लखनऊ के चारबाग में रेल कोच रेस्टोरेंट पर गैस संकट, कोयले की भट्ठी पर चल रहा काम
चारबाग स्टेशन के पास स्थित रेल कोच रेस्टोरेंट गैस की कमी का सामना कर रहा है, कोयले से चल रहा है और भारी नुकसान झेल रहा है।
लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित रेल कोच रेस्टोरेंट इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रहा है। 3 मार्च से कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद होने के कारण रेस्टोरेंट का काम लगभग ठप हो गया है। किचन के अधिकतर चूल्हे बंद पड़े हैं और केवल कोयले की भट्ठियों के सहारे काम चलाया जा रहा है। इस वजह से रेस्टोरेंट सामान्य तरीके से नहीं चल पा रहा है।
सीमित मेन्यू, रोजाना 20 हजार का नुकसान
रेस्टोरेंट के मैनेजर विमलेश के अनुसार, गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण केवल तंदूर और कोयले पर बनने वाली चीजें ही तैयार की जा रही हैं। बाकी सभी गैस चूल्हे बंद हैं। इस स्थिति के चलते हर दिन करीब 20 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि अगर जल्द गैस सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो रेस्टोरेंट को बंद करने की नौबत आ सकती है।
आधे कर्मचारियों की छुट्टी, नौकरी पर खतरा
इस संकट का असर कर्मचारियों पर भी साफ दिख रहा है। मुख्य शेफ विजय कश्यप ने बताया कि पहले यहां 14 लोग काम करते थे, लेकिन अब केवल 7 कर्मचारी ही बचे हैं। काम कम होने के कारण आधे स्टाफ को छुट्टी देनी पड़ी है। पिछले 10 दिनों से ठीक से खाना भी नहीं बन पा रहा है। अगर यही हाल रहा तो बाकी कर्मचारियों की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।
ग्राहक लौट रहे निराश, घट रही भीड़
पहले यह रेस्टोरेंट यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय था। खासकर रात के समय यहां अच्छी-खासी भीड़ रहती थी। लेकिन अब मेन्यू के ज्यादातर आइटम उपलब्ध नहीं हैं, जिससे ग्राहक निराश होकर लौट रहे हैं। तंदूर और भट्ठी पर सीमित खाना बनने के कारण रेस्टोरेंट की पहचान और भरोसा दोनों पर असर पड़ रहा है।
बढ़ता नुकसान और आजीविका पर संकट
मैनेजर विमलेश का कहना है कि लगातार हो रहे नुकसान से रेस्टोरेंट की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। खर्चे तो बने हुए हैं, लेकिन आमदनी घट गई है। इस संकट का असर कई परिवारों पर पड़ रहा है, जिनकी आजीविका इसी रेस्टोरेंट से जुड़ी है। अगर जल्द गैस की सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो यह रेस्टोरेंट बंद हो सकता है और कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
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