यूपी में कृषि बदलाव के 9 साल, अन्नदाता को मिला नया आधार
उत्तर प्रदेश में पिछले 9 वर्षों में कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव हुए हैं। योगी सरकार के नेतृत्व में किसानों को आर्थिक सहायता, सिंचाई सुविधा और आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। अब चुनौती इन सुधारों को स्थायी बनाकर किसानों की आय बढ़ाने की है।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की राजनीति और विकास में कृषि हमेशा एक अहम मुद्दा रही है, लेकिन लंबे समय तक किसान सिर्फ वादों तक सीमित रहा। अब पिछले 9 वर्षों में, खासकर योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य की कृषि व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। सरकार का दावा है कि खेती को सिर्फ उत्पादन तक सीमित न रखकर उसे एक मजबूत आर्थिक गतिविधि के रूप में विकसित किया गया है। बीज से लेकर बाजार तक किसान को केंद्र में रखने की कोशिश की गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिली है।
किसान को केंद्र में रखकर बनाई गई नीतियां
2017 के बाद से कृषि नीतियों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब किसान को केवल फसल उगाने वाला नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधि का हिस्सा माना जा रहा है। बीज से बाजार तक की योजना के जरिए किसान को हर स्तर पर सहयोग देने का प्रयास किया गया है।
किसानों को आर्थिक मजबूती देने पर जोर
इन 9 वर्षों में किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए गए। 86 लाख से ज्यादा किसानों की ऋण माफी की गई, जिससे उन्हें तुरंत राहत मिली। वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 3.12 करोड़ किसानों को 99 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता दी गई। इसके साथ किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाओं ने जोखिम को कम करने में मदद की है।
गन्ना क्षेत्र में सुधार और रिकॉर्ड भुगतान
गन्ना किसानों के लिए भी स्थिति में सुधार हुआ है। पहले जहां भुगतान में देरी आम बात थी, वहीं अब 3.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इसके साथ ही प्रदेश एथेनॉल उत्पादन में भी आगे बढ़ा है, जिससे कृषि और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल बना है।
सिंचाई सुविधाओं का हुआ विस्तार
सिंचाई के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव हुआ है। सिंचाई क्षमता 82 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 105 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। 1300 से ज्यादा परियोजनाएं पूरी की गई हैं और सोलर पंप लगाए गए हैं। खासकर बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में इसका सकारात्मक असर देखा गया है।
आधुनिक तकनीक से खेती को नई दिशा
खेती को आधुनिक बनाने के लिए ड्रोन तकनीक, ई-मंडी और किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। 15 लाख से ज्यादा किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है और उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। हालांकि, छोटे किसानों तक इन सुविधाओं की पहुंच अभी भी चुनौती बनी हुई है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला नया सहारा
पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और बागवानी के क्षेत्र में भी प्रदेश ने अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है। इससे किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिली है।
आगे की राह और चुनौतियां
इन 9 वर्षों में कृषि क्षेत्र में कई सुधार हुए हैं, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती इन सुधारों को स्थायी बनाना है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि ये योजनाएं किसानों की आय को कितना स्थायी रूप से बढ़ा पाती हैं।
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