LPG की किल्लत से बढ़ी टेंशन… सरकार ने निकाला पुराना फॉर्मूला, 10 साल बाद रसोई में लौटेगा केरोसिन, नया प्लान लागू
पश्चिम एशिया युद्ध के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। एलपीजी की बढ़ती मांग के बीच सरकार ने एक दशक बाद मिट्टी के तेल का अतिरिक्त आवंटन कर दिया है।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। गैस सिलेंडरों की अचानक बढ़ती मांग और आपूर्ति में आई बाधा के कारण देश के कई हिस्सों में गैस को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस स्थिति के बीच एक ऐसा ईंधन फिर से चर्चा में आ गया है जिसे लोग लगभग भूल चुके थे। यह ईंधन है केरोसिन यानी मिट्टी का तेल। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने के बाद सरकार ने एक दशक बाद मिट्टी के तेल के आवंटन को बढ़ाने का फैसला किया है।
क्यों अचानक कम पड़ने लगी गैस
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी कुल जरूरत का करीब 88 प्रतिशत तेल विदेशों से खरीदता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। यही वह समुद्री मार्ग है जहां से भारत को हर दिन लगभग 25 से 27 लाख बैरल कच्चा तेल मिलता है। इसके अलावा देश की करीब 55 प्रतिशत एलपीजी और लगभग 30 प्रतिशत एलएनजी की आपूर्ति भी इसी रास्ते से होती है। आपूर्ति प्रभावित होने के कारण पेट्रोलियम कंपनियों ने घरेलू गैस को प्राथमिकता दी है। इसका असर कमर्शियल गैस सिलेंडरों पर पड़ा है और होटल, रेस्तरां जैसे व्यावसायिक उपभोक्ताओं को गैस की सप्लाई में भारी कटौती करनी पड़ी है।
होटल और घरों के लिए नए ईंधन का सहारा
गैस की कमी को देखते हुए सरकार ने वैकल्पिक ईंधनों की अनुमति दी है। होटल और रेस्तरां को एक महीने के लिए बायोमास, आरडीएफ पेलेट और कोयले जैसे ईंधनों के इस्तेमाल की अस्थायी छूट दी गई है। वहीं आम घरों में खाना पकाने के लिए एलपीजी की कमी न हो, इसके लिए केरोसिन का अतिरिक्त आवंटन किया गया है। सरकार ने राज्यों को मिलने वाले एक लाख किलोलीटर के नियमित कोटे के ऊपर 48 हजार किलोलीटर मिट्टी का तेल अतिरिक्त दिया है। एक दशक से ज्यादा समय बाद इस तरह से केरोसिन के कोटे में बढ़ोतरी की गई है।
गैस जमाखोरी रोकने के लिए नया नियम
गैस की कमी की खबरों से लोगों में घबराहट बढ़ी और एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग अचानक तेजी से बढ़ गई। पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया कि वास्तविक कमी नहीं है, बल्कि लोग घबराहट में ज्यादा बुकिंग कर रहे हैं। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने नया नियम लागू किया है। अब ग्रामीण इलाकों में सब्सिडी वाले सिलेंडर की अगली बुकिंग के लिए न्यूनतम समय 21 दिन से बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। शहरी क्षेत्रों में यह सीमा 25 दिन ही रखी गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि देश में एलपीजी की औसत डिलीवरी अभी भी लगभग 2.5 दिन में हो रही है। साथ ही घरेलू उत्पादन करीब 28 प्रतिशत बढ़ाया गया है और अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस समेत लगभग 40 देशों से आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
कभी रसोई की पहचान था मिट्टी का तेल
आज के समय में केरोसिन का नाम सुनकर लोगों को हैरानी हो सकती है, लेकिन एक दौर था जब यह गांव से लेकर शहर तक हर घर की जरूरत हुआ करता था। लालटेन जलाने से लेकर स्टोव पर खाना पकाने तक इसका व्यापक उपयोग होता था। कच्चे तेल को रिफाइन करते समय पेट्रोल और डीजल के बीच के तापमान पर निकलने वाला यह हल्का ईंधन कभी बेहद सस्ता और आसानी से उपलब्ध था। हालांकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2013-14 से 2022-23 के बीच इसके उपयोग में हर साल लगभग 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसका कारण स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते कदम थे। गांवों में बिजली पहुंचने, सोलर पैनल के बढ़ते इस्तेमाल और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त एलपीजी कनेक्शन मिलने से मिट्टी के तेल पर निर्भरता लगभग खत्म हो गई। साल 2014 में दिल्ली को देश का पहला केरोसिन-मुक्त शहर भी घोषित किया गया था और 2019 में राशन दुकानों पर इसकी सब्सिडी बंद हो गई थी। लेकिन अब वैश्विक युद्ध के साये में यही पुराना ईंधन फिर से रसोई में वापसी करता दिखाई दे रहा है।
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