FCRA बिल पर अखिलेश का बड़ा हमला, रिजिजू ने दी चुनौती, संसद में आमने-सामने आया विपक्ष और सरकार
FCRA संशोधन बिल पर संसद में अखिलेश यादव और किरेन रिजिजू आमने-सामने आ गए। अखिलेश ने बिल को अल्पसंख्यक विरोधी बताया तो रिजिजू ने चुनौती दी कि एक भी प्रावधान साबित करके दिखाएं। आखिर FCRA बिल को लेकर विपक्ष की आपत्ति क्या है?
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में बुधवार को FCRA संशोधन बिल को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया। लोकसभा में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बिल को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए और इसे अल्पसंख्यक विरोधी बताया। अखिलेश के आरोप पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार करते हुए उन्हें चुनौती दे दी कि वह बिल में ऐसी एक भी बात साबित करके दिखाएं, जो अल्पसंख्यक विरोधी हो। यह बहस ऐसे समय हुई है जब विपक्ष FCRA संशोधन बिल को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि विपक्ष बिना ठोस आधार के बिल को लेकर आरोप लगा रहा है।
अखिलेश ने पूछा- क्या कोई बिल अल्पसंख्यक विरोधी नहीं है?
लोकसभा में FCRA संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, सरकार जो FCRA ला रही है, इसके खिलाफ हम पूरे विपक्ष के लोग हैं। मंत्री जी बताएं कि क्या आज तक आप कोई ऐसा बिल ला पाए हैं, जो अल्पसंख्यक विरोधी न हो? अखिलेश के इस बयान के बाद सदन में राजनीतिक बहस तेज हो गई। समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों की ओर से FCRA बिल को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
रिजिजू बोले- साबित करके दिखाएं, एक भी चीज अल्पसंख्यक विरोधी है
अखिलेश यादव के आरोप पर किरेन रिजिजू ने सीधे चुनौती दी। उन्होंने कहा, मैं अखिलेश यादव को चुनौती देता हूं कि वो साबित करके दिखाएं कि इस बिल में एक भी चीज अल्पसंख्यक विरोधी है। रिजिजू के इस जवाब के बाद FCRA बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गया। अब सियासी बहस इस बात पर केंद्रित हो गई है कि आखिर बिल का कौन सा प्रावधान विपक्ष को अल्पसंख्यक विरोधी नजर आ रहा है और सरकार उस आरोप को किस आधार पर खारिज कर रही है।
FCRA के साथ संसद के बाहर राम मंदिर चढ़ावे पर भी प्रदर्शन
FCRA बिल को लेकर सदन के भीतर बहस चल रही थी, वहीं संसद परिसर के बाहर समाजवादी पार्टी के सांसदों ने राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे पर प्रदर्शन किया। अखिलेश यादव, डिंपल यादव और जया बच्चन समेत सपा सांसद दानपेटी और बोरी लेकर पहुंचे। सांसदों ने दूध और पानी की बोतलें भी हाथ में ले रखी थीं। इसके जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर राजनीतिक निशाना साधा गया, जिसमें उन्होंने अयोध्या के चढ़ावा मामले की जांच के बाद सब दूध का दूध और पानी का पानी होने की बात कही थी। सपा सांसद मानसून सत्र की शुरुआत से ही इस मामले में सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
FCRA पर विपक्ष का विरोध, सरकार की चुनौती
बुधवार की घटनाओं से साफ है कि FCRA संशोधन बिल संसद में एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के तौर पर सामने आ रहा है। विपक्ष इसे लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार विपक्ष के आरोपों को चुनौती दे रही है। अखिलेश यादव का सवाल और किरेन रिजिजू का जवाब अब इस बहस का सबसे अहम हिस्सा बन गया है। एक तरफ विपक्ष बिल के प्रावधानों को लेकर आशंकाएं जता रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार कह रही है कि यदि इसमें अल्पसंख्यक विरोधी कोई प्रावधान है तो उसे स्पष्ट रूप से सामने रखा जाए।
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