चढ़ावा विवाद के बीच चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा, टिन्नू समेत आठ आरोपी हुए गिरफ्तार, योगी बोले- दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। उधर 8 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि योगी आदित्यनाथ, अरविंद केजरीवाल और संजय राउत के बयानों से मामला राजनीतिक रूप भी ले चुका है। आखिर इस पूरे विवाद की शुरुआत कैसे हुई और अब आगे क्या होगा?
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दोनों ने अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को भेज दिया है। ट्रस्टी नृपेंद्र मिश्रा ने भी दोनों के इस्तीफे की जानकारी की पुष्टि की है। हालांकि ट्रस्ट की ओर से अभी तक इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है।
चंपत राय के करीबी टिन्नू समेत आठ आरोपी गिरफ्तार
मामले में गुरुवार देर शाम ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर पहली एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने देर रात चंपत राय के करीबी बताए जा रहे रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर 14 दिन की रिमांड मांगने की तैयारी में है। हालांकि एफआईआर में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा या ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। इसी वजह से जांच की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
रामलला के दर्शन करने पहुंचे केजरीवाल
राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब कानूनी दायरे से निकलकर राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल उठाते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे ने राम मंदिर निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये और चार किलो चांदी की ईंट दान की थी, लेकिन वर्षों बाद भी ट्रस्ट की ओर से उसकी रसीद नहीं मिली। उन्होंने पूछा कि वह चांदी की ईंट आखिर कहां गई और इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा। उधर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने कहा कि जिसने भी इस मामले में महापाप किया है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने एफआईआर को दिखावटी कार्रवाई बताते हुए आरोप लगाया कि बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
7 जून से शुरू हुआ विवाद
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी। इसी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई तेज हुई और एफआईआर दर्ज होने के साथ गिरफ्तारियां भी शुरू हुईं।
योगी बोले- आस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई है और सरकार दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी। उन्होंने कहा कि जनआस्था के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और दोषियों को किसी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी। योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज सवाल उठा रहे हैं, वही पहले भगवान राम के अस्तित्व और अयोध्या पर सवाल खड़े करते थे। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर भी हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों ने पहले रामभक्तों पर गोली और लाठियां चलवाईं, वे आज आस्था की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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