बृजभूषण शरण सिंह पर 50 करोड़ का मानहानि केस, पतंजलि के घी को नकली बताने से शुरू हुआ विवाद
बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पतंजलि फूड्स ने 50 करोड़ रुपये का मानहानि केस दायर किया है। मामला पतंजलि के घी को लेकर दिए गए बयानों से जुड़ा है। इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद अगली तारीख 18 सितंबर तय हुई है।
भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि के बीच चल रहा पुराना विवाद अब अदालत तक पहुंच चुका है। पतंजलि फूड्स ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 50 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा किया है। मामला पतंजलि के घी को लेकर बृजभूषण शरण सिंह की ओर से दिए गए सार्वजनिक बयानों से जुड़ा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में 15 सितंबर को इस मामले की सुनवाई हुई। बृजभूषण शरण सिंह की ओर से उनके वकील अदालत में पेश हुए और वकालतनामा दाखिल किया। उनके अधिवक्ता ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तारीख तय की है।
घी पर बयान से शुरू हुआ विवाद, अब 50 करोड़ का दावा
पूरा विवाद बृजभूषण शरण सिंह के पतंजलि के घी को लेकर दिए गए बयानों से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, 2022 में उन्होंने सार्वजनिक मंच से पतंजलि के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे और इसे नकली बताया था। उन्होंने लोगों से बाजार का घी खरीदने के बजाय घर में गाय या भैंस पालने तक की अपील की थी। इसके बाद पतंजलि और बृजभूषण शरण सिंह के बीच बयानबाजी का सिलसिला शुरू हुआ। अगस्त 2026 में भी बृजभूषण शरण सिंह ने पतंजलि के उत्पादों और देश में मिल रहे कथित मिलावटी घी को लेकर सवाल उठाए थे। अब इसी विवाद ने कानूनी रूप ले लिया है।
पतंजलि का दावा, बयान से ब्रांड और कारोबार को नुकसान
पतंजलि फूड्स की ओर से मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विक्रम मालवीय ने दावा किया कि बृजभूषण शरण सिंह के बयानों से कंपनी की ब्रांड इमेज को नुकसान पहुंचा। कंपनी की ओर से यह भी कहा गया कि बयान सार्वजनिक रूप से प्रसारित हुए और इसका असर कंपनी के शेयर मूल्य पर पड़ा। पतंजलि का दावा है कि इन बयानों के कारण कंपनी को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। इसी आधार पर कंपनी ने 50 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा पेश किया है। हालांकि, इस दावे पर अंतिम फैसला अदालत की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।
जिला कोर्ट से हाईकोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला
यह मामला शुरुआत में इंदौर की जिला अदालत में पहुंचा था। पतंजलि फूड्स का पंजीकृत कार्यालय इंदौर के विजय नगर इलाके में है। शुरुआती कार्यवाही के दौरान बृजभूषण शरण सिंह को नोटिस जारी किए गए और मामला ट्रायल के चरण तक पहुंचा। सुनवाई के दौरान इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को लेकर विवाद सामने आया। कंपनी की ओर से वीडियो और मीडिया रिपोर्ट से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के दस्तावेज पेश किए गए। इसी मुद्दे को लेकर मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ तक पहुंचा। कंपनी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला भी दिया गया। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह से जवाब मांगा था। 15 सितंबर की सुनवाई में उनकी ओर से वकील पेश हुए और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अब 18 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई होगी।
2022 से दोनों पक्षों के बीच चल रही है बयानबाजी
बृजभूषण शरण सिंह और पतंजलि से जुड़ा विवाद नया नहीं है। 2022 में ही बृजभूषण सिंह ने रामदेव और पतंजलि के उत्पादों को लेकर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए थे। उस दौरान उन्होंने पतंजलि ब्रांड के नाम को लेकर भी आपत्ति जताई थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच अलग-अलग मौकों पर बयान सामने आते रहे। अगस्त 2026 में भी बृजभूषण शरण सिंह ने घी में कथित मिलावट के मुद्दे पर पतंजलि और बाबा रामदेव पर सवाल उठाए। अब कंपनी ने इन्हीं बयानों को आधार बनाकर 50 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा किया है।
पतंजलि के घी की गुणवत्ता को लेकर पहले भी हुआ था विवाद
पतंजलि के घी को लेकर इससे पहले भी खाद्य गुणवत्ता का मामला सामने आ चुका है। नवंबर 2025 में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में पतंजलि के गाय के घी के नमूने से जुड़े मामले में अदालत ने निर्माता, वितरक और खुदरा विक्रेता पर कुल 1.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक, अक्टूबर 2020 में लिए गए घी के नमूने राज्य की प्रयोगशाला में फेल हुए थे। इसके बाद केंद्रीय प्रयोगशाला में दोबारा जांच की गई, जहां भी नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा और नवंबर 2025 में आदेश आया। हालांकि, पतंजलि ने इस आदेश को त्रुटिपूर्ण और कानून के अनुरूप नहीं बताया था। कंपनी ने कहा था कि जिस प्रयोगशाला में दोबारा जांच हुई, वह संबंधित परीक्षण के लिए मान्य नहीं थी और जिन मानकों के आधार पर नमूना फेल बताया गया, उनकी वैधता को लेकर भी कंपनी ने सवाल उठाए थे। कंपनी ने इस आदेश के खिलाफ अपील की बात कही थी।
अब 18 सितंबर पर टिकी नजर
बृजभूषण शरण सिंह और पतंजलि फूड्स के बीच चल रहे इस विवाद में फिलहाल मामला अदालत के सामने है। पतंजलि की ओर से 50 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा किया गया है, जबकि बृजभूषण शरण सिंह की ओर से अदालत में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया है। अब 18 सितंबर को होने वाली सुनवाई में बृजभूषण शरण सिंह की ओर से जवाब दाखिल किया जाना है। इसके बाद अदालत इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी। फिलहाल इस पूरे विवाद की सबसे अहम कड़ी वही बयान हैं, जिनमें पतंजलि के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे और जिनके आधार पर कंपनी ने 50 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा किया है।
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