भारत का सेकंड हैंड कार बाजार तेजी से बढ़ा, 2031 तक दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मार्केट बनने की उम्मीद
भारत का प्रयुक्त कार बाजार 2031 तक दोगुना होने के लिए तैयार है, जो बढ़ती मांग, कारों के तेजी से प्रतिस्थापन और संगठित क्षेत्र के बढ़ते अवसरों के साथ वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा।
भारत में सेकंड हैंड यानी यूज्ड कारों का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और आने वाले वर्षों में यह एक बड़ी आर्थिक ताकत बन सकता है। कंसल्टिंग फर्म रेडसीर की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 तक इस बाजार का आकार लगभग 35 अरब डॉलर (करीब 2.9 लाख करोड़ रुपये) है, जो 2031 तक बढ़कर लगभग 70 अरब डॉलर (करीब 5.8 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है। यानी सिर्फ पांच साल में यह बाजार दोगुना होने की ओर है। तेजी से बढ़ती मांग, बदलती उपभोक्ता सोच और नई तकनीकें इस विकास के प्रमुख कारण मानी जा रही हैं।
दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है भारत
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा यूज्ड कार बाजार है, लेकिन इसकी विकास दर अन्य देशों की तुलना में काफी तेज है। अनुमान है कि आने वाले समय में भारत, अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है। इसका मुख्य कारण देश के अलग-अलग शहरों और आय वर्गों में बढ़ती कार की मांग है।
कार बदलने का समय हुआ कम
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अब लोग अपनी कार पहले की तुलना में जल्दी बदल रहे हैं। पहले जहां लोग एक कार को 7 से 8 साल तक इस्तेमाल करते थे, वहीं 2031 तक यह समय घटकर 4 से 5 साल हो सकता है। खासकर मेट्रो और टियर-1 शहरों में यह बदलाव ज्यादा दिखाई दे रहा है। नई तकनीक, सरकारी नियम और बदलती पसंद इस बदलाव की बड़ी वजह हैं, जिससे यूज्ड कारों की सप्लाई भी बढ़ेगी।
बिक्री और कीमतों में होगा इजाफा
रिपोर्ट के अनुसार, 2031 तक हर साल यूज्ड कारों की बिक्री 90 लाख से 1 करोड़ यूनिट तक पहुंच सकती है। साथ ही, इन कारों की औसत कीमत भी बढ़कर 6.5 लाख से 6.9 लाख रुपये तक हो सकती है। इसका कारण यह है कि अब लोग बेहतर गुणवत्ता और प्रीमियम फीचर्स वाली कारों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। अनुमान है कि 2031 तक करीब 28 करोड़ भारतीय परिवार यूज्ड कार खरीदने में सक्षम होंगे।
कंपनियों के लिए बड़ा अवसर, भरोसा सबसे जरूरी
वर्तमान में लगभग 80% यूज्ड कार लेन-देन असंगठित क्षेत्र में होता है, जिससे संगठित कंपनियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए बड़ा अवसर बन रहा है। जो कंपनियां एक ही जगह पर खरीद, जांच, मरम्मत, फाइनेंस और ट्रांसफर जैसी सेवाएं देंगी, वे तेजी से आगे बढ़ सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे प्लेटफॉर्म्स 2031 तक 4 अरब डॉलर का कारोबार कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब यह बाजार सिर्फ कीमत पर नहीं, बल्कि भरोसे और गुणवत्ता पर भी आधारित होता जा रहा है।
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