अखिलेश यादव के भाई धर्मेंद्र यादव की पूर्व पत्नी ने BJP नेता से रचाई शादी, CM आवास में हुई थी पहली मुलाकात, जानिए कैसे दोस्ती से शुरू हुई कहानी सात फेरों तक पहुंची...
एक तरफ समाजवादी परिवार से जुड़ा अतीत, दूसरी तरफ भाजपा की नई राजनीतिक पहचान। फर्रुखाबाद की जिला पंचायत अध्यक्ष मोनिका यादव और मेरठ के जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी की शादी सिर्फ दो नेताओं का निजी फैसला नहीं, बल्कि राजनीति, संघर्ष, तलाक, करियर और नई शुरुआत की ऐसी कहानी है, जिसकी शुरुआत मुख्यमंत्री आवास में हुई मुलाकात से हुई और अंत हिमाचल की वादियों में सात फेरों के साथ हुआ। आखिर कैसे करीब आए दोनों नेता और क्यों चर्चा में है यह शादी?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अक्सर गठबंधन, चुनावी समीकरण और सियासी रिश्ते चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार चर्चा किसी राजनीतिक समझौते की नहीं, बल्कि दो नेताओं की नई जिंदगी की शुरुआत की है। फर्रुखाबाद की जिला पंचायत अध्यक्ष मोनिका यादव और मेरठ के जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी ने हिमाचल प्रदेश में परिवार की मौजूदगी में शादी कर ली। दोनों की यह दूसरी शादी है और पिछले करीब एक साल से दोनों एक-दूसरे के संपर्क में थे। दिलचस्प बात यह है कि इस रिश्ते की शुरुआत किसी राजनीतिक मंच या चुनावी कार्यक्रम से नहीं, बल्कि विकास योजनाओं पर हुई एक सरकारी बैठक से हुई थी। यही मुलाकात धीरे-धीरे दोस्ती में बदली और फिर जीवनसाथी बनने के फैसले तक पहुंच गई।
सपा परिवार से भाजपा तक, मोनिका यादव का लंबा राजनीतिक सफर
मोनिका यादव का नाम उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया नहीं है। वह पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव की बेटी हैं, जिन्हें कभी मुलायम सिंह यादव का बेहद करीबी माना जाता था। उनका परिवार दशकों से फर्रुखाबाद की राजनीति में प्रभाव रखता आया है। परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाली मोनिका यादव तीसरी पीढ़ी की नेता हैं। उनके दादा राजेन्द्र सिंह यादव भी प्रदेश की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे थे और कई बार विधायक चुने गए थे।
जब राजनीतिक रिश्ता निजी रिश्ते में बदला और फिर टूट गया
मुलायम सिंह यादव से करीबी संबंधों के चलते मोनिका यादव की शादी समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव से हुई थी। उस समय इसे समाजवादी परिवार के भीतर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और पारिवारिक रिश्ते के रूप में देखा गया था। हालांकि समय के साथ दोनों के रिश्तों में दूरी बढ़ती गई। राजनीतिक गतिविधियों और पारिवारिक परिस्थितियों के बीच यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चल पाया। वर्ष 2016 में दोनों का तलाक हो गया और बाद में दोनों ने अपनी-अपनी राह चुन ली।
सपा छोड़ भाजपा में आईं और जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं
तलाक के बाद मोनिका यादव ने अपनी राजनीतिक पहचान अलग तरीके से बनाने का फैसला किया। वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव से पहले उन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा के समर्थन के साथ उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीता और फर्रुखाबाद की राजनीति में खुद को एक स्वतंत्र राजनीतिक चेहरे के रूप में स्थापित किया। यह उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जाता है।
जर्मनी का करोड़ों का कारोबार छोड़ मेरठ लौटे गौरव चौधरी
दूसरी तरफ मेरठ के रहने वाले गौरव चौधरी की कहानी भी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। पढ़ाई के लिए जर्मनी गए गौरव ने वहां इंटरनेशनल बिजनेस की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। होटल, रियल एस्टेट और होलसेल कारोबार में उन्होंने बड़ा बिजनेस खड़ा किया। लेकिन सफलता के बावजूद उनका मन अपनी मिट्टी में ही लगा रहा। वर्ष 2021 में वह भारत लौटे और राजनीति में कदम रखा। वापसी के कुछ ही महीनों बाद उन्होंने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और बाद में मेरठ के जिला पंचायत अध्यक्ष बन गए।
मुख्यमंत्री आवास में हुई पहली मुलाकात
इस कहानी का सबसे दिलचस्प अध्याय मुख्यमंत्री आवास से जुड़ा है। वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलों के विकास मॉडल और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर एक विशेष प्रस्तुति कार्यक्रम आयोजित किया था। गौरव चौधरी को उनके अंतरराष्ट्रीय बिजनेस अनुभव के कारण और मोनिका यादव को उनके प्रशासनिक एवं कॉर्पोरेट अनुभव के चलते इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। यहीं दोनों की पहली मुलाकात हुई। शुरुआत में बातचीत विकास, पंचायत व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों तक सीमित रही, लेकिन समय के साथ दोनों के बीच संवाद बढ़ता गया। धीरे-धीरे यह पेशेवर परिचय निजी रिश्ते में बदल गया।
एक साल की दोस्ती के बाद शादी का फैसला
करीब एक साल से दोनों एक-दूसरे के संपर्क में थे। परिवारों की सहमति और आपसी समझ के बाद दोनों ने शादी का फैसला लिया। गुरुवार को हिमाचल प्रदेश में परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी में दोनों ने सात फेरे लेकर नई जिंदगी की शुरुआत की। राजनीतिक हलकों में इस शादी की चर्चा इसलिए भी है क्योंकि यह दो अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमियों से आए नेताओं का मिलन माना जा रहा है।
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