इस्तीफा देने के बाद भी नहीं रुकेगी कार्रवाई… जस्टिस यशवंत वर्मा पर संसद में चल सकता है महाभियोग
Justice Yashwant Verma: जस्टिस यशवंत वर्मा के इस्तीफे के बाद भी सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक मानसून सत्र में महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। जांच समिति अपनी रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर को सौंप चुकी है, जिसमें आरोपों को गंभीर माना गया है।
जस्टिस यशवंत वर्मा द्वारा अपने पद से इस्तीफा देने के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई रुकती नजर नहीं आ रही है। सूत्रों के मुताबिक सरकार इस मामले को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने के मूड में है। बताया जा रहा है कि अभी तक उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से मंजूर नहीं हुआ है। ऐसे में आगामी मानसून सत्र में संसद के भीतर उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। इस पूरे मामले को न्यायपालिका में जवाबदेही और पारदर्शिता से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए है, जिसके चलते संसद में तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।
जांच समिति ने लोकसभा स्पीकर को सौंपी रिपोर्ट
जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच कर रही विशेष समिति अपनी रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंप चुकी है। हालांकि रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि समिति ने आरोपों को गंभीर माना है। इसी वजह से सरकार इस्तीफे के बाद भी कार्रवाई को आगे बढ़ाना चाहती है ताकि भविष्य में सख्त संदेश दिया जा सके। लोकसभा सचिवालय के अनुसार, न्यायाधीश (जांच) अधिनियम 1968 के तहत तैयार की गई यह रिपोर्ट उचित समय पर संसद के दोनों सदनों में पेश की जाएगी। संसद का मानसून सत्र आमतौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है।
जले हुए नोट मिलने के बाद शुरू हुई थी कार्रवाई
यह पूरा मामला उस समय सामने आया था जब पिछले साल 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास में आग लग गई थी। आरोप है कि आग के दौरान दमकलकर्मियों को एक स्टोर रूम में बड़ी मात्रा में जले हुए नोट मिले थे। उस समय जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में जज थे। बाद में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट वापस भेज दिया गया था। तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा गठित आंतरिक समिति ने अपनी जांच में कहा था कि जिस स्टोर रूम से कथित कैश मिला, उस पर जस्टिस वर्मा का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण था।
200 से ज्यादा सांसदों ने किए थे हस्ताक्षर
जानकारी के मुताबिक जुलाई 2025 में 200 से अधिक सांसदों ने जस्टिस वर्मा को हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि किसी भी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने की प्रक्रिया संसद के जरिए ही पूरी होती है। इसी बीच, बर्खास्तगी की आशंका के बीच जस्टिस वर्मा ने हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि अब भी उनका नाम हाई कोर्ट के जजों की सूची में दर्ज बताया जा रहा है। उनकी सेवानिवृत्ति 5 जनवरी 2031 को होनी थी।
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