फतेहपुर में अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापा, जांच के दौरान सपा नेता का हाई-वोल्टेज ड्रामा, मंत्री से रिश्तेदारी का दावा कर अधिकारियों पर बनाया दबाव
फतेहपुर में एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी अचानक सियासी रंग ले बैठी। जांच के दौरान कथित अनियमितताओं, रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति और अधिकारियों से तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक सपा नेता खुद को भाजपा के एक मंत्री का करीबी बताते नजर आ रहे हैं, जिसके बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। आखिर छापेमारी के दौरान ऐसा क्या हुआ कि टीम बिना किसी बड़ी कार्रवाई के लौट गई? क्या स्वास्थ्य विभाग की जांच पर राजनीतिक दबाव पड़ा या इसके पीछे कोई और वजह थी?
फतेहपुर में एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी उस वक्त सुर्खियों में आ गई, जब जांच के दौरान सेंटर संचालक और अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में खुद को समाजवादी पार्टी से जुड़ा बताने वाले संचालक अधिकारियों पर दबाव बनाते दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने प्रदेश सरकार के एक मंत्री से रिश्तेदारी होने का दावा भी किया, जिसके बाद पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया। जिले में अवैध और नियमों के विपरीत संचालित हो रहे मेडिकल संस्थानों पर कार्रवाई के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने सदर कोतवाली क्षेत्र के बिंदकी बस स्टैंड के पास स्थित अमेरिकन अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापा मारा। अधिकारियों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान सेंटर पर अधिकृत रेडियोलॉजिस्ट मौजूद नहीं मिले, जबकि नियमों के मुताबिक उनकी उपस्थिति आवश्यक है।
जांच के बीच बढ़ा विवाद
छापेमारी के दौरान टीम ने सेंटर के संचालन, रजिस्टर और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच शुरू की। इसी दौरान सेंटर संचालक रामनरेश पटेल और अधिकारियों के बीच बहस शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बहस इतनी बढ़ गई कि मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में रामनरेश पटेल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से तीखे अंदाज में बात करते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने एसीएमओ डॉ. इस्तियाक पर दबाव बनाने की कोशिश की और खुद को भाजपा सरकार के मंत्री राकेश सचान का करीबी रिश्तेदार बताया।
वीडियो वायरल होने के बाद चर्चा तेज
वीडियो सामने आने के बाद जिले में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि जांच के दौरान अनियमितताएं मिली थीं तो मौके पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। वहीं, विपक्षी दल और स्थानीय लोग भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो जाने के कारण जांच टीम बिना कोई कठोर कार्रवाई किए वापस लौट गई। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
स्वास्थ्य विभाग की नजर में क्यों अहम है मामला?
पीसीपीएनडीटी एक्ट और स्वास्थ्य विभाग के नियमों के तहत किसी भी अल्ट्रासाउंड सेंटर में अधिकृत रेडियोलॉजिस्ट की मौजूदगी अनिवार्य होती है। इसके अलावा सभी रिकॉर्ड और दस्तावेजों का सही रखरखाव भी जरूरी है। ऐसे मामलों में अनियमितता मिलने पर लाइसेंस निलंबन से लेकर कानूनी कार्रवाई तक का प्रावधान है।
रिपोर्ट-: रवि सिंह
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
