UP में 57 हजार ग्राम प्रधान बने प्रशासक, लेकिन अब हाईकोर्ट पहुंचा मामला… योगी सरकार के आदेश पर क्यों उठे सवाल?
UP Gram Pradhan: उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को 6 महीने के लिए प्रशासक बनाए जाने का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने योगी सरकार के आदेश पर जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता ने इसे पंचायत राज कानून की मंशा और व्यवस्था के खिलाफ बताया है।
UP Panchayat Raj Act: उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का मामला अब कानूनी बहस का विषय बन गया है। योगी सरकार द्वारा प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में निवर्तमान प्रधानों को 6 महीने के लिए प्रशासक नियुक्त करने के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चुनौती दी गई है। इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 3 जून को होगी। इस फैसले के बाद प्रदेश की पंचायत व्यवस्था और आगामी पंचायत चुनाव को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
हाईकोर्ट पहुंचा ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने का मामला
जनहित याचिका ओमप्रकाश प्रजापति की ओर से दायर की गई है। उनका कहना है कि सरकार का यह आदेश पंचायत राज कानून की मंशा और स्थापित व्यवस्था के विपरीत है, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने शासनादेश और संबंधित कानूनी प्रावधानों का भी जिक्र किया गया। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए सरकार से अपना पक्ष रखने को कहा है।
याचिकाकर्ता ने क्या उठाए सवाल?
याचिकाकर्ता का तर्क है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 12(3)(क) के अनुसार ग्राम प्रधान का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तारीख से अधिकतम पांच वर्ष तक ही होता है। ऐसे में समय पर पंचायत चुनाव न कराकर उसी प्रधान को प्रशासक बनाना उसके कार्यकाल को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ाने जैसा है, जो कानून की भावना के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले जब पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाते थे, तब एडीओ पंचायत या अन्य सरकारी अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया जाता था। इस बार भी यही व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए थी।
कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
याचिकाकर्ता के वकील अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने बताया कि न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने सरकारी वकील को राज्य सरकार से निर्देश लेकर अदालत में पक्ष रखने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया था। इससे एक दिन पहले 25 मई को राज्य सरकार ने आदेश जारी कर निवर्तमान ग्राम प्रधानों को अगले 6 महीने या पंचायत चुनाव होने तक प्रशासक नियुक्त कर दिया। बुधवार से सभी प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि पंचायत चुनाव में देरी और पिछड़ा वर्ग आरक्षण की प्रक्रिया लंबी होने के कारण यह फैसला लिया गया है। इससे सफाई, पेयजल, मनरेगा, सड़क मरम्मत और अन्य विकास कार्य बिना रुकावट जारी रहेंगे। हालांकि प्रशासक बने ग्राम प्रधान कोई बड़ा या नीतिगत फैसला नहीं ले सकेंगे। ऐसे मामलों में जिलाधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी।
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