है या फिर दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे इलाज और अधिक कठिन हो जाता है। पीड़ित परिवारों के मुताबिक, अधिकांश बच्चों को सप्ताह में कई बार डायलिसिस कराना पड़ता है। लगातार अस्पताल के चक्कर, दवाइयों का खर्च और यात्रा का बोझ परिवारों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर रहा है। कई अभिभावकों का कहना है कि बेहतर इलाज की तलाश में उन्हें दूसरे शहरों तक जाना पड़ता है। इससे न केवल खर्च बढ़ता है, बल्कि बच्चों और परिजनों दोनों पर मानसिक दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।
पत्र में विशेष व्यवस्था की मांग
महिलाओं ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में मांग की है कि किडनी रोग से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए विशेष चिकित्सा व्यवस्था बनाई जाए और कोटा में किडनी ट्रांसप्लांट सेवाओं को जल्द प्रभावी रूप से शुरू कराया जाए। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि प्रदेश के कई जिलों में हाल के समय में बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर इलाज और ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध होती, तो कई मरीजों की जान बचाई जा सकती थी।
'सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे'
परिजनों का कहना है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों के इलाज में हो रही देरी अब उनके लिए असहनीय होती जा रही है। परिवार लगातार मानसिक तनाव और आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। फिलहाल, इस पूरे मामले पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राष्ट्रपति को भेजी गई इस भावुक अपील के बाद प्रशासन और सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
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