अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल में बड़ा उछाल, 110 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
अमेरिका और ईरान के बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ट्रंप की चेतावनी, होर्मुज स्ट्रेट संकट और युद्ध की आशंकाओं ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है, जिससे पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा बढ़ गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर दिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इसका असर आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो आम लोगों के मासिक खर्च में बड़ा असर दिखाई देगा। खास बात यह है कि इस तेजी के पीछे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई सख्त चेतावनी को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है।
ब्रेंट और WTI क्रूड में तेज उछाल
ताजा आंकड़ों के अनुसार ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में 1.32 प्रतिशत यानी करीब 1.44 डॉलर की बढ़त दर्ज की गई है और यह 110.70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। यह 5 मई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड भी 1.75 प्रतिशत यानी 1.84 डॉलर की तेजी के साथ 107.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। यह 4 मई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है जानकारों के मुताबिक फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर शुरुआती हमलों के बाद से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है।
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी चिंता
डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने बाजार में चिंता और बढ़ा दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अब फैसले लेने का समय खत्म हो रहा है और ईरान को जल्द निर्णय लेना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ और व्हाइट हाउस दूत स्टीव विटकॉफ के साथ युद्ध जैसे हालात पर चर्चा की है। बताया जा रहा है कि ट्रंप ईरान के नए प्रस्ताव का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि अगर ईरान अपनी जिद पर कायम रहा तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
सप्लाई चेन पर बढ़ा दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ा असर भी है। होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही कम हो गई है, जिससे फारस की खाड़ी के देशों को भारी परेशानी हो रही है। मॉर्गन स्टेनली ने चेतावनी दी है कि अगर जून तक यह समुद्री रास्ता प्रभावित रहा तो हालात और खराब हो सकते हैं। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने रूस से कच्चे तेल की खरीद पर दी गई छूट खत्म करने का फैसला लिया है। भारत ने इस छूट को जारी रखने की मांग की थी, लेकिन इससे भी बाजार पर दबाव बढ़ा है। वहीं UAE के एक परमाणु संयंत्र पर ड्रोन हमला होने के बाद ऊर्जा ठिकानों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
फिर युद्ध की तैयारी में इजरायल
स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि 8 अप्रैल को हुए सीजफायर के बाद अब फिर से युद्ध की आशंका बढ़ने लगी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सुरक्षा कैबिनेट के सदस्य ज़ेव एल्किन ने साफ कहा है कि अगर ट्रंप संकेत देते हैं तो इजरायल ईरान पर दोबारा हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि इजरायल के पास पहले से तय टारगेट मौजूद हैं जिन पर कार्रवाई की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ईंधन की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।
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