IRCTC केस में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ीं, लालू-तेजस्वी-राबड़ी समेत 9 पर आरोप तय, 7 आरोपी हुए बरी
IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी समेत 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। कोर्ट ने 7 आरोपियों को बरी कर दिया। मामला लालू यादव के रेल मंत्री रहते रांची और पुरी के IRCTC होटलों के टेंडर और जमीन से जुड़े कथित लेनदेन का है।
नई दिल्ली। IRCTC से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। वहीं, मामले में आरोपी बनाए गए 7 लोगों को कोर्ट ने आरोपों से मुक्त कर दिया। यह मामला लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते IRCTC के रांची और पुरी स्थित दो होटलों के टेंडर से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया और इसके बदले जमीन से जुड़ा लाभ लालू परिवार तक पहुंचा। मामले में ED ने कुल 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अब कोर्ट ने इनमें से 9 के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ाने का फैसला किया है। मामले में अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी।
कोर्ट ने राबड़ी और तेजस्वी को लेकर क्या कहा ?
राउज एवेन्यू कोर्ट ने राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ अपराध से हुई आय और पद के कथित गलत इस्तेमाल को लेकर मजबूत संदेह जताया है। कोर्ट के मुताबिक, दोनों पटना की उस जमीन का फायदा उठा रहे हैं, जिसे कथित तौर पर वर्ष 2005 से 2014 के बीच लालू यादव के कहने पर उनके पक्ष में ट्रांसफर किया गया था। उस समय लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। कोर्ट ने मामले में लालू यादव की भूमिका को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की है। अदालत के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी साजिश की जानकारी लालू यादव को थी और इस प्रक्रिया में उनका हस्तक्षेप भी सामने आया।
मामला किस समय का है ?
यह पूरा मामला उस दौर का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान IRCTC के अधीन आने वाले रांची और पुरी के दो होटलों के संचालन से जुड़े टेंडर में अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन होटलों और उनसे जुड़ी जमीनों को निजी कंपनियों को नियमों की अनदेखी करते हुए पट्टे पर दिया गया। एजेंसियों का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसी मामले में बाद की जांच के दौरान जमीन के कथित हस्तांतरण और उससे लालू परिवार को हुए लाभ को भी जांच का हिस्सा बनाया गया।
16 आरोपी बनाए गए थे, 7 को मिली राहत
ED की चार्जशीट में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के अलावा लारा प्रोजेक्ट्स, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, सुजाता होटल्स, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलन और अभीषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया गया था। इन 16 आरोपियों में से कोर्ट ने 7 को आरोपों से मुक्त कर दिया है। वहीं, लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा आगे चलेगा।
निचली अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी
लालू परिवार ने निचली अदालत के अक्टूबर 2025 के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप तय किए गए थे। इस याचिका का केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने विरोध किया था। CBI की ओर से अदालत में कहा गया कि जांच एजेंसी के पास मामले से जुड़े पर्याप्त और पुख्ता सबूत मौजूद हैं। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया था कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य साक्ष्य सामने आए हैं, जो लगाए गए आरोपों को मजबूत करते हैं।
कोर्ट ने लालू की भूमिका को लेकर भी की टिप्पणी
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 13 अक्टूबर को मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि टेंडर से जुड़ी कथित साजिश लालू यादव की जानकारी में रची गई थी। अदालत के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में लालू यादव का हस्तक्षेप था और इस पूरी प्रक्रिया से उनके परिवार को आर्थिक लाभ हुआ। इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ मुकदमा चलाने का फैसला लिया।
लालू परिवार ने आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश
दूसरी ओर, लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। लालू यादव का कहना है कि उन्हें और उनके परिवार को राजनीतिक साजिश के तहत इस मामले में फंसाया गया है। लालू परिवार ने अदालत के सामने भी अपनी बेगुनाही का दावा किया है। अब राउज एवेन्यू कोर्ट के ताजा आदेश के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। 16 आरोपियों में से 7 को राहत मिल चुकी है, जबकि लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी।
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