गाजीपुर में बीमा कंपनी पर सख्त कार्रवाई, क्लेम न देने पर फोरम का बड़ा आदेश
Uttar Pradesh News: गाजीपुर में बीमा क्लेम न देने पर उपभोक्ता फोरम ने कंपनी को बड़ा झटका दिया। फोरम ने पीड़ित को 30 लाख रुपये और इलाज का खर्च 7% ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। सड़क हादसे में घायल पीड़ित का पैर काटना पड़ा था, जिसके बाद उसने न्याय की लड़ाई लड़ी।
Ghazipur News: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से एक अहम मामला सामने आया है, जहां बीमा क्लेम न देने पर जिला उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया है। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए एक व्यक्ति की शिकायत पर सुनवाई करते हुए फोरम ने कंपनी को इलाज का खर्च और पूरी बीमा राशि लौटाने का आदेश दिया है। इस फैसले ने उपभोक्ताओं के अधिकारों को लेकर एक मजबूत संदेश दिया है।
हादसे के बाद शुरू हुई परेशानी
जानकारी के अनुसार, गाजीपुर कोतवाली क्षेत्र के गोराबाजार निवासी देवेंद्र यादव ने 31 जनवरी 2023 को जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने 8,304 रुपये का प्रीमियम जमा कर अपनी बाइक का बीमा कराया था, जिसमें 30 लाख रुपये का कवर शामिल था। कुछ समय बाद वह अपने भाई के साथ बाइक से जा रहे थे, तभी उनकी बाइक डिवाइडर से टकरा गई। इस हादसे में उनके पैर में गंभीर चोट आई और उन्हें बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। इलाज में करीब ढाई लाख रुपये खर्च हुए।
संक्रमण के कारण काटना पड़ा पैर
हादसे के बाद देवेंद्र यादव ने बीमा कंपनी को तुरंत सूचना दी और कंपनी ने क्लेम नंबर भी जारी किया। लेकिन इसके बावजूद क्लेम का निस्तारण नहीं किया गया। इस बीच चोट के कारण उनके पैर में संक्रमण फैल गया और हालत इतनी गंभीर हो गई कि डॉक्टरों को उनका एक पैर काटना पड़ा। इस वजह से वह 85 प्रतिशत दिव्यांग हो गए।
दस्तावेज देने के बाद भी नहीं मिला पैसा
पीड़ित ने बताया कि उन्होंने बीमा कंपनी द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज समय पर जमा कर दिए थे। यहां तक कि 24 सितंबर 2021 को कंपनी का सर्वेयर भी जांच के लिए आया था। इसके बावजूद कंपनी ने कोई भुगतान नहीं किया, जिससे परेशान होकर उन्होंने उपभोक्ता फोरम का रुख किया।
फोरम ने दिया सख्त आदेश
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष सुजीत कुमार श्रीवास्तव, सदस्य रणविजय मिश्रा और दीपा रानी की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद बीमा कंपनी को दो माह के भीतर 30 लाख रुपये की बीमा राशि और इलाज में खर्च रकम 7 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है। यह फैसला पीड़ित के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
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