मुझे पाप लग जाएगा… मंदिरों में चोरी का मास्टरमाइंड, मुस्लिम साथी से करवाता था काम
Uttar Pradesh News: चित्रकूट में मंदिरों में चोरी करने वाले एक अनोखे गिरोह का खुलासा हुआ है। सरगना विजय शुक्ला ने धार्मिक आस्था का बहाना बनाकर चोरी की साजिश रची और मुस्लिम युवक को शामिल किया। पुलिस ने गिरोह और माल खरीदने वाले सोनार को गिरफ्तार कर लिया है।
Chitrakoot News: धर्मनगरी चित्रकूट से अपराध और अंधविश्वास का एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया है। यहां एक शातिर गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसका सरगना खुद को धार्मिक आस्था का पालन करने वाला बताता था, लेकिन उसी ने मंदिरों में चोरी की साजिश रची। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह का सरगना विजय शुक्ला था, जिसने चोरी के लिए एक अलग तरीका अपनाया। वह खुद मंदिर के अंदर नहीं जाता था और एक मुस्लिम युवक को चोरी के लिए हायर करता था।
पाप के डर से बनाया अजीब तरीका
गिरफ्तार आरोपी विजय शुक्ला मूल रूप से चित्रकूट के राजापुर का रहने वाला है और एक हिस्ट्रीशीटर भी है। पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि उसे मंदिर में चोरी करने से पाप लगने का डर रहता था। इसी कारण उसने चोरी का पूरा काम दूसरों के भरोसे छोड़ दिया। उसने बाबरशाह नाम के एक युवक को अपने साथ जोड़कर मंदिरों में चोरी कराने की योजना बनाई।
मंगलवार और शनिवार को करता था रैकी
विजय शुक्ला का तरीका और भी हैरान करने वाला था। वह मंगलवार और शनिवार को किसी भी वारदात को अंजाम नहीं देता था। इन दिनों वह मंदिरों में दर्शन करने के बहाने जाता और वहां सोने-चांदी के मुकुट, छत्र, गदा और घंटों पर नजर रखता था। वह इन्हीं दिनों में पूरी प्लानिंग और रैकी करता था ताकि बाद में आसानी से चोरी की जा सके।
बाहर खड़ा रहता था सरगना, अंदर जाता था साथी
जब चोरी का समय आता था, तो विजय मंदिर के बाहर खड़ा होकर निगरानी करता था। वह खुद गर्भगृह में प्रवेश नहीं करता था। अंदर चोरी करने के लिए बाबरशाह को भेजा जाता था, जो मूर्तियों से कीमती सामान निकालकर लाता था। इसके बाद विजय शुक्ला उस माल को लेकर फरार हो जाता था।
आगरा में गलाकर बेचता था चोरी का माल
चोरी किए गए सोने-चांदी के सामान को विजय शुक्ला गलाकर सिल्लियों में बदल देता था। इसके बाद वह इन्हें आगरा ले जाकर एक सोनार को बेच देता था। पुलिस ने इस सोनार को भी गिरफ्तार कर लिया है, जो चोरी का माल खरीदता था।
हत्या का आरोपी और पुराना हिस्ट्रीशीटर
एसपी अरुण कुमार सिंह के अनुसार, विजय शुक्ला कोई साधारण अपराधी नहीं है। लगभग 20 साल पहले उसने एक हत्या की थी और तब से वह पुलिस की नजर में था। वह पहचान बदलकर आगरा में रह रहा था और बाद में चित्रकूट लौटकर मंदिरों को निशाना बनाने लगा।
कैसे हुआ पूरे गिरोह का खुलासा
पुलिस ने जांच के दौरान भरतकूप राम जानकी मंदिर का मुकुट, अकेलवा बाबा हनुमान मंदिर के छत्र और कर्वी के बाल हनुमान मंदिर की गदा सहित अन्य आभूषण बरामद किए हैं। लगातार चोरी की घटनाओं के बाद पुलिस और सर्विलांस टीम सक्रिय हुई। सूचना मिलने पर आरोग्यधाम क्षेत्र की एक धर्मशाला में छापेमारी की गई, जहां से विजय शुक्ला, बाबरशाह और एक सोनार को गिरफ्तार कर लिया गया। इस तरह पूरे गिरोह का पर्दाफाश हो गया।
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