जयशंकर का दुनिया को कड़ा संदेश, पाबंदियों से नहीं, बातचीत से निकलेगा समाधान, ब्रिक्स में भारत की दहाड़
S Jaishankar: नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया, गाजा संकट, आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, एकतरफा प्रतिबंध और संयुक्त राष्ट्र सुधार जैसे मुद्दों पर भारत का मजबूत पक्ष रखा। भारत ने कहा कि दुनिया को टकराव नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति की जरूरत है।
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने दुनिया के सामने कई अहम मुद्दों पर अपना स्पष्ट और मजबूत पक्ष रखा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को अपने संबोधन में साफ कहा कि दुनिया इस समय अस्थिरता और तनाव के दौर से गुजर रही है, जहां केवल सैन्य ताकत या प्रतिबंध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकते। उन्होंने पश्चिम एशिया के हालात, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, गाजा संकट, एकतरफा प्रतिबंधों और संयुक्त राष्ट्र सुधार जैसे मुद्दों पर भारत का नजरिया दुनिया के सामने रखा। भारत ने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए संवाद, कूटनीति और सहयोग की जरूरत है।
पश्चिम एशिया और समुद्री सुरक्षा पर भारत की चिंता
एस. जयशंकर ने अपने भाषण में पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और रेड सी का जिक्र करते हुए कहा कि समुद्री रास्तों में किसी भी तरह की बाधा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। भारत ने कहा कि ऊर्जा ढांचे पर खतरा और समुद्री मार्गों में असुरक्षा वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए बड़ा जोखिम है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान संकट और खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। भारत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार पूरी दुनिया के लिए बेहद जरूरी है।
गाजा, आतंकवाद और प्रतिबंधों पर सख्त संदेश
भारत ने गाजा में चल रहे मानवीय संकट का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। विदेश मंत्री ने सीजफायर, मानवीय सहायता और दो राष्ट्र सिद्धांत के समर्थन को दोहराया। इसके अलावा लेबनान, सीरिया, सूडान, यमन और लीबिया जैसे देशों का जिक्र करते हुए कहा गया कि क्षेत्रीय अस्थिरता अब पूरी दुनिया की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है। एस. जयशंकर ने एकतरफा प्रतिबंधों पर भी अप्रत्यक्ष हमला बोला। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ लगाए गए दंडात्मक कदम विकासशील देशों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। भारत ने साफ कहा कि दबाव की राजनीति संवाद का विकल्प नहीं हो सकती। आतंकवाद के मुद्दे पर भी भारत ने अपना सख्त रुख दोहराया। विदेश मंत्री ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पूरी दुनिया का साझा मानक होना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र सुधार पर फिर उठी भारत की आवाज
विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार का मुद्दा भी मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात दिखाते हैं कि बहुपक्षीय व्यवस्था कमजोर हो रही है और अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को और टाला नहीं जा सकता। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। ब्रिक्स मंच पर भारत ने एक बार फिर खुद को ऐसे देश के रूप में पेश किया जो टकराव नहीं बल्कि संवाद, कूटनीति और समावेशी वैश्विक व्यवस्था की वकालत करता है।
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