2 करोड़ की रिकवरी, 150 संदिग्धों की पहचान, राम मंदिर चढ़ावा केस में SIT की 6 दिन की पड़ताल पूरी, आज-कल में सीएम योगी को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी अब सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित मामला नहीं रह गया है। छह दिनों तक चली SIT की गहन जांच के बाद 150 संदिग्धों की सूची तैयार हुई है और कई बड़े नाम जांच के घेरे में बताए जा रहे हैं। करोड़ों रुपये की रिकवरी, बैंक खातों की पड़ताल, CCTV फुटेज और ट्रस्ट के पुराने रिकॉर्ड खंगालने के बाद अब सबकी नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट पर है। आखिर जांच में क्या मिला और किन लोगों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है?
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) शनिवार शाम करीब आठ बजे अपनी छह दिन की पड़ताल पूरी कर लखनऊ लौट गई। टीम अपने साथ सभी जरूरी दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और जांच से जुड़े अहम रिकॉर्ड लेकर गई है। अब माना जा रहा है कि रविवार देर शाम या सोमवार तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
जांच का दायरा बढ़ा, 150 संदिग्धों की सूची तैयार
SIT की जांच के दौरान सिर्फ मंदिर कर्मचारियों से पूछताछ तक बात सीमित नहीं रही। जांच में करीब 150 ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार इनमें से लगभग 25 लोगों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। जिन लोगों से SIT पूछताछ कर चुकी है, उन्हें फिलहाल बिना अनुमति कहीं बाहर न जाने की चेतावनी भी दी गई है ताकि जरूरत पड़ने पर दोबारा पूछताछ की जा सके। पूरी जांच के दौरान राम मंदिर में प्रभाव रखने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सबसे ज्यादा जांच एजेंसियों के निशाने पर रहे। SIT ने लगभग हर दिन उनसे पूछताछ की। सिर्फ टिन्नू ही नहीं, बल्कि उसके रिश्तेदारों, करीबी सहयोगियों और उनसे जुड़ी संपत्तियों की भी विस्तार से जानकारी जुटाई गई। जांच एजेंसियों ने यह भी पता लगाने की कोशिश की कि कथित तौर पर निकाली गई रकम का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया।
CCTV से लेकर बैंकिंग सिस्टम तक हर कड़ी की हुई जांच
SIT ने जांच के दौरान मंदिर परिसर के CCTV फुटेज, चढ़ावे की गिनती की पूरी प्रक्रिया, नकदी को बैंक तक पहुंचाने की व्यवस्था, रिकॉर्ड रखने के तरीके और वित्तीय दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की। छठे दिन टीम ने सभी संदिग्धों और आरोपियों के बैंक खातों की जानकारी भी जुटाई। माना जा रहा है कि वित्तीय लेन-देन की जांच से कई नई जानकारियां सामने आ सकती हैं।
2021 तक के खंगाले गए रिकॉर्ड
SIT ने सिर्फ हाल के रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि वर्ष 2021 तक के पुराने दस्तावेज भी खंगाले। दानपात्रों से मिली राशि के उपयोग, खर्चों और भूमि खरीद से जुड़े मामलों की भी जांच की गई। बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ कर वित्तीय प्रक्रिया को समझा गया। सूत्रों के मुताबिक, जांच की आंच अब मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष स्तर तक पहुंचती दिखाई दे रही है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। वहीं मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। जांच एजेंसियों ने अब तक करीब दो करोड़ रुपये की रिकवरी की है। यह बरामदगी लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू की निशानदेही पर हुई है। ये सभी मंदिर में चढ़ावे की गिनती से जुड़े कार्यों में शामिल बताए जा रहे हैं। 13 जून को टिन्नू के घर से सोना भी बरामद हुआ था। हालांकि, बरामद सोने की वास्तविक मात्रा को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
पूर्व मंत्री के आरोपों से शुरू हुआ विवाद
राम मंदिर चढ़ावा विवाद की शुरुआत राजनीतिक आरोपों से हुई थी। समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे पवन पांडेय ने 7 जून को दावा किया था कि मंदिर से पांच से साढ़े सात करोड़ रुपये तक की चोरी हुई है। इसके बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी। दूसरी ओर, मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ऐसी किसी चोरी की पुष्टि नहीं हुई है। मामले ने राजनीतिक तूल तब पकड़ा जब भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की। इसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मंदिर ट्रस्ट से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर ली। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT जांच शुरू कराई।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
