NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- जवाबदेही तय किए बिना नहीं रुकेगा खेल, NTA से पूछा- UPSC में कभी लीक क्यों नहीं होता?

“UPSC लाखों उम्मीदवारों की परीक्षा कराता है, फिर वहां पेपर लीक क्यों नहीं होता?” सुप्रीम Court के इसी सवाल ने NEET-UG विवाद को नया मोड़ दे दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक छात्रों का भविष्य ऐसे ही दांव पर लगता रहेगा। दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने बताया कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। आखिर कोर्ट में क्या-क्या हुआ, NTA से किन सवालों पर जवाब मांगा गया और अब 21 जून के री-एग्जाम को लेकर क्या तैयारी है…

May 29, 2026 - 16:13
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NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- जवाबदेही तय किए बिना नहीं रुकेगा खेल, NTA से पूछा- UPSC में कभी लीक क्यों नहीं होता?

NEET-UG पेपर लीक मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक इस तरह की घटनाओं में जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक पेपर लीक का सिलसिला रुकने वाला नहीं है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में शामिल होने वाले लाखों छात्रों का भविष्य किसी भी हालत में दांव पर नहीं लगाया जा सकता। सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने NTA की तुलना सीधे UPSC से करते हुए पूछा कि जब UPSC इससे कहीं बड़े स्तर पर परीक्षाएं कराता है, तो वहां कभी पेपर लीक जैसी स्थिति क्यों नहीं बनती। कोर्ट ने कहा कि NTA को दूसरे संस्थानों से सीखने की जरूरत है और परीक्षा प्रणाली को स्थायी व मजबूत बनाना होगा।

कोर्ट में NTA से पूछा गया सबसे बड़ा सवाल
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की रही कि 2024 के पेपर लीक विवाद के बाद भी आखिर सिस्टम में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। कोर्ट ने हाई-पावर्ड मॉनिटरिंग कमेटी के प्रमुख और पूर्व ISRO चीफ डॉ. के. राधाकृष्णन से पूछा कि जब सुधारों की सिफारिशें लागू कर दी गई थीं, तो फिर NEET-UG 2026 में दोबारा विवाद क्यों हुआ। राधाकृष्णन ने कोर्ट को बताया कि कमेटी ने 35 लॉन्ग टर्म और 60 शॉर्ट टर्म सुझाव दिए थे, जिनमें से ज्यादातर लागू किए जा चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि NEET-PG परीक्षा सफलतापूर्वक कराई गई थी और अब NEET-UG री-एग्जाम के लिए अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। लेकिन कोर्ट इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया। जस्टिस नरसिम्हा ने साफ कहा कि अगर संस्थाएं सिर्फ एड-हॉक सिस्टम पर चलेंगी, तो ऐसी घटनाएं दोबारा होती रहेंगी।

केंद्र सरकार बोली- खुद PM मोदी कर रहे निगरानी
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद NEET पेपर लीक मामले की जांच और सुधार प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और छात्रों के भविष्य से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। तुषार मेहता ने बताया कि 21 जून को होने वाले री-एग्जाम के लिए नया सिक्योरिटी मैकेनिज्म तैयार किया गया है। हाई लेवल मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि इस बार किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे। उन्होंने कोर्ट में यह भी कहा कि युवाओं के भरोसे को दोबारा मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है और परीक्षा प्रणाली में कई तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं।

3 मई को परीक्षा, 7 मई को लीक की खबर और फिर हंगामा
देशभर में NEET-UG परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी। लेकिन परीक्षा के कुछ ही दिनों बाद 7 मई को पेपर लीक की खबरें सामने आने लगीं। मामला तेजी से बढ़ा और छात्रों के विरोध के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। इसके बाद पूरे देश में लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी नाराजगी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर NTA को लेकर सवाल उठे और विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोला। अब 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई जाएगी।

कोर्ट बोला- छात्रों को ट्रॉमा से बचाना जरूरी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा सिर्फ एक टेस्ट नहीं होती, बल्कि लाखों छात्रों की कई साल की मेहनत और भावनाओं से जुड़ी होती है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसी घटनाएं छात्रों को मानसिक रूप से तोड़ देती हैं और उनके भीतर सिस्टम के प्रति भरोसा कमजोर होता है। जस्टिस नरसिम्हा ने सुझाव दिया कि IITs, बड़ी यूनिवर्सिटीज और टेक्निकल एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर स्थायी मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि परीक्षा एजेंसियों को प्रोफेशनल और तकनीकी रूप से ज्यादा मजबूत बनाना अब समय की जरूरत है।

NTA पर क्यों उठ रहे लगातार सवाल?
NEET पेपर लीक विवाद के बाद NTA लगातार विपक्ष और छात्रों के निशाने पर है। कई याचिकाओं में NTA को भंग करने तक की मांग की गई है। आरोप है कि एजेंसी देश की सबसे संवेदनशील परीक्षाओं को सुरक्षित तरीके से कराने में नाकाम रही है। हालांकि केंद्र सरकार का दावा है कि पिछले एक साल में परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए कई सुधार किए गए हैं। बावजूद इसके सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस जवाबदेही तय करनी होगी।

अब नजर 21 जून के री-एग्जाम पर
अब पूरा फोकस 21 जून को होने वाले री-एग्जाम पर है। लाखों छात्र दोबारा परीक्षा की तैयारी में जुट गए हैं, लेकिन उनके मन में अब भी सवाल हैं कि क्या इस बार परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित होगी। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद साफ है कि इस बार NTA और केंद्र सरकार दोनों पर भारी दबाव रहेगा। क्योंकि यह मामला सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि देश के शिक्षा सिस्टम की विश्वसनीयता का बन चुका है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content