संसद में कंगना रनौत का खास अंदाज, 800 साल पुरानी साड़ी ने खींचा सबका ध्यान
कंगना रनौत ने संसद में 800 साल पुरानी दुर्लभ कोडली करप्पुर साड़ी पहनी, जो भारतीय विरासत और पारंपरिक शिल्प कौशल को उजागर करती है।
एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने अनोखे अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। संसद में उनकी मौजूदगी हमेशा ही खास रहती है, लेकिन इस बार उनका पारंपरिक लुक सबसे ज्यादा सुर्खियों में आ गया। हाल ही में जब कंगना संसद के बाहर नजर आईं, तो उन्होंने एक ऐसी साड़ी पहनी थी, जिसका इतिहास करीब 800 साल पुराना बताया जा रहा है। यह साड़ी सिर्फ एक फैशन स्टेटमेंट नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और पारंपरिक शिल्पकला की एक अनमोल धरोहर मानी जा रही है। उनके इस लुक ने फैशन और संस्कृति से जुड़े लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
800 साल पुरानी विरासत से जुड़ी है साड़ी
कंगना रनौत ने इस खास मौके पर कोडाली करुप्पुर साड़ी पहनी थी, जो अपनी ऐतिहासिक पहचान के लिए जानी जाती है। कहा जाता है कि यह साड़ी करीब 800 साल पहले तंजावुर की महारानियां पहनती थीं। इस साड़ी को बनाने में काफी समय लगता है और इसकी कारीगरी बेहद बारीक और खास होती है। यही वजह है कि इसे शाही और विरासत से जुड़ा परिधान माना जाता है।
क्या है इस साड़ी का इतिहास
कोडाली करुप्पुर साड़ी का इतिहास बहुत पुराना है और यह तमिलनाडु के करुप्पुर गांव से जुड़ा हुआ है। 18वीं सदी में यह साड़ी खासतौर पर राजघरानों की रानियों के लिए बनाई जाती थी। इसे हाथ से बुना जाता है और प्राकृतिक रंगों से रंगा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कारीगरों को महीनों तक मेहनत करनी पड़ती है। साड़ी के बॉर्डर पर सोने-चांदी जैसे डिजाइन बनाए जाते हैं, जो इसे बेहद रॉयल लुक देते हैं। समय के साथ यह कला लगभग खत्म होने लगी थी, लेकिन अब इसे फिर से जीवित करने की कोशिश की जा रही है।
कंगना की साड़ी की खासियत
कंगना रनौत की साड़ी भी बेहद खूबसूरती से तैयार की गई थी। इसमें प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया था और जरी का काम बहुत ही सलीके से किया गया था। साड़ी में बेज और ब्राउन रंग का प्रिंट था, जो इसे एक क्लासी और एलिगेंट लुक दे रहा था। इसके बॉर्डर को खास तरीके से डिजाइन किया गया था, जिससे यह और भी शाही लग रही थी। कंगना ने इसके साथ एक सिंपल प्लेन ब्लाउज पहना, जिसकी स्लीव पर साड़ी के प्रिंट से मिलता-जुलता बॉर्डर दिया गया था। इस पूरे लुक ने उनके स्टाइल को और भी खास बना दिया।
फैशन के साथ संस्कृति का संदेश
कंगना का यह लुक सिर्फ फैशन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए उन्होंने भारतीय परंपरा और शिल्पकला को भी बढ़ावा दिया। उनके इस अंदाज से यह साफ है कि पारंपरिक पहनावा आज भी लोगों के बीच खास जगह रखता है।
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