27 साल बाद ज्येष्ठ शिवरात्रि पर बन रहा दुर्लभ गौरी योग, इस दिन महादेव की पूजा से मिलेगा दोगुना फल, जानिए क्या है इसकी विशेषता
Masik Shivratri 2026: ज्येष्ठ अधिक मास की मासिक शिवरात्रि 13 जून 2026 को मनाई जाएगी। इस बार 27 साल बाद दुर्लभ गौरी योग बन रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दोगुना फल मिलेगा और वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर हो सकती हैं।
हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए समर्पित होता है। लेकिन साल 2026 की ज्येष्ठ अधिक मास की मासिक शिवरात्रि कई मायनों में खास मानी जा रही है। ज्योतिषविदों के अनुसार इस बार ऐसा दुर्लभ गौरी योग बन रहा है, जो करीब 27 साल बाद देखने को मिलेगा। मान्यता है कि इस शुभ संयोग में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से भक्तों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पुण्य और शुभ फल प्राप्त होगा। यही कारण है कि इस बार की शिवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
कब रखा जाएगा ज्येष्ठ अधिक मास की मासिक शिवरात्रि का व्रत?
द्रिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 13 जून 2026 को शाम 4 बजकर 7 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। चूंकि मासिक शिवरात्रि की पूजा प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना जाता है, इसलिए 13 जून 2026, शनिवार को ही व्रत और पूजा का विधान रहेगा।
27 साल बाद बन रहा है दुर्लभ गौरी योग
इस बार की शिवरात्रि का सबसे बड़ा आकर्षण गौरी योग है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करेगा। चंद्रमा और वृषभ राशि के इस विशेष संयोग से गौरी योग का निर्माण होगा। यह योग अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। बताया जा रहा है कि ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि पर ऐसा योग लगभग 27 वर्षों बाद बन रहा है। ज्योतिषियों का मानना है कि जिन लोगों के विवाह में बाधाएं आ रही हैं या वैवाहिक जीवन में तनाव चल रहा है, उनके लिए यह दिन विशेष लाभकारी हो सकता है। गौरी योग में भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
ऐसे करें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा
शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव का जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प और फल अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित कर सुख, समृद्धि और दांपत्य जीवन की मंगल कामना करें। पूजा के दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप, शिव चालीसा का पाठ और शिव पुराण का श्रवण या पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। इस विशेष शिवरात्रि पर श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा भक्तों के लिए शुभ फलदायी मानी जा रही है।
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