'पानी रुका तो जंग होगी...' पाकिस्तानी रक्षामंत्री ने भारत को दी धमकी, आखिर इंडिया के चिनाब प्रोजेक्ट से क्यों बढ़ी पाक की बेचैनी?
सिंधु जल संधि निलंबित होने के बाद पाकिस्तान की बेचैनी लगातार बढ़ रही है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पहली बार खुले मंच से पानी को युद्ध की वजह बताया है, जबकि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का दरवाजा भी खटखटाया है। सवाल यह है कि आखिर भारत के किस कदम ने इस्लामाबाद को इतना परेशान कर दिया है?
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सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर तनाव अब केवल कूटनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह कह दिया है कि यदि भारत ने पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश की या ऐसी परियोजनाएं बनाईं, जिनसे पाकिस्तान की जल सुरक्षा प्रभावित हुई, तो उनका देश युद्ध का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। दूसरी ओर पाकिस्तान ने इस पूरे विवाद को अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से भी हस्तक्षेप की मांग कर दी है। ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तानी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि पानी किसी भी देश के लिए सिर्फ संसाधन नहीं बल्कि जीवन है। उनका दावा था कि अगर पाकिस्तान को यह महसूस हुआ कि भारत सिंधु जल संधि के प्रावधानों का उल्लंघन कर पानी रोकने की दिशा में बढ़ रहा है, तो यह पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन जाएगा और ऐसी स्थिति में युद्ध भी विकल्प हो सकता है।
भारत के चिनाब प्रोजेक्ट ने क्यों बढ़ाई पाकिस्तान की चिंता?
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने अपने बयान में विशेष रूप से चिनाब नदी और भारत की जल परियोजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को भारत की कुछ परियोजनाओं की निगरानी और तकनीकी जानकारी मिलती थी, लेकिन पिछले एक वर्ष से इस प्रक्रिया में रुकावट आई है। उनका आरोप है कि अब भारत में क्या निर्माण कार्य चल रहे हैं, इसकी जानकारी पाकिस्तान के पास नहीं है और यही उसकी सबसे बड़ी चिंता है। दरअसल, भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। इसके बाद से पाकिस्तान लगातार आशंका जता रहा है कि भारत अब पश्चिमी नदियों पर अपनी परियोजनाओं को तेज गति से आगे बढ़ा सकता है, जिससे पाकिस्तान की जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।ख्वाजा आसिफ ने अपने दूसरे इंटरव्यू में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को भी भारत से जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां प्रदर्शन कर रहे लोग, कुछ मीडिया संस्थान और विदेशों में सक्रिय समर्थक भारत समर्थित नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो पाकिस्तान के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, पीओके में पिछले कुछ समय से स्थानीय लोग बिजली संकट, महंगाई, टैक्स और प्रशासनिक नीतियों को लेकर भी लगातार विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं।
अब संयुक्त राष्ट्र पहुंचा पाकिस्तान
भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश भी तेज कर दी है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष को पत्र लिखकर सिंधु जल संधि के कथित उल्लंघन का मामला उठाया है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत की ओर से चिनाब नदी से जुड़ी दो आधारभूत परियोजनाएं क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय हैं और सुरक्षा परिषद को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिकार अहमद ने भी पुष्टि की कि यह पत्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष को सौंप दिया गया है, जिसमें दक्षिण एशिया की मौजूदा स्थिति और जल विवाद पर पाकिस्तान की चिंताओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
1960 की संधि 2025 में हुई निलंबित
विश्व बैंक की मध्यस्थता में वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के पानी के उपयोग को लेकर दोनों देशों के अधिकार तय किए गए थे। छह दशक से अधिक समय तक यह संधि दोनों देशों के बीच सबसे स्थायी समझौतों में गिनी जाती रही। लेकिन अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी, उसके बाद भारत ने इस संधि को निलंबित करने का फैसला लिया। इसके बाद से दोनों देशों के बीच जल कूटनीति एक नए और अधिक संवेदनशील दौर में प्रवेश कर चुकी है।
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