KGMU हॉस्टलों में नॉनवेज बैन पर शुरू हुई सियासत, सपा ने कहा- तुगलकी फरमान, भाजपा बोली- विश्वविद्यालय तय करेगा छात्रों का भोजन

लखनऊ के KGMU हॉस्टलों में नॉनवेज पर रोक लगते ही विवाद गहरा गया है। सपा ने इसे तुगलकी फरमान बताया, जबकि भाजपा ने विश्वविद्यालय के अधिकार का हवाला दिया। धार्मिक नेताओं की भी अलग-अलग राय सामने आई। आखिर यह फैसला क्यों लिया गया और अब विवाद किस दिशा में बढ़ रहा है? 

Jul 15, 2026 - 13:13
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KGMU हॉस्टलों में नॉनवेज बैन पर शुरू हुई सियासत, सपा ने कहा- तुगलकी फरमान, भाजपा बोली- विश्वविद्यालय तय करेगा छात्रों का भोजन

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के छात्रावासों की मेस और कैंटीन में नॉनवेज पर रोक लगाने का फैसला अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टलों में मांसाहारी भोजन पकाने और परोसने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि छात्रों को पर्याप्त पोषण देने के लिए भोजन में प्रोटीन से भरपूर शाकाहारी विकल्प शामिल किए जाएं। हालांकि, प्रशासन का यह फैसला सामने आते ही विपक्ष, धार्मिक नेताओं और राजनीतिक दलों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगीं। किसी ने इसे छात्रों के हित में लिया गया निर्णय बताया तो किसी ने इसे खान-पान की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सवाल उठाए।

क्या है पूरा मामला?
KGMU के चीफ प्रोवोस्ट प्रो. कमल कुमार सावलानी ने आदेश जारी करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के सभी हॉस्टलों की मेस और कैंटीन में अब नॉनवेज न तो बनाया जाएगा और न ही परोसा जाएगा। आदेश में यह भी कहा गया कि छात्रों के पोषण से कोई समझौता नहीं होगा और उनकी डाइट में पर्याप्त मात्रा में शाकाहारी प्रोटीन शामिल किया जाएगा। अब तक विश्वविद्यालय के 18 हॉस्टलों की मेस में सप्ताह में तीन दिन नॉनवेज भोजन परोसा जाता था।

नॉनवेज बैन होने के बाद तेज हुई सियासी लड़ाई 
विश्वविद्यालय के फैसले पर समाजवादी पार्टी ने सबसे तीखी प्रतिक्रिया दी है। सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल दो दिन पहले स्कूल की बच्चियों को लेकर विवादित बयान दे चुकी थीं, फिर आईएएस-पीसीएस की तैयारी करने वाली महिलाओं को लेकर उनका बयान आया। अगर उन्होंने कोई आदेश दिया है तो आदेश मौखिक नहीं होता है। आदेश देना है तो लिखित आदेश दीजिए। किसको-किसको आदेश दीजिएगा? यूपी के जो भाजपा विधायक मटन पार्टी में कुर्सियां चलाते हैं, उनके लिए कोई आदेश देंगी क्या आप? जो भाजपा सांसद बंगाल में मछली-भात खाते हैं, उनके लिए कोई आदेश देंगी क्या? केवल उत्तर प्रदेश में आने के बाद आपकी विचारधारा बदल जाती है, आपका एजेंडा बदल जाता है। यह आदेश तुगलकी फरमान है। वह तुगलकी फरमान, जो लिखित नहीं है, मौखिक रूप से कहा गया है। अगर विश्वविद्यालय प्रशासन केजीएमयू उसका पालन करता है तो सपा समझती है कि संविधान का पालन नहीं हो रहा है, कानून का पालन नहीं हो रहा है। 

भाजपा ने क्या कहा?
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अलग-अलग शैक्षणिक संस्थानों की अलग-अलग पॉलिसी होती है। ये कोई हार्ड एंड फास्ट रूल नहीं होता कहीं भी कि यही भोजन बनाएंगे। छात्रों को कैसा खाना दिया जाएगा, यह फैसला विश्वविद्यालय खुद करता है। अगर ज्यादातर छात्र किसी खास तरह का भोजन पसंद करते हैं, तो संस्थान उसी के अनुसार व्यवस्था कर सकता है। इसे विवाद का विषय नहीं बनाना चाहिए।

धार्मिक नेताओं की भी अलग-अलग राय
लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि KGMU प्रशासन को यह फैसला वापस लेना चाहिए। भारत में 61% से अधिक लोग मांसाहारी हैं। मेडिकल के नजरिए से मांसाहारी भोजन मानव स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। उससे लोगों को इम्यूनिटी बढ़ती है। वहीं शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने अलग राय रखते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी का फैसला है। इस पर किसी को टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है। अगर कोई नॉन-वेज खाना चाहता है तो बाहर जाकर खा सकता है। इसे सियासत से नहीं जोड़ना चाहिए।

परमहंसाचार्य ने फैसले का स्वागत किया
तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगत गुरु परमहंसाचार्य ने विश्वविद्यालय के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि आनंदीबेन पटेल का यह जो फैसला है, इसका हम लोग स्वागत करते हैं। ये फैसला उनका बहुत ही अच्छा है। बच्चें मांसाहार करें, फिर नशा करें, उससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा था। राज्यपाल आनंदीबेन ने जो प्रतिबंधित किया है, हम लोग बहुत खुश हैं। हालांकि हमारा उनका निजी कुछ विवाद भी रहा है। क्षेत्रवाद के कारण कई बार गुजरात के लोगों का उन्होंने समर्थन किया है, तो उसको लेकर मैं उनसे आहत भी हूं। लेकिन जो अच्छा काम है उसकी तो प्रशंसा जरूर की जाएगी।

राज्यपाल की टिप्पणी के बाद बदली तस्वीर
सोमवार को KGMU के दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्रावासों की मेस का निरीक्षण करने का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि निरीक्षण के दौरान मेस में एक्सपायर मसाला पाउडर मिला। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता पर चिंता जताते हुए प्रशासन को बेहतर गुणवत्ता का भोजन उपलब्ध कराने, अच्छा पनीर देने और सभी हॉस्टलों में वॉशिंग मशीन लगाने के निर्देश भी दिए थे। इसी के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने नॉनवेज पर रोक का आदेश जारी किया।

121 साल पुराना है KGMU
1905 में किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के रूप में स्थापित KGMU को वर्ष 2002 में विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। यहां एमबीबीएस, बीडीएस, नर्सिंग, पैरामेडिकल और सुपर स्पेशियलिटी समेत कई मेडिकल पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। देशभर से हजारों छात्र यहां अध्ययन करते हैं और विश्वविद्यालय परिसर में कुल 18 छात्रावास संचालित हैं।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content