UP में अब पशुओं का भी होगा जीवन बीमा: सरकार देगी 85% प्रीमियम, मौत या विकलांगता पर मिलेगी आर्थिक मदद; जानिए आवेदन से क्लेम तक पूरी प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश में पशुपालकों के लिए बड़ी राहत की योजना शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना के तहत गाय, भैंस समेत अन्य पशुओं का बीमा कराया जाएगा। सरकार बीमा प्रीमियम का 85% हिस्सा देगी, जबकि पशुपालक को सिर्फ 15% राशि देनी होगी। पशु की मौत या स्थायी विकलांगता की स्थिति में बीमा राशि मिलेगी। जानिए योजना का लाभ लेने का तरीका, जरूरी दस्तावेज और क्लेम की पूरी प्रक्रिया।

Jul 12, 2026 - 15:31
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UP में अब पशुओं का भी होगा जीवन बीमा: सरकार देगी 85% प्रीमियम, मौत या विकलांगता पर मिलेगी आर्थिक मदद; जानिए आवेदन से क्लेम तक पूरी प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश में पशुपालन करने वाले किसानों और डेयरी संचालकों के लिए सरकार ने बड़ी पहल की है। अब पशुओं की मौत या स्थायी विकलांगता की स्थिति में पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से राहत मिल सकेगी। प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत राज्य के सभी 75 जिलों में 2 लाख 28 हजार 350 से अधिक पशुओं का बीमा कराया जाएगा। इसके लिए सरकार ने करीब 60 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया है। योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी, जबकि पशुपालक को केवल 15 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी। सरकार का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों, भूमिहीन पशुपालकों और डेयरी कारोबार से जुड़े लोगों को अचानक होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना है, क्योंकि कई बार एक पशु की मौत पूरे परिवार की आय पर बड़ा असर डाल देती है।

गाय-भैंस से लेकर बकरी और सुअर तक का होगा बीमा
योजना के तहत अलग-अलग पशुओं की बाजार कीमत के आधार पर बीमा राशि तय की जाएगी। पशु की कीमत का निर्धारण पशु चिकित्साधिकारी और बीमा कंपनी के प्रतिनिधि मिलकर करेंगे। गाय और भैंस का बीमा 50 हजार से 80 हजार रुपए तक किया जाएगा, जबकि बैल, सांड और ऊंट के लिए 40 हजार से 50 हजार रुपए तक की बीमा सुरक्षा मिलेगी। वहीं भेड़, बकरी और सुअर जैसे छोटे पशुओं के लिए भी बीमा की सुविधा उपलब्ध होगी। बीमा राशि पशु की नस्ल, उम्र और बाजार मूल्य के आधार पर तय की जाएगी।

सिर्फ 15% प्रीमियम देकर करा सकेंगे बीमा
इस योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालक को सबसे पहले अपने नजदीकी सरकारी पशु अस्पताल में आवेदन करना होगा। आवेदन मिलने के बाद पशु का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद पशु के कान में 12 अंकों वाला बीमा टैग लगाया जाएगा। यही टैग पशु की पहचान और बीमा का मुख्य आधार होगा। बिना टैग के बीमा मान्य नहीं माना जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक योजना का शासनादेश जल्द जारी होने की संभावना है। इसके बाद बीमा कंपनी के चयन और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। उम्मीद है कि अगस्त से सितंबर के बीच योजना के लिए आवेदन शुरू हो सकते हैं।

किन पशुपालकों को मिलेगा योजना का लाभ?
पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह के मुताबिक, इस योजना का लाभ मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसानों, भूमिहीन पशुपालकों और डेयरी फार्म संचालकों को दिया जाएगा। सरकार की पशुपालन और डेयरी योजनाओं से जुड़े पशुओं को प्राथमिकता के आधार पर बीमा कवरेज दिया जाएगा। पशु की मौत के बाद क्लेम मंजूर होने पर बीमा राशि सीधे पशुपालक के बैंक खाते में भेजी जाएगी। अगर कोई बीमित पशु स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है तो बीमा कंपनी बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान करेगी। योजना को लेकर एक बात साफ है कि यह पशुओं के इलाज का खर्च उठाने वाली योजना नहीं है। यह केवल जीवन बीमा योजना है। यानी पशु के बीमार होने पर इलाज का खर्च बीमा कंपनी नहीं देगी। आर्थिक सहायता केवल पशु की मौत या स्थायी विकलांगता होने की स्थिति में ही मिलेगी।

इन परिस्थितियों में मिलेगा बीमा क्लेम
बीमित पशु की मौत होने पर कई परिस्थितियों में पशुपालक को बीमा राशि मिल सकती है। इसमें लंपी बीमारी, खुरपका-मुंहपका रोग, प्राकृतिक आपदा, आग लगने की घटना, सड़क हादसा या अन्य दुर्घटना और प्रसव के दौरान पशु की मौत जैसी स्थितियां शामिल हैं। वहीं कुछ परिस्थितियों में बीमा कंपनी क्लेम स्वीकार नहीं करेगी। अगर पशु की मौत पशुपालक की लापरवाही से हुई है, जानबूझकर जहर दिया गया है, भूख से मौत हुई है या पशु चोरी हो गया है तो बीमा राशि नहीं मिलेगी। इसके अलावा बिना पोस्टमार्टम और डॉक्टर की रिपोर्ट के पशु को दफनाने पर भी क्लेम नहीं किया जा सकेगा।

2 श्रेणियों में बांटे गए हैं लाभार्थी
वित्त वर्ष 2026-27 में कुल 2 लाख 28 हजार 350 पशुओं का बीमा किया जाएगा। इसमें सामान्य श्रेणी के पशुपालकों के लिए 1 लाख 86 हजार 800 पशु और अनुसूचित जाति के पशुपालकों के लिए 41 हजार 550 पशुओं को शामिल किया गया है। बीमा प्रीमियम में सरकार 85 प्रतिशत हिस्सा देगी, जबकि लाभार्थी को केवल 15 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी।

बीमा के लिए जरूरी होंगे ये दस्तावेज
योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालक को कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें आधार कार्ड, बैंक पासबुक, निवास प्रमाण पत्र या राशन कार्ड, SC/ST वर्ग के लिए जाति प्रमाण पत्र और पशु का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र शामिल हैं।

मौत के बाद 24 घंटे में देनी होगी सूचना 
अगर बीमित पशु की मौत हो जाती है तो पशुपालक को 24 घंटे के अंदर इसकी जानकारी सरकारी पशु अस्पताल या बीमा कंपनी को देनी होगी। इसके बाद सरकारी डॉक्टर पशु का पोस्टमार्टम करेंगे। क्लेम के लिए मृत पशु के साथ पशुपालक की फोटो जरूरी होगी, जिसमें पशु के कान का बीमा टैग और उसका नंबर साफ दिखाई देना चाहिए। सभी जरूरी दस्तावेज जमा होने के बाद 30 दिन के भीतर बीमा राशि सीधे बैंक खाते में भेज दी जाएगी।

75 जिलों में लागू होगी योजना 
उत्तर प्रदेश में करीब 7500 गोसंरक्षण केंद्र संचालित हैं, जहां लगभग 13.50 लाख निराश्रित गायों की देखभाल की जा रही है। सरकार इन गोशालाओं पर हर दिन करीब 8 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश चारा नीति के तहत ग्राम समाज और वन विभाग की जमीन पर हरा चारा तैयार कर गोशालाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content