"गाय को माता नहीं मानने वाली सरकार को हटाना होगा", मुरादाबाद में शंकराचार्य का बड़ा हमला, योगी सरकार पर उठाए सवाल
मुरादाबाद में गविष्ठि यात्रा के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने योगी सरकार, RSS और भाजपा पर तीखे सवाल उठाए। गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग से लेकर 52वें शक्तिपीठ, 13वें ज्योतिर्लिंग और सनातन परंपराओं में कथित हस्तक्षेप तक कई बड़े बयान दिए। क्या शंकराचार्य के बयान 2027 के चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं? योगी सरकार पर लगाए गए आरोपों के पीछे क्या तर्क हैं? और आखिर क्यों उन्होंने महाराष्ट्र मॉडल का जिक्र करते हुए भाजपा नेतृत्व पर सवाल उठाए?
गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के लिए निकाली जा रही 81 दिवसीय गविष्ठि यात्रा के दौरान ज्योतिर्मठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गुरुवार को मुरादाबाद में कई ऐसे बयान दिए, जिनकी राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो सकती है। उन्होंने गौ संरक्षण, हिंदुत्व की राजनीति, धर्माचार्यों की भूमिका और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।
"भारत दुनिया का सबसे बड़ा मांस निर्यातक"
अपने संबोधन की शुरुआत भारतीय सभ्यता और गुरु परंपरा से करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि भारत ने दुनिया को गुरु, ऋषि और धर्माचार्य दिए हैं। यहां गुरु को भगवान से भी बड़ा माना गया, लेकिन आज स्थिति यह है कि वही भारत दुनिया के सबसे बड़े मांस निर्यातकों में गिना जाता है। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक बदलाव नहीं बल्कि सभ्यतागत पतन का संकेत है, जिस पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है।
तालिबान का जिक्र कर शंकराचार्य ने दिया बड़ा बयान
शंकराचार्य ने बिना किसी का नाम लिए आरोप लगाया कि देश में परंपरागत धर्माचार्यों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि वेद, पुराण और शास्त्रों के आधार पर धर्म की व्याख्या करने वाले संतों को प्रशासनिक स्तर पर परेशान किया जा रहा है, जबकि सत्ता के अनुरूप बोलने वालों को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने इसे सनातन परंपरा के लिए गंभीर खतरा बताया। अपने संबोधन में शंकराचार्य ने अफगानिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि तालिबान ने सत्ता में आने के बाद उन मौलानाओं को निशाना बनाया जो परंपरागत धार्मिक शिक्षा देते थे। उन्होंने दावा किया कि भारत में भी वैचारिक स्तर पर ऐसी ही प्रवृत्ति दिखाई दे रही है, जहां स्वतंत्र धार्मिक नेतृत्व को पसंद नहीं किया जा रहा।
"52वां शक्तिपीठ और 13वां ज्योतिर्लिंग सनातन परंपरा से छेड़छाड़"
शंकराचार्य ने नागपुर में प्रस्तावित 52वें शक्तिपीठ और गुजरात में बताए जा रहे 13वें ज्योतिर्लिंग का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में 51 शक्तिपीठ और 12 ज्योतिर्लिंगों की मान्यता शास्त्रों से तय है। ऐसे में नए शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंग घोषित करना धार्मिक परंपराओं के साथ खिलवाड़ है और इससे भविष्य में भ्रम की स्थिति पैदा होगी।
RSS-BJP की विचारधारा पर सवाल
शंकराचार्य ने कहा कि हिंदू धर्म में गुरु का स्थान सर्वोच्च है, लेकिन कुछ संगठनों ने गुरु परंपरा को प्रतीकों तक सीमित कर दिया है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को दिशा देने का काम जीवंत गुरु करते हैं, न कि केवल प्रतीकात्मक व्यवस्थाएं। उनके इस बयान को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की कार्यशैली पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी माना जा रहा है।
अटल बिहारी वाजपेयी का भी किया जिक्र
अपने भाषण के दौरान शंकराचार्य ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के एक पुराने सार्वजनिक बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदू धर्म का मूल आधार चरित्र, मर्यादा और आत्मसंयम है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों का मूल्यांकन भी इन्हीं मूल्यों के आधार पर होना चाहिए। गौ संरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए शंकराचार्य ने कहा कि वेदों और सनातन परंपरा में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय संस्कृति में गौ रक्षा केवल धार्मिक विषय नहीं बल्कि राष्ट्रीय कर्तव्य रही है। इसके बावजूद सरकारें आज भी सरकारी अभिलेखों में गाय को केवल पशु के रूप में दर्ज किए हुए हैं।
"योगी सरकार को 40 दिन दिए, लेकिन..."
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा निशाना साधते हुए शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को 40 दिन का समय दिया था कि गाय को पशु श्रेणी से हटाकर माता के रूप में दर्ज किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि समय सीमा पूरी होने के बावजूद सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि केवल भाषणों में गाय को माता कहने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसे सरकारी नीतियों और अभिलेखों में भी लागू करना होगा। शंकराचार्य ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गौमाता को राज्य माता घोषित करने का निर्णय लिया था। हालांकि बाद में उस निर्णय के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े हुए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक घोषणाओं और प्रशासनिक कार्रवाई में अंतर नहीं होना चाहिए।
मुरादाबाद की पांच विधानसभा क्षेत्रों से गुजरी गविष्ठि यात्रा
गुरुवार को शंकराचार्य की गविष्ठि यात्रा मुरादाबाद जनपद में रही। यात्रा की शुरुआत ठाकुरद्वारा विधानसभा क्षेत्र से हुई और इसके बाद यह मुरादाबाद ग्रामीण, मुरादाबाद नगर, कुंदरकी तथा बिलारी विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी। विभिन्न स्थानों पर आयोजित सभाओं में गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के अभियान को लेकर जनजागरण किया गया। दिनभर के कार्यक्रमों के बाद शंकराचार्य का काफिला बिलारी विधानसभा क्षेत्र स्थित ग्रीनवुड फार्म पहुंचा, जहां उनके रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई है। यात्रा प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार को गविष्ठि यात्रा मुरादाबाद से आगे बढ़ते हुए संभल जनपद में प्रवेश करेगी और वहां अभियान के अगले चरण की शुरुआत होगी।
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