'चंपत राय का इस्तीफा रोकना चाहते थे सदस्य' ट्रस्ट की बैठक में संविधान के आगे बेबस दिखे सदस्य, गोपाल राव पर भड़के कोषाध्यक्ष, बोले - हटो यहां से

राम मंदिर ट्रस्ट की बंद कमरे में हुई बैठक में चंपत राय का इस्तीफा बचाने की कोशिश हुई, लेकिन ट्रस्ट के संविधान ने पूरा फैसला बदल दिया। गोपाल राव को बाहर जाने तक कहा गया, अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठे और नए महासचिव के नाम पर बनी सहमति।

Jul 7, 2026 - 12:19
 0
'चंपत राय का इस्तीफा रोकना चाहते थे सदस्य' ट्रस्ट की बैठक में संविधान के आगे बेबस दिखे सदस्य, गोपाल राव पर भड़के कोषाध्यक्ष, बोले - हटो यहां से

राम मंदिर में दान और व्यवस्थाओं को लेकर उठे विवाद के बाद सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक कई मायनों में बेहद अहम रही। बंद कमरे में हुई इस बैठक में सिर्फ चंपत राय के इस्तीफे पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, जिम्मेदारियों और भविष्य की व्यवस्था को लेकर भी कई बड़े फैसले लिए गए। सबसे अहम बात यह रही कि ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य चंपत राय को पद पर बनाए रखना चाहते थे, लेकिन ट्रस्ट के संविधान में मौजूद एक प्रावधान ने पूरी स्थिति बदल दी और उनका इस्तीफा स्वतः स्वीकार माना गया।

बैठक शुरू होने से पहले ही बढ़ा तनाव
बैठक शुरू होने से पहले ही राम मंदिर परिसर का माहौल असहज हो गया था। दोपहर करीब 2:45 बजे जब ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि यात्री सुविधा केंद्र पहुंचे, तो बाहर आमंत्रित सदस्य गोपाल राव खड़े दिखाई दिए। उन्हें देखते ही गोविंद देव गिरि नाराज हो गए और उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर गोपाल राव यहां मौजूद रहे, तो अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास बैठक में शामिल नहीं होंगे। इसके बाद गोपाल राव वहां से हटकर परिसर के कंट्रोल रूम की ओर चले गए और बैठक खत्म होने तक बाहर ही रहे।

मनाने के बाद बैठक में शामिल हुए महंत नृत्य गोपाल दास
सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास भी शुरुआत में बैठक में शामिल होने के पक्ष में नहीं थे। मामला मीडिया में आने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी बड़े दिनेश जी उनसे मिलने पहुंचे। काफी समझाइश और आग्रह के बाद ही महंत नृत्य गोपाल दास अपने शिष्य कमल नयन दास के साथ व्हीलचेयर पर बैठक स्थल पहुंचे, जिसके बाद बैठक की औपचारिक शुरुआत हो सकी।

गोविंद देव गिरि ने रखा चंपत राय का इस्तीफा
ठीक तीन बजे बैठक शुरू हुई। सभी ट्रस्टी अपनी-अपनी सीट पर बैठ चुके थे, जबकि कुछ सदस्य ऑनलाइन माध्यम से जुड़े थे। बैठक की शुरुआत करते हुए कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने चंपत राय का इस्तीफा सदस्यों के सामने रखा। उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं से रामभक्तों की आस्था को गहरी ठेस पहुंची है और इससे महासचिव चंपत राय बेहद आहत हैं। उनका मानना है कि जब तक पूरी जांच पूरी नहीं हो जाती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। इसलिए उन्होंने अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। गोविंद देव गिरि के वक्तव्य के बाद कुछ देर तक बैठक कक्ष में सन्नाटा छाया रहा। इसके बाद एक-एक कर ट्रस्ट सदस्यों ने अपनी राय रखनी शुरू की। अधिकांश ट्रस्टियों का मानना था कि मौजूदा परिस्थितियों में चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि उन्होंने वर्षों तक ट्रस्ट के लिए काम किया है और जांच पूरी होने से पहले उनका पद छोड़ना उचित नहीं होगा।

के. परासरन ने पढ़ा संविधान का प्रावधान
इसी दौरान ऑनलाइन जुड़े वरिष्ठ विधिवेत्ता के. परासरन ने ट्रस्ट का संविधान सामने रखा। उन्होंने संबंधित प्रावधान पढ़ते हुए बताया कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार महासचिव यदि स्वयं इस्तीफा देता है, तो वह स्वतः प्रभाव से स्वीकार माना जाएगा। यानी ट्रस्ट के पास उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का कोई अधिकार नहीं है। संविधान का यह प्रावधान सामने आते ही बैठक का पूरा माहौल बदल गया और जिन सदस्यों ने पहले इस्तीफा रोकने की बात कही थी, उन्होंने भी नियमों के तहत उसे स्वीकार करने पर सहमति जता दी।

अनिल मिश्रा की जिम्मेदारी पर उठे सबसे ज्यादा सवाल
चंपत राय के इस्तीफे के बाद चर्चा ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर केंद्रित हो गई। बैठक में कहा गया कि गणना कक्ष की जिम्मेदारी उनके पास थी और इसी वजह से हुई लापरवाही की जवाबदेही भी उन्हीं पर बनती है। कई ट्रस्ट सदस्यों ने उनकी कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना।

गोपाल राव को हटाने पर बनी सहमति
इसके बाद आमंत्रित सदस्य गोपाल राव की भूमिका पर चर्चा हुई। निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि यदि अनिल मिश्रा की जिम्मेदारी तय की जा रही है, तो गोपाल राव को इससे अलग नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि गोपाल राव ने अपने पद का दुरुपयोग किया और मंदिर की व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार भी नहीं किए। बैठक में मौजूद अन्य ट्रस्ट सदस्यों ने भी इस राय का समर्थन किया, जिसके बाद उन्हें सभी जिम्मेदारियों से मुक्त करने का फैसला लिया गया। बैठक के दौरान कमल नयन दास और दिनेंद्र दास ने गोपाल राव पर मंदिर की पारंपरिक पूजा व्यवस्था में बदलाव करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि श्रीराम मंदिर वैष्णव परंपरा का मंदिर है और यहां वर्षों से घंट-घड़ियाल के साथ पूजा होती रही है, लेकिन इस व्यवस्था में बदलाव कराया गया, जिससे मंदिर की परंपरा प्रभावित हुई।

नए महासचिव के लिए कृष्ण मोहन के नाम पर बनी सहमति
चंपत राय के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट के नए महासचिव को लेकर भी चर्चा हुई। विचार-विमर्श के दौरान कृष्ण मोहन का नाम सामने आया, जिस पर अधिकांश ट्रस्ट सदस्य सहमत दिखाई दिए। इसके साथ ही ट्रस्ट में पहली बार पूर्णकालिक सीईओ नियुक्त करने के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी। इसके लिए रिटायर्ड जस्टिस प्रदीप कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े की समिति बनाई गई, जो चयन प्रक्रिया का प्रारूप तैयार करेगी। इस पर अंतिम फैसला 22 जुलाई को होने वाली अगली बैठक में लिया जाएगा। बैठक में दान से जुड़े विवाद पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सदस्यों ने माना कि मंदिर को दान देने वाले कई श्रद्धालु अपनी वस्तुओं को लेकर लगातार दावा कर रहे हैं, लेकिन ट्रस्ट की ओर से अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। इससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी। इसके बाद कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने करीब 2800 दान की गई वस्तुओं का रिकॉर्ड सदस्यों के सामने रखा और इस पूरी जानकारी को सार्वजनिक करने पर सहमति बनी।

चंपत राय को बताया गया ईमानदार
बैठक में SIT रिपोर्ट के आधार पर चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका पर भी चर्चा हुई। ट्रस्ट सदस्यों ने एक स्वर में चंपत राय की ईमानदारी पर भरोसा जताया, जबकि अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए। सदस्यों का मानना था कि जांच पूरी होने तक इन दोनों की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।

डीएम ने फैसलों पर जताई सहमति
अयोध्या के जिलाधिकारी और ट्रस्ट सदस्य शशांक त्रिपाठी भी बैठक में मौजूद रहे। उन्होंने किसी भी मुद्दे पर अलग राय नहीं रखी और ट्रस्ट के अन्य सदस्यों द्वारा लिए गए फैसलों पर अपनी सहमति जताई।

यतींद्र मोहन मिश्रा को ट्रस्ट में शामिल करने का आया प्रस्ताव 
बैठक के दौरान निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने दिवंगत राजा विमलेंद्र मोहन मिश्र की जगह उनके पुत्र यतींद्र मोहन मिश्रा को ट्रस्ट का सदस्य बनाए जाने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव पर आगे विचार करने की बात कही गई।

चंपत राय परिसर तक पहुंचे, लेकिन बैठक से दूर ही रहे
दिलचस्प बात यह रही कि तय समय पर चंपत राय भी राम मंदिर परिसर पहुंचे थे। उन्होंने कुछ ट्रस्ट सदस्यों से संक्षिप्त बातचीत की, लेकिन बैठक कक्ष में प्रवेश नहीं किया। वहीं ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे ही नहीं।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content