बैटरी वाला ट्रैक्टर बनाने वाले 22 वर्षीय युवा वैज्ञानिक की होटल में मौत, लखनऊ के फाइव स्टार होटल के कमरे में मिला शव, सदमे में मां हुई बेहोश 

13 साल की उम्र से विज्ञान में नए-नए प्रयोग करने वाले 22 वर्षीय युवा वैज्ञानिक राहुल सिंह की लखनऊ के एक फाइव स्टार होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। कमरे में उल्टी के निशान मिले हैं और पुलिस फूड पॉइजनिंग या हार्ट अटैक की आशंका जता रही है। आखिर वह लखनऊ क्यों आए थे और उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई?

Jul 15, 2026 - 13:34
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बैटरी वाला ट्रैक्टर बनाने वाले 22 वर्षीय युवा वैज्ञानिक की होटल में मौत, लखनऊ के फाइव स्टार होटल के कमरे में मिला शव, सदमे में मां हुई बेहोश 

जिस युवा वैज्ञानिक ने खेती को आसान और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का सपना देखा था, उसी की जिंदगी 22 साल की उम्र में अचानक थम गई। बैटरी से चलने वाला इको-फ्रेंडली ट्रैक्टर बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले राहुल सिंह की लखनऊ के एक फाइव स्टार होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है। बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां बार-बार बेहोश हो रही हैं। मामला लखनऊ के विभूतिखंड थाना क्षेत्र स्थित नोवोटेल होटल का है। राहुल सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे होटल में ठहरे थे। मंगलवार सुबह करीब 11 बजे जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो होटल कर्मचारियों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर कमरे के अंदर दाखिल हुई। वहां राहुल सिंह बेड पर अचेत अवस्था में पड़े मिले। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

कमरे में मिले उल्टी के निशान, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार
एसीपी विभूतिखंड सौम्या पांडे के अनुसार, कमरे के भीतर राहुल का सामान और खाने-पीने की कुछ वस्तुएं रखी थीं। बेड के नीचे और आसपास उल्टी (वोमिटिंग) के निशान भी मिले हैं। फॉरेंसिक टीम ने मौके से सभी जरूरी साक्ष्य एकत्र किए हैं। प्रारंभिक जांच में फूड पॉइजनिंग या हार्ट अटैक की आशंका जताई जा रही है। हालांकि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।

किसान के बेटे ने खेती की समस्या से निकाला था समाधान
राहुल सिंह महराजगंज जिले के सिसवा बाजार क्षेत्र के बीजापार आसमान छपरा गांव के रहने वाले थे। उनके पिता किसान हैं। खेतों में होने वाली मेहनत और डीजल की बढ़ती लागत को देखते हुए राहुल ने ऐसा ट्रैक्टर बनाने का सपना देखा, जो पर्यावरण के अनुकूल भी हो और किसानों की जेब पर भी भारी न पड़े। इसी सोच ने उन्हें बैटरी से चलने वाला इको-फ्रेंडली ट्रैक्टर बनाने के लिए प्रेरित किया। यह आविष्कार उन्हें कम उम्र में ही देशभर में पहचान दिलाने लगा।

रिसर्च और पढ़ाई साथ-साथ कर रहे थे राहुल
राहुल वर्तमान में गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के डिजाइन इनोवेटर एंड इंक्यूबेशन सेंटर में इनोवेटर के रूप में जुड़े हुए थे। यहां वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ नए वैज्ञानिक प्रयोगों और रिसर्च पर भी काम कर रहे थे। उनकी पहचान केवल एक छात्र के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे युवा इनोवेटर के रूप में बन चुकी थी, जो कम संसाधनों में बड़े समाधान तैयार करने की क्षमता रखता था।

13 साल की उम्र से विज्ञान मेले में लगातार बनाया रिकॉर्ड
राहुल ने बेहद कम उम्र से विज्ञान के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित करनी शुरू कर दी थी। उन्होंने लगातार तीन वर्षों तक इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में पहला स्थान हासिल किया।

  • 2018 में रोटी मेकर तैयार किया।
  • 2019 में बैटरी से चलने वाली इको-फ्रेंडली साइकिल बनाई।
  • 2020 में कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन आयोजित इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में बैटरी चालित ट्रैक्टर बनाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

ऐसा ट्रैक्टर, जिसे चार्ज करने की जरूरत नहीं
राहुल का विकसित किया गया ट्रैक्टर पूरी तरह बैटरी आधारित और इको-फ्रेंडली था। इसमें डीजल या पेट्रोल की जरूरत नहीं पड़ती थी, इसलिए यह वायु प्रदूषण भी नहीं फैलाता था। उन्होंने दावा किया था कि ट्रैक्टर की बैटरी अलग से चार्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी। ट्रैक्टर चलते समय ही बैटरी खुद चार्ज होती रहेगी। इसके अलावा इसकी मोटर और बैटरी भी उन्होंने स्वयं डिजाइन की थी।

गियर नहीं, पावर स्टेयरिंग और स्मार्ट फीचर्स से लैस था ट्रैक्टर
राहुल के ट्रैक्टर में पारंपरिक गियर सिस्टम नहीं था। उन्होंने इसमें पावर स्टेयरिंग, आगे-पीछे चलाने के लिए अलग स्विच, चार इंडिकेटर और दो हेडलाइट लगाई थीं, ताकि किसान रात के समय भी आसानी से खेत में काम कर सकें। ट्रैक्टर की बैटरी बोनट के नीचे लगाई गई थी और उसे ठंडा रखने के लिए चार पंखे भी लगाए गए थे। इसका वजन करीब डेढ़ क्विंटल था। राहुल के अनुसार, यह ट्रैक्टर लगभग 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता था और करीब तीन घंटे में एक एकड़ खेत की जुताई करने में सक्षम था।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content