तिलक लगाता है... बहुत हिंदू बनता है, दरोगा की मौत के बाद FIR से मचा हड़कंप, इंस्पेक्टर पर लगे गंभीर आरोप
Badaun News: बदायूं में कोर्ट सुरक्षा में तैनात दरोगा मेघश्याम गौतम की संदिग्ध मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। मृतक के भाई की शिकायत पर इंस्पेक्टर शाहिद अली के खिलाफ धार्मिक आधार पर प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में कोर्ट सुरक्षा में तैनात दरोगा मेघश्याम गौतम की संदिग्ध मौत का मामला अब नया और संवेदनशील मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। दरोगा की मौत के बाद उनके परिवार ने लगातार मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। अब मृतक के भाई रामेश्वर दयाल की शिकायत पर सिविल लाइंस थाने में न्यायालय सुरक्षा प्रभारी शाहिद अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित करने, मानसिक उत्पीड़न करने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी हलचल तेज हो गई है।
किराए के कमरे में मिला था दरोगा का शव
जानकारी के अनुसार, 4 जून को दरोगा मेघश्याम गौतम का शव मधुबनी कॉलोनी स्थित उनके किराए के कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला था। घटना के बाद से ही परिजन इसे सामान्य आत्महत्या नहीं बल्कि मानसिक प्रताड़ना से जुड़ा मामला बताते रहे हैं। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि इंस्पेक्टर शाहिद अली दरोगा मेघश्याम गौतम को उनके माथे पर तिलक लगाने और धार्मिक आस्था को लेकर बार-बार अपमानित करते थे। परिवार का दावा है कि उनसे कथित तौर पर “बहुत हिंदू बनता है” और “तिलक लगाता है” जैसी टिप्पणियां की जाती थीं।
मानसिक दबाव और गलत ड्यूटी लगाने के आरोप
परिजनों का कहना है कि मेघश्याम गौतम लंबे समय से इन बातों से परेशान थे। उन्होंने कई बार फोन पर और घर आने पर अपनी परेशानी परिवार के लोगों से साझा की थी। एफआईआर में यह भी कहा गया है कि उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से कथित तौर पर गलत तरीके से ड्यूटी लगाई जाती थी। इसके अलावा गाली-गलौज करने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। परिवार का दावा है कि लगातार मानसिक दबाव और प्रताड़ना ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था।
परिजनों ने उठाए कई सवा
मृतक के परिवार का आरोप है कि जब उन्हें घटना की जानकारी मिली और वे मौके पर पहुंचे, तब तक शव को कमरे से हटाकर जिला अस्पताल की मोर्चरी भेजा जा चुका था। उनका कहना है कि उन्हें घटनास्थल की वास्तविक स्थिति देखने का अवसर भी नहीं मिला। मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। धार्मिक टिप्पणी, मानसिक उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे आरोपों को देखते हुए पुलिस जांच तेज कर दी गई है। फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
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