स्मार्ट मीटर बना सिरदर्द! 40 लाख से ज्यादा घरों की बिजली कटी, अब UPPCL पर आयोग ने लगाया देश का सबसे बड़ा जुर्माना
स्मार्ट मीटर के नाम पर लाखों उपभोक्ताओं को झटका देने वाले बिजली विभाग को अब बड़ा झटका लगा है। रिचार्ज के बाद भी दिनों तक बिजली बहाल नहीं हुई, लाखों परिवार अंधेरे में रहे और विभाग अपनी गलती मानने को तैयार नहीं था। अब नियामक आयोग ने UPPCL पर जुर्माना ठोकते हुए कड़े सवाल पूछे हैं। आखिर क्या थी वह तकनीकी चूक जिसने पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा दिया?
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बिजली विभाग के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। जिन स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को उपभोक्ता सुविधा का नया मॉडल बताया गया था, वही अब विभाग की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहे हैं। प्रदेश में लाखों उपभोक्ताओं की बिजली कटने और रिचार्ज के बाद भी समय पर सप्लाई बहाल न होने के मामले में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) पर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है। आयोग ने अपने सख्त आदेश में कहा कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था के संचालन में गंभीर लापरवाही बरती गई है। साथ ही निगम को 15 दिनों के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने और पूरे मामले पर विस्तृत जवाब देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
रिचार्ज कराया, फिर भी कई दिनों तक नहीं आई बिजली
पूरा विवाद मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान सामने आया, जब बिजली विभाग ने बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में बदल दिया। बैलेंस खत्म होते ही लाखों घरों की बिजली स्वतः कट गई। उपभोक्ताओं ने तत्काल मीटर रिचार्ज कराया, लेकिन बड़ी संख्या में घरों में बिजली सप्लाई दो घंटे के भीतर बहाल नहीं हो सकी। कई मामलों में लोगों को कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान प्रदेशभर में शिकायतों का अंबार लग गया और बिजली विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए।
40 लाख से ज्यादा उपभोक्ता हुए प्रभावित
आयोग के समक्ष पेश आंकड़ों के मुताबिक, 13 मार्च से 10 अप्रैल के बीच कुल 40 लाख 27 हजार 307 उपभोक्ताओं की बिजली कटी।
इनमें से -:
- 18.78 लाख उपभोक्ताओं की बिजली आधे घंटे के भीतर बहाल हुई।
- 22.21 लाख उपभोक्ताओं को दो घंटे के अंदर सप्लाई मिल गई।
- लेकिन करीब 1.93 लाख उपभोक्ताओं को दो घंटे के बाद भी बिजली नहीं मिली और कई परिवारों को कई दिनों तक अंधेरे में रहना पड़ा।
यही आंकड़े आयोग की सख्ती की बड़ी वजह बने।
आयोग ने कहा- नियमों का खुला उल्लंघन
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान माना कि बिजली कंपनियां सेवा मानकों का पालन करने में विफल रहीं। नियमों के अनुसार, स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज होने के बाद अधिकतम दो घंटे के भीतर बिजली सप्लाई बहाल होना अनिवार्य है। आयोग ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को राहत न मिलना तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गंभीर चूक को दर्शाता है।
उपभोक्ता परिषद की याचिका के बाद हुई कार्रवाई
इस मामले को उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग के सामने उठाया था। परिषद ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग ने सेवा गुणवत्ता से जुड़े मानकों का उल्लंघन किया है और उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी। याचिका पर सुनवाई के बाद आयोग ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 और 57 के तहत कार्रवाई करते हुए 7 लाख 18 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
तकनीकी खामी तलाशने के निर्देश
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि केवल जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं है। बिजली विभाग को यह भी पता लगाना होगा कि आखिर ऐसी स्थिति पैदा क्यों हुई। आयोग ने रूट कॉज एनालिसिस कराने के निर्देश देते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर प्रणाली में मौजूद तकनीकी कमियों को तत्काल दूर किया जाए, ताकि भविष्य में लाखों उपभोक्ताओं को फिर ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
स्मार्ट मीटर परियोजना पर बढ़े सवाल
प्रदेश में स्मार्ट मीटर परियोजना को बिजली सुधारों की बड़ी पहल माना जा रहा था, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीकी ढांचा मजबूत नहीं किया गया और उपभोक्ता सेवाओं को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो स्मार्ट मीटर योजना का उद्देश्य ही प्रभावित हो सकता है। आयोग की यह कार्रवाई इसी दिशा में एक बड़ा संदेश मानी जा रही है कि उपभोक्ता हितों से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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