'राममंदिर में शुरू से हो रही चोरी' चढ़ावे में घोटाले के आरोपों पर बोले शंकराचार्य, पूर्व लेखा प्रभारी ने भी गड़बड़ियों को लेकर किया बड़ा दावा
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित करोड़ों रुपए की गड़बड़ी का मामला अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के तीखे आरोप, मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी के सनसनीखेज दावे और भाजपा के वरिष्ठ नेता विनय कटियार की जांच की मांग ने विवाद को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। सवाल सिर्फ पैसों का नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भरोसे का भी है।
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब लगातार नया मोड़ ले रहा है। पहले समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने करोड़ों रुपए की कथित चोरी का आरोप लगाया, फिर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े किए। अब इस विवाद में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी होने का दावा करने वाले महिपाल सिंह और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे भाजपा नेता विनय कटियार की एंट्री ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।
'राम मंदिर में तो शुरू से ही चोरी की चर्चा रही'
एटा पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने विवाद को और गर्माते हुए कहा कि राम मंदिर से जुड़े वित्तीय विवाद कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि मंदिर आंदोलन के दौरान से ही कई तरह के आरोप सामने आते रहे हैं। शंकराचार्य ने कहा कि जब मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई, तब जमीनों के सौदों को लेकर भी सवाल उठे थे। उन्होंने ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि अब जब करोड़ों रुपए की गड़बड़ी के आरोप सामने आ रहे हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पूर्व लेखा प्रभारी का दावा- मैंने चोरी पकड़ी, अगले दिन हटा दिया गया
विवाद को सबसे बड़ा मोड़ तब मिला जब खुद को राम मंदिर का पूर्व लेखा प्रभारी बताने वाले महिपाल सिंह सामने आए। उन्होंने दावा किया कि मंदिर में चढ़ावे को लेकर अनियमितताएं कोई नई बात नहीं थीं। महिपाल के अनुसार उन्होंने कथित गड़बड़ियों की शिकायत ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों से की थी, लेकिन कार्रवाई के बजाय उन्हें ही पद से हटा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की पुरानी फुटेज तक हटवा दी गई थी। उनके इन दावों ने विवाद को और गहरा कर दिया है। महिपाल सिंह ने यह भी दावा किया कि मंदिर में आने वाले सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य कीमती चढ़ावे का पूरा रिकॉर्ड उनके सामने नहीं रखा जाता था। उनका कहना है कि चढ़ावे से जुड़े कई फैसले सीमित लोगों तक ही रहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी को लेकर कई बार सवाल उठाए गए, लेकिन जवाब नहीं मिला। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
विनय कटियार की एंट्री से बढ़ी हलचल
राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल भाजपा नेता और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार भी विवाद के बीच अयोध्या पहुंचे। उन्होंने कहा कि जब मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हो तो हर सवाल का जवाब मिलना चाहिए। कटियार ने साफ कहा कि जांच होगी तो वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी और लोगों के मन में पैदा हुए संदेह भी दूर होंगे।
पीएमओ तक पहुंचा मामला, ट्रस्ट से मांगी गई रिपोर्ट
विवाद बढ़ने के साथ मामला अब प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुका है। भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह द्वारा सीबीआई जांच की मांग किए जाने के बाद पीएमओ ने मंदिर ट्रस्ट से रिपोर्ट तलब की है। वहीं राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने भी ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चढ़ावे और उसके लेखा-जोखा को लेकर चर्चा की है। वहीं इस मामले को लेकर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय का कहना है कि मंदिर के चढ़ावे में किसी प्रकार की चोरी या वित्तीय गड़बड़ी की कोई पुष्टि नहीं हुई है। ट्रस्ट का दावा है कि सभी वित्तीय प्रक्रियाएं तय नियमों के अनुसार संचालित होती हैं और चढ़ावे का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है।
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