4 साल बाद यूपी को मिलेगा स्थायी DGP, योगी के इस खास अफसर को मिल सकती है प्रदेश की कमान, दिल्ली में हुई अहम बैठक के बाद तेज हुई चर्चाएं

चार साल से कार्यवाहक डीजीपी के सहारे चल रही उत्तर प्रदेश पुलिस को अब स्थायी मुखिया मिलने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण यूपी के नए स्थायी डीजीपी बन सकते हैं। यूपीएससी की ओर से भेजे गए तीन नामों में उनका नाम शामिल है और सरकार जल्द ही अंतिम फैसला ले सकती है। अगर नियुक्ति होती है तो राजीव कृष्ण कम से कम दो साल तक प्रदेश पुलिस की कमान संभालेंगे।

May 30, 2026 - 15:21
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4 साल बाद यूपी को मिलेगा स्थायी DGP, योगी के इस खास अफसर को मिल सकती है प्रदेश की कमान, दिल्ली में हुई अहम बैठक के बाद तेज हुई चर्चाएं

उत्तर प्रदेश पुलिस के शीर्ष पद को लेकर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता अब खत्म होती दिख रही है। करीब चार साल बाद प्रदेश को स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) मिलने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण के नाम पर सरकार अंतिम मुहर लगाने की तैयारी में है। यदि ऐसा होता है तो 2022 के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश पुलिस को पूर्णकालिक मुखिया मिलेगा। राज्य सरकार को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा गया है। इनमें राजीव कृष्ण का नाम भी शामिल है और प्रशासनिक गलियारों में माना जा रहा है कि सरकार उन्हीं पर भरोसा जता सकती है।

दिल्ली में हुई अहम बैठक के बाद तेज हुई नियुक्ति की चर्चा
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 19 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेजे थे। इसके बाद 26 मई को दिल्ली में आयोग की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड और अनुभव के आधार पर तीन अधिकारियों का पैनल तैयार किया गया। इस पैनल में रेणुका मिश्रा, पीयूष आनंद और राजीव कृष्ण के नाम शामिल किए गए। अब अंतिम निर्णय प्रदेश सरकार को लेना है। सूत्रों का कहना है कि राजीव कृष्ण का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आया है।

कौन हैं राजीव कृष्ण, जिन्हें मिल सकती है प्रदेश पुलिस की कमान?
1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण का नाम उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुभवी और जमीनी अधिकारियों में लिया जाता है। उनका जन्म 26 जून 1969 को हुआ था और वे मूल रूप से नोएडा के रहने वाले हैं। उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में रही है, जिन्होंने पुलिसिंग के लगभग हर स्तर पर काम किया है। जिले की कानून व्यवस्था से लेकर जोन और रेंज स्तर की जिम्मेदारियां संभालने तक उनका अनुभव बेहद व्यापक माना जाता है।

प्रयागराज से शुरू हुआ सफर, लखनऊ-आगरा जैसे बड़े शहरों की संभाली कमान
आईपीएस बनने के बाद राजीव कृष्ण की पहली तैनाती प्रशिक्षु अधिकारी के रूप में प्रयागराज में हुई थी। इसके बाद उन्होंने बरेली, कानपुर और अलीगढ़ में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में काम किया। साल 1997 में उन्हें पहली बार जिले की कमान मिली और वे फिरोजाबाद के पुलिस अधीक्षक बने। इसके बाद इटावा, मथुरा, फतेहगढ़, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर, आगरा, लखनऊ और बरेली जैसे महत्वपूर्ण जिलों में एसएसपी के पद पर तैनात रहे। मायावती सरकार के दौरान जब बड़े जिलों में डीआईजी स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही थी, तब उन्हें लखनऊ का डीआईजी बनाया गया था। बाद में वे मेरठ रेंज के आईजी और लखनऊ व आगरा जोन के एडीजी भी रहे।

केंद्र से लेकर यूपी तक मजबूत प्रशासनिक अनुभव
राजीव कृष्ण वर्ष 2012 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए थे। लगभग पांच साल बाद 2017 में उनकी उत्तर प्रदेश वापसी हुई। लौटने के बाद उन्हें पुलिस अकादमी मुरादाबाद में जिम्मेदारी दी गई और फिर लखनऊ जोन के एडीजी बनाए गए। कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और प्रशासनिक समन्वय के मामलों में उनके अनुभव को उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।

प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि
राजीव कृष्ण का परिवार लंबे समय से प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ा रहा है। उनकी पत्नी मीनाक्षी सिंह भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की अधिकारी हैं और वर्तमान में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हैं। उनके साले राजेश्वर सिंह उत्तर प्रदेश की सरोजनीनगर विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे पहले यूपी पुलिस में अधिकारी रहे और बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वहीं राजेश्वर सिंह की पत्नी लक्ष्मी सिंह गौतमबुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त हैं। परिवार के कई अन्य सदस्य भी प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े रहे हैं।

स्थायी DGP बनने पर कम से कम दो साल का कार्यकाल
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और यूपीएससी की गाइडलाइन के अनुसार किसी भी राज्य के स्थायी डीजीपी को कम से कम दो वर्ष का निश्चित कार्यकाल दिया जाता है। ऐसे में यदि राजीव कृष्ण की नियुक्ति होती है तो वे कम से कम दो साल तक इस पद पर बने रहेंगे। दिलचस्प बात यह है कि उनका मूल सेवा कार्यकाल जून 2029 तक है। ऐसे में कार्यवाहक और स्थायी दोनों कार्यकाल को मिलाकर वे लगभग तीन साल तक प्रदेश पुलिस की कमान संभाल सकते हैं।

चार साल से क्यों खाली था स्थायी DGP का पद?
उत्तर प्रदेश में आखिरी पूर्णकालिक डीजीपी मुकुल गोयल थे। मई 2022 में उन्हें पद से हटाए जाने के बाद प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति नहीं हो सकी। इसके बाद डीएस चौहान, आरके विश्वकर्मा, विजय कुमार, प्रशांत कुमार और फिर राजीव कृष्ण कार्यवाहक डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी संभालते रहे। इस दौरान प्रदेश पुलिस का सबसे बड़ा पद लगातार अस्थायी व्यवस्था के भरोसे चलता रहा।

अब नियुक्ति से क्या बदलेगा?
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि पुलिस व्यवस्था में स्थिरता का संकेत भी माना जाता है। निश्चित कार्यकाल मिलने से शीर्ष स्तर पर दीर्घकालिक रणनीति बनाने, अपराध नियंत्रण, पुलिस आधुनिकीकरण और कानून-व्यवस्था से जुड़े बड़े फैसलों को लागू करने में आसानी होती है। यही वजह है कि चार साल बाद होने वाली यह नियुक्ति उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content