"योगी की पुलिस बहुत मारती है, अब नहीं आएंगे यूपी" 27 किलो चांदी लूटने वाले व्हीलचेयर पर हाथ जोड़कर मांगते रहे माफी, भोपाल से वाराणसी आकर की थी लूट
27 किलो चांदी की हाई-प्रोफाइल लूट के बाद कई दिनों तक पुलिस को चकमा देने वाले मध्यप्रदेश के ईरानी गैंग के दो बदमाश आखिरकार वाराणसी पुलिस के हत्थे चढ़ गए। एनकाउंटर के बाद कोर्ट ले जाते समय दोनों व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे माफी मांगते रहे। इस केस में 300 CCTV फुटेज की जांच, फर्जी क्राइम ब्रांच बनकर की गई वारदात, गैंग के ऑपरेट करने का तरीका और पुलिस जांच में सामने आए हर बड़े खुलासे को विस्तार से पढ़िए।
वाराणसी। 27 किलो से ज्यादा चांदी लूटकर फरार हुए दो बदमाश जब पुलिस के शिकंजे में आए तो उनका अंदाज पूरी तरह बदल चुका था। मुठभेड़ में पैर में गोली लगने के बाद व्हीलचेयर पर बैठे दोनों आरोपी पुलिस के सामने हाथ जोड़कर बार-बार एक ही बात कहते रहे कि यूपी में योगी की पुलिस बहुत मारती है... अब यहां नहीं आएंगे। एक मौका दे दीजिए, अब कभी ऐसी गलती नहीं करेंगे। ये दोनों आरोपी मध्यप्रदेश के भोपाल स्थित चर्चित ईरानी गैंग के सदस्य बताए जा रहे हैं। पुलिस ने 3 अगस्त की तड़के मुठभेड़ के बाद दोनों को गिरफ्तार किया था। 4 अगस्त को कोर्ट में पेश करने से पहले भी दोनों पुलिस से रहम की गुहार लगाते रहे। बाद में अदालत में पेशी के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
16 जुलाई को फर्जी क्राइम ब्रांच बनकर की थी 27 किलो चांदी की लूट
पूरी वारदात 16 जुलाई की शाम की है। वाराणसी की सर्राफा मंडी सुड़िया स्थित हेमा ज्वेलर्स के कर्मचारी रेशम 27 किलो 327 ग्राम चांदी लेकर रेशम कटरा स्थित महालक्ष्मी ज्वेलर्स जा रहे थे। उनके साथ दूसरे प्रतिष्ठान का एक कर्मचारी भी था। गोविंदपुरा मोड़ पर बाइक सवार दो युवकों ने दोनों को रोक लिया। खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए झोले की जांच की और कहा कि मालिक को लेकर क्राइम ब्रांच पहुंचो। इतना कहकर वे चांदी से भरा झोला लेकर फरार हो गए। पहले कर्मचारियों को लगा कि कार्रवाई पुलिस की है, लेकिन जब थाने पहुंचे तो पता चला कि असली पुलिस को इस कार्रवाई की कोई जानकारी ही नहीं थी। इसके बाद लंका थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।
300 CCTV फुटेज खंगालने के बाद खुला पूरा राज
वारदात के बाद पुलिस ने जांच का दायरा तेजी से बढ़ाया। करीब 300 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई। इन्हीं फुटेज के आधार पर आरोपियों की गतिविधियां और भागने का पूरा रूट सामने आया। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को शक हुआ कि यह वारदात मध्यप्रदेश के ईरानी गैंग ने अंजाम दी है। इसके बाद विशेष टीम बनाई गई और दोनों संदिग्धों की तलाश शुरू हुई। आखिरकार सोमवार रात लंका थाना क्षेत्र के लौटुबीर इलाके में हुई मुठभेड़ के दौरान दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
एनकाउंटर के बाद 4 किलो चांदी बरामद
पुलिस के अनुसार मुठभेड़ के दौरान दोनों आरोपियों के पैर में गोली लगी। गिरफ्तारी के बाद इनके कब्जे से करीब 4 किलो चांदी भी बरामद की गई है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान शब्बीर और मसल्लाह के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। फरार साथियों की तलाश के साथ-साथ लूटी गई बाकी चांदी की बरामदगी के लिए भी अलग-अलग टीमों को लगाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में गैंग के नेटवर्क और अन्य राज्यों में हुई वारदातों से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।
मुंबई से लेकर भोपाल तक फैला था गैंग का नेटवर्क
पुलिस के अनुसार इस वारदात में मुंबई के ईरानी डेरा से जुड़े हाफिज और जुल्फेकार ने भी सहयोग किया था। वहीं शब्बीर की पत्नी पाकीजा की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि लूटे गए जेवर और चांदी को बाजार में बेचने का काम अक्सर वही करती थी। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने रांची निवासी अमान अली की बलेनो कार बुक कराई थी। उसी कार से वाराणसी पहुंचे और वारदात के बाद प्रयागराज तक गए। वहां कार छोड़ने के बाद बस से जबलपुर और फिर पिपरिया पहुंच गए।
दोनों पर पहले से दर्ज हैं कई मुकदमे
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी शब्बीर पर पहले से 11 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जबकि मसल्लाह के खिलाफ 2 मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस इनके अन्य फरार साथियों की तलाश में जुटी है।
कौन है ईरानी गैंग?
पुलिस के मुताबिक यह गिरोह खुद को ईरानी गैंग कहता है। इसके सदस्य खानाबदोश जीवन जीते हैं और यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश तथा झारखंड समेत कई राज्यों में सक्रिय रहते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वारदात से पहले ये खुद को पुलिस, क्राइम ब्रांच या एसटीएफ का अधिकारी बताकर लोगों का भरोसा जीतते हैं। इसके बाद जांच या चेकिंग के नाम पर नकदी, जेवर या कीमती सामान लेकर फरार हो जाते हैं। गिरोह के सदस्य आपस में ऐसी भाषा में बातचीत करते हैं, जिसे आम लोग आसानी से समझ नहीं पाते। इसी वजह से वारदात की योजना और उसका क्रियान्वयन बेहद गोपनीय तरीके से होता है। पुलिस के अनुसार इस गैंग का मुख्य ठिकाना मध्यप्रदेश के भोपाल स्थित ईरानी डेरा माना जाता है, जहां से इसका नेटवर्क संचालित होता है।
पहले भी वाराणसी को बना चुका है निशाना
यह पहली बार नहीं है जब इस गिरोह ने वाराणसी में वारदात की हो। इससे पहले 24 मार्च 2022 को कबीरचौरा-पियरी मार्ग पर इसी तरह पुलिस चेकिंग का झांसा देकर गाजीपुर के एक कारोबारी से 8 लाख रुपये से भरा बैग लूट लिया गया था।
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