जनगणना के बाद अब भूसा जुटाएंगे शिक्षक! बरेली में शिक्षकों को मिले नए आदेश पर मचा बवाल, भड़के टीचरों ने कहा- आज भूसा तो कल गोबर उठवाएंगे
जनगणना और चुनावी ड्यूटी में पहले से जुटे शिक्षकों को अब बेसहारा गोवंश के लिए भूसा जुटाने का जिम्मा दिया गया। हर स्कूल को 46 किलो और हर ब्लॉक को 100 क्विंटल भूसा जमा करने का टारगेट मिला। आदेश में कार्रवाई की चेतावनी के बाद शिक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा। किसी ने इसे शिक्षक सम्मान के खिलाफ बताया, तो किसी ने कहा- “आज भूसा मांग रहे हैं, कल गोबर उठाने को कहेंगे।” आखिर क्यों जारी हुआ यह आदेश, कैसे बदला गया फैसला और क्यों अब यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट...
उत्तर प्रदेश के बरेली में बेसिक शिक्षा विभाग का एक आदेश इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। पहले से जनगणना, बीएलओ ड्यूटी, वोटर लिस्ट और चुनाव जैसे सरकारी कामों में लगे शिक्षकों को अब बेसहारा गोवंश के लिए भूसा जुटाने का जिम्मा भी सौंप दिया गया। आदेश सामने आते ही शिक्षकों में नाराजगी फैल गई। सोशल मीडिया पर लेटर वायरल हुआ तो मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा।
हर स्कूल को 46 किलो भूसा जुटाने का टारगेट
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया कि प्रत्येक विद्यालय अपने स्तर पर भूसे की व्यवस्था करेगा। हर स्कूल को करीब 46 किलो भूसा जमा कराना होगा, जबकि प्रत्येक विकासखंड के लिए कुल 100 क्विंटल भूसा जुटाने का लक्ष्य तय किया गया। यह भूसा खंड विकास अधिकारी या पशु चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जमा कराया जाना था। आदेश में यह भी कहा गया कि भूसा जमा करने के बाद उसकी रसीद विभाग में उपलब्ध करानी होगी, ताकि लक्ष्य की निगरानी की जा सके। काम को एक सप्ताह के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए थे।
आदेश में कार्रवाई की चेतावनी, बढ़ा शिक्षकों का गुस्सा
बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी पत्र में साफ कहा गया कि आदेश का पालन न करने पर संबंधित स्कूलों और शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। यही चेतावनी शिक्षकों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह बन गई। शिक्षकों का कहना है कि वे पहले ही पढ़ाई के अलावा कई गैर-शैक्षणिक कामों में लगाए जा चुके हैं। अब उनसे भूसा इकट्ठा करने और जमा कराने का काम करवाना उनकी गरिमा के खिलाफ है।
शिक्षकों ने पूछा- क्या यही अब हमारी जिम्मेदारी है?
शिक्षक संगठनों ने इस आदेश पर खुलकर विरोध जताया। यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षकों का काम बच्चों को पढ़ाना है, भूसा इकट्ठा करना नहीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज भूसा देने का दबाव बनाया जा रहा है, कल गोबर उठाने का आदेश भी आ सकता है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार हर प्रशासनिक जिम्मेदारी स्कूलों और शिक्षकों के कंधों पर डाल देती है। कभी जनगणना, कभी चुनाव, कभी सर्वे और अब गोवंश के लिए भूसा जुटाने का आदेश। ऐसे में पढ़ाई का समय और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
वर्कलोड बढ़ने से तनाव में शिक्षक
शिक्षक संगठनों ने कहा कि मौजूदा समय में शिक्षक पहले से भारी वर्कलोड झेल रहे हैं। जनगणना जैसे बड़े कामों के बीच यह नया आदेश उनके लिए अतिरिक्त दबाव बन गया। यूटा के मीडिया प्रमुख सतेंद्र पाल सिंह ने कहा कि ऐसे आदेश पूरी तरह अव्यवहारिक हैं। विभाग को आदेश जारी करने से पहले यह सोचना चाहिए कि क्या यह वास्तव में शिक्षकों का काम है। जिला कोषाध्यक्ष हेमंत कुमार ने कहा कि शिक्षक पहले ही मानसिक दबाव में काम कर रहे हैं। ऐसे आदेश उन्हें और अधिक परेशान कर रहे हैं।
महिला शिक्षकों ने भी जताई नाराजगी
टीचर राखी गंगवार ने कहा कि भूसा दान कराने का आदेश शिक्षक सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि शिक्षक पहले से चुनाव, मतगणना, वोटर लिस्ट और जनगणना जैसे काम पूरी जिम्मेदारी से कर रहे हैं। ऐसे में घर-घर जाकर भूसा जुटाने का काम करवाना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि किसान खुद भूसा भंडारण की समस्या से जूझ रहे हैं और कई जगह पशुपालकों के पास भी सीमित चारा है। ऐसे में शिक्षकों पर यह जिम्मेदारी डालना व्यावहारिक नहीं है।
बीईओ बोले- आदेश पालन नहीं हो रहा था, इसलिए सख्ती दिखाई
नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी सत्यदेव ने कहा कि शिक्षक आदेशों का पालन नहीं कर रहे थे, इसलिए पहले सख्त निर्देश जारी किए गए थे। हालांकि बाद में आदेश में संशोधन कर दिया गया और भूसा दान को पूरी तरह स्वैच्छिक बताया गया। उन्होंने कहा कि किसी पर दबाव नहीं बनाया जा रहा है और यह अभियान बेसहारा गोवंश के संरक्षण के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
डीएम बोले- गोवंश संरक्षण सरकार की प्राथमिकता
डीएम अविनाश सिंह ने कहा कि प्रशासन बेसहारा गोवंश के संरक्षण को लेकर लगातार काम कर रहा है। हर ब्लॉक में भूसा बैंक बनाया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर चारे की कमी न हो। उन्होंने कहा कि गौशालाओं में हरा चारा और भूसे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही अधिकारियों और समाज के लोगों से भी स्वेच्छा से सहयोग की अपील की गई है। हालांकि डीएम ने यह भी कहा कि उन्हें शिक्षकों पर दबाव डालने वाले आदेश की जानकारी नहीं थी।
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