BRICS समिट पर कांग्रेस में अलग-अलग सुर, चिदंबरम ने पूछा- भारत को क्या मिला, थरूर बोले- 11 देशों को एक मंच पर लाना बड़ी ताकत
भारत में होने वाले BRICS समिट से पहले कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। पी. चिदंबरम ने BRICS समेत G20, QUAD और SCO जैसे संगठनों से भारत को मिले ठोस फायदे पर सवाल उठाया, जबकि शशि थरूर ने 11 देशों के नेताओं को एक मंच पर लाने को भारत की कूटनीतिक ताकत बताया।
नई दिल्ली। भारत में होने वाले BRICS समिट से पहले कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के बयानों ने सियासी चर्चा बढ़ा दी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने BRICS समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भारत की सदस्यता के फायदे पर सवाल उठाया है। वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने BRICS को भारत की कूटनीतिक ताकत और ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया है। चिदंबरम ने सवाल उठाया कि भारत BRICS, G20, QUAD और शंघाई सहयोग संगठन जैसे कई बहुपक्षीय संगठनों का हिस्सा है, लेकिन इनसे देश को वास्तव में कितना ठोस फायदा मिला, इस पर विचार किया जाना चाहिए। इसके ठीक उलट थरूर ने BRICS समिट की मेजबानी को भारत की कूटनीतिक क्षमता का प्रदर्शन बताया। उन्होंने कहा कि 11 देशों के बड़े नेताओं को भारत में एक मंच पर लाना अपने आप में देश की दूसरे देशों को साथ लाने की क्षमता को दिखाता है। 18वां BRICS समिट 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होना है। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत 11 सदस्य देशों के शीर्ष नेता शामिल होंगे। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, टेक्नोलॉजी और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है।
चिदंबरम ने उठाया सवाल- अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भारत को क्या मिला?
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने बुधवार को BRICS समेत दूसरे बहुपक्षीय संगठनों में भारत की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत BRICS के अलावा G20, QUAD और शंघाई सहयोग संगठन जैसे कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों का हिस्सा है। ऐसे में यह विचार किया जाना चाहिए कि इन संगठनों की सदस्यता से देश को वास्तव में क्या ठोस लाभ मिला है। चिदंबरम का सवाल ऐसे समय आया है जब भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में समूह के शीर्ष नेताओं का सम्मेलन होने वाला है।
थरूर बोले- BRICS को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को BRICS को ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन BRICS में शामिल 11 प्रमुख देश दुनिया की बड़ी आबादी और करीब 41 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इस समूह को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। थरूर के मुताबिक, भारत में इतने बड़े समूह के नेताओं का एक साथ आना देश की कूटनीतिक क्षमता को भी दर्शाता है। अलग-अलग हितों और विदेश नीति वाले देशों को एक मंच पर लाना भारत की वैश्विक भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
- थरूर ने BRICS की चुनौतियां भी गिनाईं
थरूर ने BRICS की ताकत के साथ उसकी चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने माना कि समूह में शामिल सभी देशों की विदेश नीति और राष्ट्रीय हित एक जैसे नहीं हैं। यही वजह है कि बड़े वैश्विक मुद्दों पर एक राय बनाना मुश्किल हो जाता है। - ईरान-इजराइल और रूस-यूक्रेन पर मतभेद
BRICS के भीतर ईरान-इजराइल और रूस-यूक्रेन जैसे मुद्दों पर मतभेद सामने आ चुके हैं। थरूर ने बताया कि मई में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में इन मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी थी और साझा बयान जारी नहीं हो पाया। - भारत ने जारी किया था चेयर डिक्लेरेशन
साझा बयान जारी नहीं होने के बाद भारत ने BRICS अध्यक्ष के तौर पर अपनी ओर से चेयर डिक्लेरेशन जारी किया था। इससे यह स्पष्ट हुआ कि समूह के सदस्य देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मतभेद मौजूद हैं। - आगामी समिट में भी सहमति की चुनौती
अब निगाहें 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS समिट पर हैं। अगर बड़े वैश्विक मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच फिर सहमति नहीं बनती है तो BRICS की एकजुटता पर सवाल उठ सकते हैं। थरूर के मुताबिक, ऐसी स्थिति भारत के लिए भी कूटनीतिक चुनौती होगी। - व्यापार घाटा भी भारत के लिए चिंता
BRICS देशों के साथ भारत के व्यापार संतुलन को लेकर भी चुनौती है। भारत का इन देशों को निर्यात अपेक्षाकृत कम है, जबकि वहां से आयात ज्यादा होता है। यानी भारत BRICS देशों से जितना सामान बेचता है, उससे ज्यादा खरीदता है।
चिदंबरम और थरूर के बयानों पर BJP ने कांग्रेस को घेरा
चिदंबरम के बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस के भीतर मतभेद का मुद्दा उठाया। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने थरूर के बयान का हवाला देते हुए कहा कि दोनों नेताओं की BRICS को लेकर अलग-अलग राय कांग्रेस के अंदर की स्थिति को दिखाती है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि थरूर का BRICS समिट को भारत के लिए बड़ी प्रतिष्ठा बताना कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राय को दिखाता है। भाजपा ने इसी विरोधाभास को आधार बनाकर कांग्रेस पर राजनीतिक हमला बोला है।
इस बार भारत के हाथ में BRICS की कमान
इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता भारत कर रहा है। यह समूह दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से बनाया गया था। मूल समूह में भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। बाद में मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया भी इसमें शामिल हुए। भारत की अध्यक्षता में BRICS के एजेंडे में ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करना, आर्थिक सहयोग बढ़ाना, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद से निपटना और सप्लाई चेन को मजबूत करना जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाला आगामी BRICS समिट भारत के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक भूमिका को मजबूत करने का भी मौका है। हालांकि, कांग्रेस के भीतर चिदंबरम और थरूर के अलग-अलग नजरिए ने समिट से पहले ही राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
