आंधी-तूफान से यूपी में 117 की हुई मौत, इस बीच राहत आयुक्त के विदेश जाने पर CM योगी हुए नाराज, मुख्य सचिव से पूछा- ऐसे वक्त में छुट्टी की मंजूरी कैसे मिली?
जब यूपी के कई जिलों में आंधी-तूफान से 117 लोगों की जान चली गई थी और राहत कार्यों की सबसे ज्यादा जरूरत थी, उसी दौरान प्रदेश के राहत आयुक्त विदेश दौरे पर थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जब राहत कार्यों की रिपोर्ट नहीं मिली और वजह सामने आई, तो मामला सीधे मुख्य सचिव तक पहुंच गया। आखिर किस आधार पर मिली विदेश यात्रा की मंजूरी, क्यों नाराज हुए सीएम योगी और क्या है पूरे विवाद की अंदरूनी कहानी?
उत्तर प्रदेश में 13 मई को आए भीषण आंधी-तूफान ने कई जिलों में तबाही मचा दी थी। सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए, जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया और 117 लोगों की मौत ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया। ऐसे समय में राहत और पुनर्वास कार्यों की कमान संभालने वाले सबसे महत्वपूर्ण अधिकारियों में शामिल राहत आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद के विदेश दौरे पर होने की जानकारी सामने आने के बाद सरकार के भीतर ही बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल नाराजगी जताई, बल्कि राहत आयुक्त को विदेश यात्रा की अनुमति देने वाले मुख्य सचिव एसपी गोयल से भी जवाब तलब कर लिया है।
जब सीएम ने मांगी रिपोर्ट, तब खुला पूरा मामला
सूत्रों के मुताबिक, आंधी-तूफान प्रभावित जिलों में राहत सामग्री वितरण, मुआवजा भुगतान और पुनर्वास कार्यों की प्रगति जानने के लिए मुख्यमंत्री ने राहत आयुक्त से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन रिपोर्ट समय पर नहीं पहुंची। जब अधिकारियों से कारण पूछा गया तो जानकारी मिली कि राहत आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद 15 मई से 23 मई तक विदेश यात्रा पर हैं। बताया जाता है कि उन्होंने 14 मई को आधे दिन तक कार्यालय का कामकाज संभाला और उसके बाद विदेश रवाना हो गए। यहीं से पूरा मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में आया और उन्होंने यह जानना चाहा कि प्रदेश में इतनी बड़ी आपदा के बीच राहत आयुक्त को विदेश जाने की अनुमति आखिर किस आधार पर दी गई।
मुख्य सचिव की मंजूरी पर उठे सवाल
जांच में सामने आया कि राहत आयुक्त की विदेश यात्रा को मुख्य सचिव एसपी गोयल की मंजूरी प्राप्त थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सीधे मुख्य सचिव से जवाब मांगा। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने यह सवाल उठाया कि जब प्रदेश प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा था और राहत कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता थे, तब ऐसे संवेदनशील पद पर बैठे अधिकारी को विदेश जाने की अनुमति देना क्या उचित था? यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि प्रशासनिक व्यवस्था में राहत आयुक्त की भूमिका आपदा प्रबंधन के दौरान बेहद अहम मानी जाती है।
पीएम मोदी की अपील के बाद और बढ़ी संवेदनशीलता
इस विवाद को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को देश के मंत्रियों, अधिकारियों और नागरिकों से अपील की थी कि वे कम से कम एक वर्ष तक अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचें। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अलग-अलग बैठकों में मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रधानमंत्री की भावना से अवगत कराया था। ऐसे में राहत आयुक्त का विदेश दौरा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया।
मुख्य सचिव ने रखा अपना पक्ष
विवाद बढ़ने के बाद मुख्य सचिव एसपी गोयल ने मुख्यमंत्री के सामने अपना पक्ष भी रखा है। सूत्रों के अनुसार, उनका कहना है कि राहत आयुक्त की विदेश यात्रा को मंजूरी प्रधानमंत्री की अपील से काफी पहले दे दी गई थी। मुख्य सचिव का तर्क है कि चूंकि अनुमति पहले ही स्वीकृत हो चुकी थी, इसलिए बाद में उसे निरस्त नहीं किया गया। हालांकि, सवाल यह उठ रहा है कि 13 मई को आई भीषण आपदा और उसके बाद की परिस्थितियों को देखते हुए क्या इस निर्णय की पुनर्समीक्षा की जानी चाहिए थी?
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